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    जब तक नहीं आता 'बुलावा', तब तक नहीं होते दर्शन! भारत के इन 5 पवित्र धामों की अनकही कहानी

    Updated: Thu, 28 May 2026 04:54 PM (IST)

    भारत में 5 ऐसे पवित्र तीर्थ स्थल हैं जिनके बारे में भक्तों का मानना है कि वहां तभी जाया जा सकता है जब ईश्वर का बुलावा आता है। ...और पढ़ें

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    भारत के इन 5 पवित्र धामों की अनकही कहानी (AI Generated Image)  

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कहते हैं कुछ धार्मिक यात्राएं प्लान नहीं की जाती है, जब भगवान का बुलावा आता है, तभी जाते हैं। कई तीर्थयात्री आपको बताएंगे कि, कुछ पवित्र स्थान तक सुविधा के बावजूद भी नहीं पहुंचा जा सकता है।

    भारत में 5 ऐसे तीर्थ स्थल हैं, जिनको लेकर भक्तों का मानना है कि, जबतक ईश्वर बुलावा नहीं भेजते, तबतक आप चाह कर भी उनके दर्शन नहीं कर सकते।

    केदारनाथ

    केदारनाथ सिर्फ पहाड़ों पर बसा एक मंदिर नहीं है। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि, कुछ सच्चाइयों को यूं ही नहीं पाया जा सकता है। केदारनाथ की कठिन चढ़ाई, बदलता मौसम यात्रा के दौरान लोगों को सबसे मजबूत बना देती है। कहते हैं कि, केदारनाथ उस कृपा का प्रतीक है जो तभी प्राप्त होती है, जब व्यक्ति अंदर से इसके लिए तैयार होता है। कुछ द्वार आपके लिए तभी खुलते हैं जब अहंकार क्षीण शांत होने के साथ धैर्य बढ़ता है, तभी बाबा बुलाते हैं।

    वैष्णो देवी

    लोग अक्सर वैष्णो देवी की यात्रा पर तब जाता है, जब जीवन बोझिल, अनिश्चित और इमोशनली तनाव भरा लगता है। चढ़ाई के दौरान होने वाली थकान आस्था में बदल जाती है, जो आपको अंदर से पवित्र और ऊर्जा का एहसास दिलाती है। भक्त न सिर्फ देवी द्वारा बल्कि अपने उस हिस्से द्वारा भी प्रेरित महसूस करते हैं, जो मानता है कि, धैर्य प्रार्थना बन सकता है।

    काशी

    वाराणसी शहर असल मायनों में सुकून भर है, जो इसलिए पवित्र है क्योंकि यहां का वास्तुकला प्राचीन होने के साथ काफी मनमोहक है। यह भक्ति, मृत्यु, अनुष्ठान, शोर, समर्पण और शाश्वतता सब एक साथ मौजूद हैं। कई लोगों का मानना है कि, जब व्यक्ति सतही जीवन छोड़ वैराग्य की ओर बढ़ता है, तब काशी उसे बुलाता है।

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    तिरुपति

    तिरुपति में श्रद्धालु आमतौर पर घंटों या कभी-कभी उससे भी ज्यादा समय तक सिर्फ थोड़े वक्त के लिए दर्शन की प्रतीक्षा करते हैं। इसके बाद भी वे संतुष्ट होकर लौटते हैं। क्योंकि यह यात्रा चुपचाप हमें सिखाती है कि, जिसे आधुनिक जीवन हमें हर बार भुला देता है, हर मूल्यवान चीज को जल्दबाजी में हासिल नहीं किया जा सकता है। तिरुपति जाने के लिए नियंत्रण नहीं बल्कि समर्पण का आह्वान लगता है और समर्पण अक्सर लोगों की मदद और ईश्वर की भक्ति से आता है।

    वृंदावन

    वृंदावन केवल मंदिरों का ही शहर नहीं है, बल्कि भावनात्मक स्मृतियों से जुड़ी जगह भी है। भक्त मानते हैं कि, कोई व्यक्ति यूं ही वहां जाने का फैसला नहीं लेता, बल्कि वह वहां खिंचा चला जाता है, अक्सर एक ऐसी तड़प से जो तार्किक रूप से समझाई नहीं जा सकती।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।