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    Kajari Teej 2025: कजरी तीज व्रत पर जरूर करें इस कथा का पाठ, विवाह से जुड़ी मुश्किलें होंगी दूर

    Updated: Tue, 12 Aug 2025 09:44 AM (IST)

    हिंदू पंचांग को देखते हुए इस साल कजरी तीज का व्रत (Kajari Teej 2025) 12 अगस्त 2025 यानी आज के दिन रखा जा रहा है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है। इस व्रत का पालन करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। वहीं इस दिन इसकी व्रत कथा का पाठ परम कल्याणकारी माना गया है जो इस प्रकार है।

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    Kajari Teej 2025 Vrat Katha: कजरी तीज की व्रत कथा।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कजरी तीज व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह सुहागिन महिलाओं के लिए एक विशेष पर्व है, जो पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। वहीं, इस दिन (Kajari Teej 2025) कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। कजरी तीज पर व्रत रखने के साथ-साथ इसकी कथा सुनना भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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    इस कथा का पाठ करने से न सिर्फ वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है, बल्कि विवाह से जुड़ी सभी मुश्किलें भी दूर होती हैं, तो आइए पढ़ते हैं।

    कजरी तीज की व्रत कथा (Kajari Teej Vrat Katha Ka Path)

    एक गांव में ब्राह्मण परिवार रहता था। ब्राह्मण की पत्नी ने भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर कजरी तीज का व्रत किया। व्रत के दौरान उसने अपने पति से सत्तू लाने को कहा। सत्तू के लिए ब्राह्मण के पास धन नहीं था। तो ऐसे में उसने चोरी करने का फैसला लिया। इसके बाद वह रात के समय दुकान में सत्तू लेने के लिए घुस गया। उसी दौरान दुकान के मालिक की नींद खुल गई और उसने ब्राह्मण को पकड़ लिया और उसकी पत्नी सत्तू का इंतजार कर रही थी। वहीं, चांद निकल आया था।

    जब दुकान के मालिक ने उसकी तलाशी ली, तो उसके पास से सत्तू मिला। ऐसे में ब्राह्मण ने सारी बात बता दी। उसकी बात को सुनकर मालिक को उसपर बेहद तरस आया और कहा कि आज से वो उसकी पत्नी को अपनी बहन के रूप में मानेगा। अंत में मालिक ने ब्राह्मण को मेहंदी, सत्तू, गहने और धन देकर विदा किया। इसके बाद सभी साधक ने देवी कजली की विधिवत पूजा की।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।