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    Sawan Purnima पर दुर्लभ सौभाग्य योग समेत बन रहे हैं कई अद्भत संयोग, बरसेगी महादेव की कृपा

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Wed, 30 Jul 2025 04:01 PM (IST)

    सावन पूर्णिमा (sawan Purnima 2025) के दिन रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को गिफ्ट देते हैं। साथ ही सुख और दुख में साथ देने का वचन देते हैं। इस साल 09 अगस्त को राखी का त्योहार मनाया जाएगा।

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    Sawan Purnima 2025: सावन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में सावन महीने का खास महत्व है। यह महीना देवों के देव महादेव को पूर्णतया समर्पित होता है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा की जाती है। साथ ही सावन सोमवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को महिला और पुरूष दोनों ही करते हैं। ज्योतिष अविवाहित जातकों को शीघ्र विवाह के लिए सावन सोमवार का व्रत रखने की सलाह देते हैं। इस महीने का समापन पूर्णिमा तिथि पर होता है।

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    सावन पूर्णिमा पर सौभाग्य समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाएगी। साथ ही भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व राखी मनाया जाएगा। यह पर्व हर साल सावन पूर्णिमा के दिन धूमधाम से मनाया जाता है। आइए, सावन पूर्णिमा (Sawan Purnima 2025 Date) की सही डेट, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-  

    सावन पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Sawan Purnima Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 08 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, 09 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 24 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी। 08 अगस्त को भद्रा रहने के चलते अगले दिन सावन पूर्णिमा मनाई जाएगी।

    सावन पूर्णिमा शुभ योग (Chaitra Purnima Shubh Yog)

    ज्योतिषियों की मानें तो सावन पूर्णिमा के शुभ अवसर पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इनमें दुर्लभ सौभाग्य योग का संयोग देर रात 02 बजकर 15 मिनट तक है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05 बजकर 20 मिनट से दोपहर 02 बजकर 23 मिनट तक है।

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    इसके साथ ही सावन पूर्णिमा पर शिववास योग का भी संयोग है। हालांकि, शिववास योग दोपहर 01 बजकर 24 मिनट से है। इन योग में शिव-शक्ति की पूजा करने से साधक को अक्षय और अमोघ फल प्राप्त होगा।

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 05 बजकर 20 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 30 मिनट पर
    • चन्द्रोदय- शाम 06 बजकर 43 मिनट से पूरी रात भर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 03 बजकर 53 मिनट से 04 बजकर 37 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 06 मिनट से 02 बजकर 59 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 30 मिनट से 06 बजकर 51 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात 11 बजकर 33 मिनट से 12 बजकर 17 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।