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    आखिर कब और क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया, जानिए किस मुहूर्त में घर लाएं सोना?

    Updated: Tue, 31 Mar 2026 03:30 PM (IST)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया 2026 में 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा और सोना खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। ...और पढ़ें

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    अक्षय तृतीया धार्मिक महत्व (AI Generated Image)

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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही इस अवसर पर सोने की खरीदारी  करना शुभ माना जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है और धन लाभ के योग बनते हैं। क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों मनाया जाता है अक्षय तृतीया का पर्व। अगर नहीं पता, तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।

    अक्षय तृतीया 2026 डेट और टाइम (Akshaya Tritiya 2026 Date and Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, तिथि का समापन 20 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर होगा। ऐसे में अक्षय तृतीया (Kab Hai Akshaya Tritiya 2026) का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा करने का समय सुबह 10 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

    सोना खरीदने का समय (Akshaya Tritiya 2026 Gold Purchase Time)

    अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने के लिए शुभ मुहूर्त 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से 20 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 51 मिनट तक है।

    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 23 मिनट से 05 बजकर 08 मिनट तक
    विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 22 मिनट तक
    गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 48 मिनट से 07 बजकर 10 मिनट तक
    अमृत काल- रात 02 बजकर 26 मिनट से 03 बजकर 52 मिनट तक

    Akshaya Tritiya puja vidhi

    (AI Generated Image)

    क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया?

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का अवतरण हुआ था। इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत भी हुई थी। अक्षय तृतीया के दिन शुभ काम करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के दिन ही धन के देवता कुबेर ने महादेव की तपस्या की थी। भगवन शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष बना दिया। इसलिए अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।