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    क्या आपके हर काम में आ रही बाधा? नोट कर लें मंगल ग्रह को शांत करने के गुप्त तरीके

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 07:22 PM (IST)

    नीम का पेड़ लगाने से लेकर हनुमान चालीसा और शक्तिशाली मंत्रों के जप तक, जानें इन गुप्त उपायों से कैसे शांत करें मंगल ग्रह। ...और पढ़ें

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    जानें कैसे आप अपने 'अमंगल' को 'मंगल' में बदल सकते हैं (Image Source: AI-Generated)

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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को 'भूमिपुत्र' और 'सेनापति' माना गया है। यह वह शक्ति है जो हमें चुनौतियों से लड़ने का हौसला देती है, लेकिन जब यही ऊर्जा असंतुलित हो जाए, तो जीवन में क्रोध, कलह और कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं। मंगल का प्रभाव केवल ग्रहों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे रक्त, हमारे भाइयों के साथ संबंधों और हमारी निर्णय लेने की क्षमता में झलकता है।

    अगर जीवन में 'अमंगल' का साया हो, तो उसे 'मंगल' में बदलने के लिए शास्त्रोक्त उपाय और मंत्र एक दिव्य कवच की तरह कार्य करते हैं।

    अमंगल से मंगल की ओर

    पौराणिक कथा के अनुसार, एक अत्यंत परिश्रमी व्यक्ति था जिसका नाम माधव था। माधव अपने करियर में सफल था, लेकिन उसका स्वभाव बहुत उग्र होता जा रहा था। छोटी-छोटी बातों पर भाई से झगड़ा होना और घर की दक्षिण दिशा से जुड़ी परेशानियां उसे मानसिक तनाव दे रही थीं। एक दिन वह एक अनुभवी विद्वान के पास पहुंचा और अपनी व्यथा सुनाई।

    विद्वान ने मुस्कुराते हुए कहा, "माधव, तुम्हारी ऊर्जा दिशाहीन हो गई है। मंगल को शांत करने के लिए तुम्हें प्रकृति और व्यवहार में बदलाव लाना होगा।"

    उन्होंने माधव को मंगल के कुछ अचूक उपाय बताए। माधव ने सबसे पहले अपने घर की दक्षिण दिशा में द्वार से दोगुनी दूरी पर एक नीम का पेड़ लगाया। विद्वान के कहे अनुसार, उसने प्रतिदिन नीम की दातुन करना शुरू किया, जिससे उसे न केवल स्वास्थ्य लाभ मिला, बल्कि उसके शनि और मंगल के दोष भी शांत होने लगे।

    माधव ने अपने जीवन की शैली बदली। अब वह आंखों में सफेद सुरमा लगाने लगा और घर से निकलते समय गुड़ खाकर निकलता था। उसने अपने भाई के साथ संबंधों को सुधारा, चाहे वह सगा हो या सौतेला, उसने प्रेम का मार्ग चुना। हर मंगलवार वह मंदिर जाकर गेहूं, तांबा, मसूर की दाल और लाल चंदन का दान करने लगा।

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    (Image Source: AI-Generated)

    मंगल के सिद्ध मंत्र:

    हनुमान मंत्र: ॐ हनुमते नम:।

    पौराणिक प्रार्थना मंत्र: 'ॐ धरणीगर्भसंभूतं विद्युतकान्तिसमप्रभम। कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम।।'

    जप मंत्र: 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'

    वैदिक मंत्र: ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अय्यम्। अपां रेतां सि जिन्वति।।

    तांत्रिक मंत्र: ॐ अंगारकाय नम:।

    गायत्री मंत्र: ॐ अंगारकाय विद्यहे शक्तिहस्ताय धीमहि, तन्नो भौम: प्रचोदयात्।

    पूजा मंत्र: ॐ भोम भोमाय नम:।

    कुछ ही समय में माधव के जीवन से अशांति दूर हो गई। उसने हनुमान मंदिर के शिखर पर एक सफेद ध्वज लहराया और अंत में इस स्तुति के साथ अपना जीवन मंगलमय बनाया:

    मंगल स्तुति:

    जय जय जय मंगल सुखदाता। लोहित भौमादित विख्याता।।
    अंगारक कुज रूज ऋणहारी। दया करहु यहि विनय हमारी।।
    हे महिसुत दितीसुत सुखरासी। लोहितांग जग जन अघनासी।।
    अगम अमंगल मम हर लीजै। सकल मनोरथ पूरण कीजै।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।