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    लुधियाना में बढ़े बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीज, लोगों में मानसिक रोग का खतरा बढ़ा रहा बदलता मौसम?

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 08:38 PM (IST)

    लुधियाना में मौसम में बदलाव के कारण बाइपोलर डिसऑर्डर के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। मनोचिकित्सकों के अनुसार धूप कम होने से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। इस बीमारी के दो चरण होते हैं मेनिया और डिप्रेशन। लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए और मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

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    मौसम में बदलाव से बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीज बढ़े? ( प्रतीकात्मक फोटो)

    जागरण संवाददाता, लुधियाना। पिछले एक महीने से मौसम में बड़े स्तर पर बदलाव आया है। हर दूसरे दिन शहर में बादल छाए रहते हैं और वर्षा होती है। धूप का आना कम हो गया है। इसका असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।

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    मनोचिकित्सकों के अनुसार, हाल के दिनों में बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस बीमारी में मरीज की मनोदशा और शारीरिक ऊर्जा के स्तर में अत्यधिक परिवर्तन होता है, जिसे हाइपोमेनिया भी कहा जाता है।

    इस दौरान व्यक्ति कभी अत्यधिक उदासी या निराशा का अनुभव करता है तो कभी उसकी ऊर्जा और व्यवहार में तेजी आ जाती है।

    बदलते मौसम की वजह से हो सरकता है डिसऑर्डर?

    मनोचिकित्सकों के अनुसार, बाइपोलर डिसऑर्डर से प्रभावित अधिकांश मरीज 25 से 60 वर्ष की आयु के होते हैं।

    एडवांस माइंड वेलनेस सेंटर के निदेशक और मनोचिकित्सक डा. हरप्रीत सिंह के अनुसार, यह बीमारी किसी भी मौसम में हो सकती है, लेकिन यह विशेष रूप से बरसात के मौसम में अधिक देखी जाती है। इस दौरान सूर्य की रोशनी कम हो जाती है, जिससे समस्या बढ़ जाती है।

    पहले चरण में क्या होता है?

    बाइपोलर डिसऑर्डर दो चरणों में होता है। पहले चरण में मेनिया आता है, जबकि दूसरे चरण में डिप्रेशन। मेनिया के दौरान व्यक्ति अधिक बातें करता है।

    उसे नींद की आवश्यकता कम महसूस होती है। दो घंटे की नींद लेने पर भी उसे लगता है कि उसने बहुत अधिक सो लिया। व्यक्ति ओवर कान्फिडेंट हो जाता है।

    कई मरीज धार्मिक हो जाते हैं, जबकि अन्य अत्यधिक खर्च करने लगते हैं। वहीं, कुछ मरीजों में शक करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

    दूसरे चरण में क्या होता है?

    दूसरे चरण में, डिप्रेशन का अनुभव होता है। इस दौरान व्यक्ति का मन उदास हो जाता है। उदासी थोड़े समय के लिए नहीं होती, बल्कि यह लंबे समय तक बनी रहती है।

    इस दौरान नींद और भूख में कमी आ जाती है, जबकि कुछ लोगों में भूख बढ़ जाती है। कई मरीजों में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है और वे दूसरों से बात करने में हिचकिचाते हैं।

    ऊर्जा स्तर में कमी आ जाती है, और कई बार व्यक्ति निराशा का अनुभव करता है। जब डिप्रेशन बढ़ जाता है तो आत्महत्या के विचार भी आने लगते हैं।

    डॉ. हरप्रीत सिंह ने दिए सुझाव

    यदि किसी को इस बीमारी के लक्षण महसूस होते हैं तो मानसिक रोगों को शारीरिक रोगों की तरह गंभीरता से लेना आवश्यक है।

    बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक रोग है और इसके लक्षण महसूस होने पर मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    दवाओं, नियमित काउंसलिंग और थेरपी के माध्यम से बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीज को सामान्य जीवन जीने में मदद मिल सकती है।

    कई मरीज सामाजिक कलंक के कारण दवा लेना बंद कर देते हैं, जिससे समस्या फिर से उत्पन्न हो जाती है।