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    Kajari Teej 2025: कजरी तीज व्रत में महिलाएं भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना टूट जाएगा व्रत

    Updated: Mon, 11 Aug 2025 09:25 AM (IST)

    कजरी तीज (Kajari Teej 2025) का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है जो 12 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत में कुछ गलतियों से बचना चाहिए वरना व्रत खंडित हो सकता है तो आइए उन नियमों के बारे में जानते हैं जो इस प्रकार हैं।

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    Kajari Teej 2025: व्रत में न करें ये गलतियां।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कजरी तीज का पर्व हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदू पंचांग को देखते हुए इस साल कजरी तीज का व्रत (Kajari Teej 2025) 12 अगस्त, 2025 को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत करती हैं और पूजा-अर्चना करके अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करती हैं। इस व्रत को बड़ी तीज और सत्तू तीज के नाम से भी जाना जाता है।

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    इस व्रत को लेकर कई सारे नियम बनाए गए हैं, जिनमें से कुछ ऐसी गलतियां हैं, जो महिलाओं को भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। आइए उन नियमों के बारे में जानते हैं।

    व्रत में न करें ये गलतियां (Kajari Teej 2025 Vrat Me Na Karen Ye Galtiyan)

    • व्रत के दौरान भूलकर भी पानी न पिएं। यह एक निर्जला व्रत है और इसमें पानी पीने से व्रत खंडित हो जाता है।
    • व्रत के दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से बचें। व्रत खोलने के बाद भी सात्विक भोजन ही करें।
    • व्रत के दिन किसी से भी झगड़ा न करें और अपशब्दों का प्रयोग न करें। मन में शांति और पवित्रता बनाए रखें।
    • व्रत के दिन पुराने या मैले कपड़े न पहनें। नए या साफ वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
    • व्रत के दिन सोने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दिन में सोने से व्रत का फल कम हो जाता है।

    कजरी तीज व्रत रखने के नियम (Kajari Teej 2025 Vrat Niyam)

    • व्रत शुरू करने से पहले सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
    • व्रत का संकल्प लें।
    • भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
    • सूर्योदय से पहले सरगी का सेवन करना चाहिए।
    • सरगी में फल, सूखे मेवे, और दूध का सेवन करना शुभ माना जाता है।
    • इस दिन सोलह शृंगार का विशेष महत्व है। महिलाएं नए कपड़े और गहने पहनकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करें।
    • रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत का भोजन ग्रहण करें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।