किस्मत चमकाने वाला अधिक मास: जानें किन चीजों के दान से मिटेंगे जन्मों के पाप?
अधिक माह में किया गया दान अक्षय पुण्य देता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस दौरान किन चीजों का दान करना चाहिए? ...और पढ़ें

पुरुषोत्तम मास 2026: एक दान बदल सकता है आपका भाग्य। Ai Generated Image

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग में अधिक माह का विशेष महत्व है, जिसे मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम नाम से भी जाना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह में किए गए शुभ कामों का फल कभी खत्म नहीं होता, इसलिए इसे अक्षय फल देने वाला महीना कहा गया है। आइए यहां इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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अधिक मास का महत्व
शास्त्रों में बताया गया है कि अधिक मास में सूर्य की संक्रांति नहीं होती, जिसके वजह से इसे शुभ कामों के लिए अच्छा नहीं माना गया, लेकिन भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम पुरुषोत्तम दिया और वरदान दिया कि जो भी इस माह में मेरी भक्ति और दान करेगा, उसे अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलेगा। यही वजह है कि इस महीने में किया गया दान सोने जैसा फल देता है।
इन चीजों के दान से चमकती है किस्मत
- मालपुओं का दान - अधिक मास में कांसे के बर्तन में 33 मालपुए रखकर दान करना सबसे शुभ माना गया है। यह दान परिवार में सुख-समृद्धि लाता है और संतान से जुड़ी मुश्किलों को दूर करता है।
- दीप दान - इस दौरान शाम के समय तुलसी के पास, मंदिर में या पवित्र नदी के तट पर दीप दान करने से जीवन का अंधकार दूर होता है और कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं।
- अन्न और वस्त्र दान - इस माह में भूखे को भोजन कराना और जरूरतमंद को पीले कपड़ों का दान करना साक्षात भगवान विष्णु की सेवा माना जाता है। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है।
- धार्मिक पुस्तकों का दान - इस दौरान श्रीमद्भागवत गीता या विष्णु सहस्रनाम जैसी पुस्तकों का दान करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है और पितरों को मोक्ष मिलता है।
करें ये खास तरह के दान
अधिक माह में केवल वस्तुओं का दान ही नहीं, बल्कि नाम दान, भाव दान और समय दान भी महत्वपूर्ण है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता है। इस महीने में तामसिक भोजन का त्याग कर सात्विक जीवन जीने से श्री हरि की कृपा मिलती है।
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