सावन शिवरात्रि 2026: 10 अगस्त को चढ़ेगा कांवड़ का जल, डायरी में अभी नोट करें चारों पहर की पूजा का मुहूर्त
सावन शिवरात्रि 10 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी, जब कांवड़ यात्रा का जल चढ़ाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी संकट दूर होते हैं और शुभ फल प्रा ...और पढ़ें

सावन शिवरात्रि का महत्व (Picture Credit- AI)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना अधिक पवित्र माना जाता है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही शिव जी का जलाभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महादेव की साधना करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन सावन शिवरात्रि (Sawan shivratri 2026) मनाई जाती है। इस दिन कांवड़ यात्रा का जल चढ़ाया जाता है, जिसके बाद कांवड़ यात्रा समापन होता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कब मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि और शुभ मुहूर्त के बारे में।
सावन शिवरात्रि 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Sawan Shivratri 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 10 अगस्त को शाम 06 बजकर 24 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 11 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 22 मिनट पर होगा। ऐसे में 10 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी। इसी दिन कांवड़ यात्रा का जल चढ़ाया जाएगा।
चार पहर की पूजा का समय
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - दोपहर 06 बजकर 57 मिनट से 09 बजकर 44 मिनट तक
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - रात 09 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - रात 12 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - रात 03 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 05 मिनट तक
खबरें और भी
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 36 मिनट से 05 बजकर 20 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर से 50 मिनट 12 बजकर 56 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 39 मिनट से 03 बजकर 41 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 57 मिनट से 07 बजकर 19 मिनट तक
अमृत काल- सुबह 09 बजकर 33 मिनट से 11 बजकर 03 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- रात 11 बजकर 39 मिनट से 06 बजकर 05 मिनट
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सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व
सावन शिवरात्रि के शुभ अवसर पर कांवड़ यात्रा का जल चढ़ाया जाता है, जो भक्त कांवड़ यात्रा में जल लेकर आते हैं, उससे भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन शिवरात्रि के दिन सच्चे मन से जलाभिषेक करने से साधक के जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं और महादेव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही भगवान के आशीर्वाद से जीवन में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।
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