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    Baisakhi 2026: इस साल कब मनाई जाएगी बैसाखी? नोट करें तिथि और समय

    Updated: Mon, 09 Mar 2026 12:17 PM (IST)

    बैसाखी (Baisakhi 2026) सिख धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में नई फसल के पकने की खुशी में मनाया जाता है। ...और पढ़ें

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    Baisakhi 2026: बैसाखी शुभ मुहूर्त। (Ai Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। बैसाखी सिख धर्म के लोगों के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे सिख लोग पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। यह पर्व मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में नई फसल के पकने और कटने की खुशी में मनाया जाता है। इसके साथ ही यह दिन (Baisakhi 2026) सिख धर्म के इतिहास में एक बेहद पवित्र स्थान रखता है। आइए जानते हैं कि इस साल बैसाखी का त्योहार कब मनाया जाएगा?

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    बैसाखी 2026 शुभ मुहूर्त (Baisakhi 2026 Date And Time)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे मेष संक्रांति कहा जाता है। इसी मेष संक्रांति के दिन बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। इस साल 14 अप्रैल को सूर्य देव सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में इस साल 14 अप्रैल को बैसाखी मनाई जाएगी।

    बैसाखी का धार्मिक महत्व (Significance of Baisakhi 2026)

    • खालसा पंथ की स्थापना - सिख इतिहास में बैसाखी का दिन सबसे अहम है, क्योंकि 13 अप्रैल 1699 को सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी।
    • किसानों का पर्व - किसानों के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीं है। इस समय गेहूं की फसल पककर तैयार हो जाती है और किसान अच्छी फसल के लिए ईश्वर और प्रकृति का धन्यवाद करते हैं।
    • नववर्ष का प्रतीक - हिंदू मान्यताओं में इसे सौर नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में बैसाखी को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे असम में 'बिहू', तमिलनाडु में 'पुथांडु' और केरल में 'विशु'।

    बैसाखी की पूजा विधि (Baisakhi 2026 Puja Vidhi)

    • इस दिन पवित्र नदी में स्नान का बड़ा महत्व है।
    • सिख धर्म के लोग नए कपड़े पहनकर गुरुद्वारे जाते हैं। इस दिन गुरु ग्रंथ साहिब का विशेष पाठ किया जाता है और कीर्तन होते हैं।
    • इस दिन गुरुद्वारों में कड़ा प्रसाद बांटा जाता है और लंगर का आयोजन किया जाता है, जहां हर धर्म और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं।
    • पंजाब में इस दिन लोग ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा करते हैं और अपनी खुशी जाहिर करते हैं।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।