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    मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में भूत-प्रेत भी टेकते हैं माथा! दर्शन करने से नकारात्मक शक्तियां होती हैं दूर

    Updated: Tue, 31 Mar 2026 01:00 PM (IST)

    राजस्थान के दौसा जिले में स्थित श्री मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहां दर्शन करने से नकारात्मक शक्तियां दूर ह ...और पढ़ें

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    बालाजी महाराज को लगता है खास चीजों का भोग (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में हनुमान जी को समर्पित कई मंदिर हैं, जिनका विशेष महत्व है। इन मंदिरों में राजस्थान का प्रसिद्ध श्री मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर बालाजी को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में बालाजी महाराज (Mehandipur Balaji Temple) जी की पूजा-अर्चना और दर्शन करने से भूत-प्रेत की बाधा से छुटकारा मिलता है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं मेहंदीपुर बाला मंदिर से जुड़े रहस्य के बारे में।

    मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का रहस्य

    मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भूत-प्रेत बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए बेहद प्रसिद्ध है। मंदिर में बालाजी महाराज के दर्शन करने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दर्शन करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और बालाजी महाराज भक्तों की मदद करते हैं। यह मंदिर राजस्थान के जिले दौसा में है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर में जो बालाजी भगवान की प्रतिमा है, उसे किसी ने बनाया है बल्कि प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई है।

    इन नियम का जरूर करें पालन

    • आमतौर पर लोग मंदिर से प्रसाद घर लेकर आते हैं, लेकिन मेहंदीपुर बाला मंदिर से प्रसाद घर लाने की मनाही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर से प्रसाद को घर लाने से नकारात्मक शक्तियां साथ आ जाती हैं।
    • इसके अलावा मेहंदीपुर बालाजी महाराज के दर्शन करने के बाद भक्तों को पीछे मुड़कर देखने की मनाही होती है।
    • जो भक्त मेहंदीपुर बालाजी मंदिर जाते हैं, उन्हें 1 सप्ताह पहले प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
    • मेहंदीपुर बालाजी से कोई भी चीज खरीदकर घर नहीं लानी चाहिए।

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    इन चीजों का लगता है भोग

    • बालाजी महाराज को मुख्य रूप से बूंदी के लड्डू का भोग लगाया जाता है।
    • जब भक्त दरबार में परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए अर्जी लगाते हैं, तो तब उड़द की दाल का भोग लगाया जाता है। साथ ही उबले हुए चावल भी चढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा भक्त बालाजी महाराज को पेड़े का भी भोग लगाते हैं।
    • जब किसी भक्त की मन्नत पूरी हो जाती है, तो वह सवामणी (50 किलो का भोग) करता है। इस भोग में सब्जी, हलवा, पूड़ी और बूंदी शामिल होती है। इस प्रसाद को लोगों में वितरण किया जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।