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    13 या 14 जुलाई 2026, कब है अमावस्‍या? इस मुहूर्त में करें पूजा और दान

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 12:07 PM (IST)

    जुलाई 2026 में भौमवती अमावस्या 13 या 14 जुलाई में से कब मनाई जाएगी? इस दिन दान, स्‍नान और तर्पण करने का सही समय क्‍या होगा? सारी जानकारी आपको इस लेख म ...और पढ़ें

    भौमवती अमावस्या 2026 कब है जानें सही तिथि पूजा और दान का शुभ मुहूर्त (Picture Credit- AI Generated)

    भौमवती अमावस्या 2026 कब है जानें सही तिथि पूजा और दान का शुभ मुहूर्त (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को बहुत महत्‍वपूर्ण माना गया है। हर माह यह तिथि आती है और हर बार इसका महत्‍व भी बदल जाता है। जुलाई माह में आषाढ़ की अमावस्‍या पड़ेगी। इस भौमवती अमावस्‍या कहा जाएगा, क्‍योंकि इस बार अमावस्‍या तिथि मंगलवार के दिन पड़ रही है। अमावस्या की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम है। 13 या 14 जुलाई में से किसी दिन इसे मनाया जाएगा, चलिए जानते हैं।

    भौमवती अमावस्‍या 2026 कब है?

    अमावस्‍या की तिथि का आरंभ 13 जुलाई, सोमवार को शाम 6 बजकर 50 मिनेट पर होगा और यह 14 जुलाई 2026 मंगलवार के दिन दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर समाप्‍त हो जाएगी। इसलिए उदया तिथि 14 जुलाई की मानी जा रही हैं। स्‍नान-दान करने के लिए मंगलवार का दिन ही सही रहेगा।

    ashadha amavasya 2026 date

    स्‍नान-दान और तर्पण का मुहूर्त

    • अमावस्‍या के दिन आप किसी भी पवित्र नदी में ब्रह्म मुहूर्त में स्‍नान करें। आप प्रात: 4 बजे से लेकर 5 बजकर 30 मिनट तक कभी भी स्‍नान कर सकते हैं।
    • अमावस्‍या की पूजा के लिए सुबह 7 बजे से 10 बजे तक का टाइम सही रहेगा।
    • अपने पितरों को तर्पण देने के लिए अभिजीत मुहूर्त सही रहेगा। मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से लेकर 12 बजकर 49 मिनट तक आप कभी भी यह कार्य कर सकते हैं।
    • इस दिन दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है। इसलिए आप दोपहर 3 बजे तक कभी दान कर सकते हैं।

    भौमवती अमावस्‍या का धार्मिक महत्‍व

    मंगलवार का दिन मंगल ग्रह को समर्पित है और इसका एक अन्‍य नाम भौम भी है। इसलिए इस दिन मंगल ग्रह की शांति के लिए भी पूजा का विशेष महत्‍व बताया गया है। इससे मंगल दोष का प्रभाव कम होता है।

    भौमवती अमावस्‍या के दिन आपको लाल रंग की वस्‍तुएं, जैसे अनाज, वस्‍त्र, बर्तन, फल आदि का दान जरूर करना चाहिए। इसे बहुत ही पुण्‍यदायी माना गया है।

    पितृ दोष और मंगल दोष के प्रभाव को कम करने के लिए भौमवती अमावस्‍या पर पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करना शुभ होता है। साथ ही, तिल के तेल का दीपक जलाना भी लाभकारी हो सकता है।

    अत: भौमवती अमावस्‍या को हिंदू धर्म में बहुत ही फलदायी तिथि माना गया है। इस दिन भगवान विष्‍णु और हनुमान जी के आशीर्वाद के साथ-साथ आप अपने पितरों को भी प्रसन्‍न कर सकते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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