Trending

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    2 जून को गुरु कर्क राशि में गोचर, मेष से कन्या राशि तक किसे लाभ और किसे सावधानी?

    Updated: Sun, 31 May 2026 11:31 AM (IST)

    बृहस्पति देव 2 जून 2026 को अपनी उच्च राशि कर्क में गोचर करेंगे, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना गया है। यह गोचर मेष से कन्या राशि तक के जातकों के जीव ...और पढ़ें

    preferred source google
    News Article Hero Image

    गुरु का कर्क राशि में गोचर 2026 (AI Generated Image)

    HighLights

    1. गुरु 2 जून 2026 को कर्क राशि में करेंगे प्रवेश।

    2. उच्च राशि में गोचर से मिलेगा अत्यंत शुभ फल।

    3. मेष से कन्या राशि के लिए विशेष ज्योतिषीय प्रभाव।

    आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति देव (Jupiter) को ज्ञान, सौभाग्य, विस्तार और दैवीय कृपा का कारक माना गया है। उन्हें देवताओं का गुरु कहा जाता है। आने वाली 2 जून 2026 को रात के 01:50 बजे बृहस्पति देव अपनी उच्च राशि, कर्क में प्रवेश करेंगे।

    उच्च राशि में होने के कारण गुरु का यह गोचर अत्यंत शक्तिशाली और शुभ फलदायी माना जा रहा है। बृहस्पति देव की कृपा से मनुष्य में सात्विक विचारों का उदय होता है और परिवार के प्रति जिम्मेदारियां बढ़ती हैं।

    कर्क राशि चंद्रमा की राशि है, जो मन का प्रतीक है। इसलिए, बृहस्पति देव का यहां आना मन की शांति और भावनात्मक सुरक्षा के लिए बहुत अच्छा है। यह गोचर न केवल भौतिक सुख-संसाधन प्रदान करेगा, बल्कि आपको धर्म और अध्यात्म की राह पर भी आगे ले जाएगा। आइए जानते हैं मेष से लेकर कन्या राशि के जातकों पर इसका प्रभाव?

    सभी 12 राशियों पर बृहस्पति देव के गोचर का प्रभाव

    मेष राशि (Aries)

    बृहस्पति देव आपके चतुर्थ भाव (सुख भाव) में गोचर कर रहे हैं। चतुर्थ भाव में गुरु की उपस्थिति घर-परिवार में खुशियां लाती है। इस दौरान आप नया घर खरीदने या संपत्ति में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं।

    गृहस्थ जीवन में सुख-शांति का अनुभव होगा। दशम भाव पर दृष्टि होने के कारण कार्यक्षेत्र में आपको प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त होगा। अष्टम भाव पर उनकी कृपा से आप छिपे हुए ज्ञान और शोध कार्यों में रुचि ले सकते हैं। विदेश यात्राओं के योग भी बन रहे हैं।

    खबरें और भी

    उपाय: गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें।

    वृषभ राशि (Taurus)

    तृतीय भाव में बृहस्पति देव का आना आपके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगा। संवाद शैली में सुधार होगा और आप अपनी बातों से लोगों को प्रभावित कर पाएंगे। भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा। सातवें भाव पर दृष्टि होने से वैवाहिक जीवन और पार्टनरशिप में सुधार होगा। नवम भाव पर गुरु की दृष्टि आपके भाग्य को बल देगी। ग्यारहवें भाव को देखने के कारण आर्थिक प्रयासों में सफलता मिलने के प्रबल योग हैं।

    उपाय: गुरुवार के दिन चने की दाल का दान करें।

    मिथुन राशि (Gemini)

    द्वितीय भाव में बृहस्पति देव का गोचर आपकी वाणी और धन के क्षेत्र को प्रभावित करेगा। धन संचय के नए रास्ते खुलेंगे और परिवार में एकजुटता आएगी। दशम भाव पर गुरु की दृष्टि करियर में उन्नति के अवसर प्रदान करेगी।

    छठे भाव पर दृष्टि होने के कारण आप अपने विरोधियों पर विजय प्राप्त कर पाएंगे और कार्यक्षेत्र की चुनौतियों से निपटने में सक्षम रहेंगे। अचानक होने वाले बदलाव अंततः आपके लिए शुभ ही साबित होंगे।

    उपाय: गुरुवार के दिन नियमित रूप से गुरु बीज मंत्र का जाप करें।

    कर्क राशि (Cancer)

    आपकी ही राशि में बृहस्पति देव का गोचर हो रहा है, जो इसे सबसे अधिक प्रभावशाली बनाता है। प्रथम भाव में गुरु होने से आपका व्यक्तित्व निखरेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा। पंचम भाव पर दृष्टि होने से संतान सुख, शिक्षा में सफलता और रचनात्मक कार्यों में लाभ होगा। सातवें भाव को देखने के कारण विवाह या साझेदारी में मजबूती आएगी। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और आप जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव महसूस करेंगे।

    उपाय: गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की सेवा करें और जरूरतमंदों की सहायता करें।

    सिंह राशि (Leo)

    द्वादश भाव में बृहस्पति देव का गोचर आपके लिए आध्यात्मिक उन्नति का द्वार खोलेगा। विदेश से जुड़े कार्यों या दान-पुण्य के कामों में आप अधिक सक्रिय हो सकते हैं। चतुर्थ भाव पर दृष्टि होने से घर में शांति का वातावरण रहेगा।

    छटे भाव पर गुरु की कृपा से आप स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का बेहतर प्रबंधन कर पाएंगे। अष्टम भाव पर दृष्टि होने से गुप्त रहस्यों और आध्यात्मिकता में आपकी गहराई बढ़ेगी।

    उपाय: गुरुवार के दिन हल्दी या पीली मिठाई का दान करें।

    कन्या राशि (Virgo)

    एकादश भाव में बृहस्पति देव का गोचर आपकी सभी बड़ी इच्छाओं को पूरा करने की दिशा में कार्य करेगा। आय के स्रोतों में वृद्धि होगी। तृतीय भाव पर गुरु की दृष्टि आपके पराक्रम और साहस को बढ़ाएगी।

    पंचम भाव पर उनकी कृपा शिक्षा और संतान के लिए शुभ है। सातवें भाव को देखने के कारण पार्टनरशिप और पेशेवर रिश्तों में सुधार आएगा। लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होने लगेंगे।

    उपाय: गुरुवार के दिन बृहस्पति देव की प्रार्थना करें।