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    नौतपा 2026: इस दिन सूर्य करेंगे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश; इन 9 दिनों में क्या करें, क्या नहीं?

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 09:36 AM (IST)

    नौतपा में सूर्य की किरण धरती पर सीधी पड़ती हैं, जिस कारण गर्मी बहुत अधिक बढ़ जाती है। चलिए जानते हैं कि नौतपा कब से शुरू होगा। ...और पढ़ें

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    नौतपा में क्या करें और क्या न करें? (Picture Credit- AI Generated)

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्येष्ठ महीने में जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसे नौतपा कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, नौ दिन तपा देने वाली गर्मी। इस दौरान भीषण गर्मी और लू चलती है। इस अवधि में सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व है। चलिए जानते हैं कि नौपता के 9 दिनों में आपको किन बातों का खासतौर से ध्यान रखना चाहिए।

    इस दिन से शुरू होगा नौतपा

    साल 2026 में नौतपा की शुरुआत 25 मई से हो रही है, जो 2 जून तक चलने वाला है। नौतपा में लगभग 9 या 10 दिनों तक भीषण गर्मी पड़ती है, जिसे मानसून के लिए अच्छा माना जाता है। इसका वर्णन इस श्लोक में भी मिलता है -

    ज्येष्ठ मासे सीत पक्षे आर्द्रादि दशतारका।
    सजला निर्जला ज्ञेया निर्जला सजलास्तथा।।

    इस श्लोक में कहा गया है कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र (आद्रा) में प्रवेश करते हैं, तब से लेकर आगामी दस नक्षत्रों तक यदि तेज गर्मी पड़ती है, तो वर्षा अच्छी होती है।

    कर सकते हैं ये काम

    सनातन धर्म में नौतपा की अवधि सूर्य देव को प्रसन्न कर कुंडली में सूर्य को मजबूत करने और उत्तम स्वास्थ्य पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में आप इस दौरान सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्य देव के मंत्रों का जप करें, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। साथ ही इस अवधि में प्याऊ लगवाना और पानी, शरबत, सत्तू, घड़े, छाता, सूती कपड़े, हाथ का पंखा और मौसमी फलों का दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

    Nautapa ai

    (Picture Credit- AI Generated)

    नौतपा के नियम

    • नौतपा में मांगलिक कार्यों जैसे शादी, गृह प्रवेश आदि करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सुख-शांति में बाधा आती है।
    • इस दौरान जितना हो सके, उतना हल्का भोजन करना चाहिए।
    • शुभ फलों के लिए आप नौतपा में पक्षियों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था कर सकते हैं।
    • यदि घर के बाहर कोई जरूरतमंद पानी या अन्न मांगे, तो उसे खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।
    • इस अवधि को पितरों के निमित्त जलदान और तर्पण के लिए भी अच्छा माना गया है।

    रखें ये सावधानियां

    • नौतपा में ज्यादा-से-ज्यादा दही, छाछ, लस्सी, बेल का शरबत, नारियल पानी और तरबूज जैसी ठंडी चीजों का सेवन करना चाहिए।
    • इस दौरान तीखा, मसालेदार, तला-भुना और मांसाहार आदि से परहेज करें।
    • जब तक जरूरी न हो चिलचिलाती धूप में घर से बाहर जाने से बचें, खासकर 12 बजे से 4 बजे के बीच।
    • अगर जरूरी न हो तो नौतपा में ज्यादा यात्रा करने से भी बचें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।