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    Kamika Ekadashi 2025: वर्षों बाद कामिका एकादशी पर ध्रुव और वृद्धि योग समेत बन रहे हैं कई मंगलकारी संयोग

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Thu, 17 Jul 2025 05:30 PM (IST)

    सावन के महीने में कामिका और पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है। इस महीने में सावन सोमवार के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही सोमवार व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से अविवाहित जातकों की शादी जल्द हो जाती है। कामिका एकादशी(Kamika Ekadashi 2025) के दिन लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है।

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    Kamika Ekadashi 2025: कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, सोमवार 21 जुलाई को कामिका एकादशी है। यह पर्व हर साल सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाता है।

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    ज्योतिषियों की मानें तो कामिका एकादशी पर कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से भी मुक्ति मिलेगी। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

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    कामिका एकादशी? (Kamika Ekadashi 2025 Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 20 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी और 21 जुलाई को सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त होगी। इस प्रकार 21 जुलाई को कामिका एकादशी मनाई जाएगी। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाएगी।

    कामिका एकादशी पारण समय

    कामदा एकादशी का पारण 22 जुलाई को सुबह 05 बजकर 37 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 05 मिनट के मध्य कर सकते हैं। साधक सुविधा अनुसार समय पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा कर व्रत खोल सकते हैं।

    कामिका एकादशी शुभ योग (Kamika Ekadashi 2025 Shubh Yoga)

    • कामिका एकादशी पर वृद्धि योग का संयोग शाम 06 बजकर 39 मिनट तक है।
    • कामिका एकादशी पर ध्रुव योग का संयोग शाम 06 बजकर 39 मिनट बन रहा है।
    • सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण दिन भर हो रहा है।
    • अमृत सिद्धि योग का संयोग रात 09 बजकर 37 मिनट से हो रहा है।

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 05 बजकर 36 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 07 बजकर 18 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 14 मिनट से 04 बजकर 55 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 44 मिनट से 03 बजकर 39 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 07 बजकर 17 मिनट से 07 बजकर 38 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।