जैन धर्म में क्या होता है 'चक्रवर्ती विवाह'? शादी की यह परंपरा अन्य विवाहों से क्यों है अलग
जैन धर्म में 'चक्रवर्ती विवाह' एक अनूठी और पारंपरिक विवाह पद्धति है जिसे सादगी के साथ संपन्न किया जाता है। यह पूर्ण रूप से अहिंसा और आध्यात्मिक पवित्र ...और पढ़ें

जैन धर्म का चक्रवर्ती विवाह: जानें इसकी अनोखी परंपराएं और महत्व (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जिस तरह हिंदू शादी के लिए कई अलग-अलग रस्में बनाई गयी हैं वैसे ही जैन धर्म के लिए भी शादी के कुछ नियम बनाए गए हैं। इन्हीं में से एक परंपरा है चक्रवर्ती विवाह की। इस विवाह परंपरा को जैन धर्म की सबसे अलग शादी की विधियों में से एक माना जाता है।
जैन धर्म में, होने वाला 'चक्रवर्ती विवाह' एक पारंपरिक जैन विवाह समारोह माना जाता है जिसके कुछ कड़े धार्मिक रीति-रिवाज है। यह जैन सिद्धांतों के अनुसार आयोजित किया जाता है, जिनमें सादगी, अहिंसा और आध्यात्मिक पवित्रता पर पूरी तरह से जोर दिया जाता है।
यह विवाह आमतौर पर किसी जैन मंदिर में जैन साधुओं या पुजारियों की उपस्थिति में संपन्न होता है और इसमें निभाई जाने वाली रस्में सांसारिक सुखों के बजाय धर्म के प्रति शादी शुदा जोड़े की प्रेरित करती हैं। आइए आपको बताते हैं इस विवाह की परंपराओं के बारे में और इसकी विभिन्न रस्मों के बारे में।
क्या होता है चक्रवर्ती विवाह?
जैन धर्म में चक्रवर्ती विवाह एक प्राचीन विवाह अनुष्ठान माना जाता है जिसे बहुत सात्विक तरीके से किया जाता है। यह विवाह पूर्ण रूप से सादगी पर आधारित होता है और इसमें किसी तरह का दिखावा नहीं किया जाता है। इस विवाह में सारे संस्कार दिन के समय संपन्न होते हैं और वर वधू दिन के समय विवाह की पूरी प्रक्रिया निभाते हैं।
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इसमें भगवान को साक्षी मानकर प्रतिमा के सामने हवन और सारे विधान किए जाते हैं। पाणिग्रहण संस्कार के साथ सात फेरे की रस्म निभाई जाती है।
इस दिन वर और वधू पूरे दिन उपवास करते हैं। यदि विवाह के दिन उपवास न संभव हो तो एकासन किया जाता है यानी कि एक ही बार भोजन करके विवाह की रस्में निभाई जाती हैं।
अन्य विवाह रस्मों से कैसे अलग है चक्रवर्ती विवाह?
- यह एक ऐसा विवाह है जिसमें किसी प्रकार का आडंबर ना हो और विशुद्धि के साथ मंगल उत्सव मनाया जाए।
- इस तरह के विवाह में बहुत ज्यादा पैसा दिखावे में खर्च नहीं किया जाता है बल्कि सिर्फ ईश्वर को साक्षी मानकर विवाह किया जाता है।
- विवाह के तुरंत बाद किसी तीर्थस्थान या गुरु के दर्शन किया जाता है और जब तक दर्शन नहीं हो जाते हैं तब तक वर और वधू ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।
- इस विवाह का उल्लेख आदिपुराण में मिलता है और इसे एक श्रेष्ठ विवाह के रूप में बताया गया है।
- यह विवाह पूर्ण रूप से शास्त्रीय विधि से किया जाता है जिसमें पूरी तरह से विवाह रस्मों पर ही ध्यान केंद्रित किया जाता है।
- चक्रवर्ती विवाह की रस्मों को जैन मंत्रों द्वारा संपन्न कराया जाता है।
आमतौर पर जैन धर्म का चक्रवर्ती विवाह अन्य विवाह जैसा ही माना जाता है, लेकिन इसमें संस्कारों को प्राथमिकता देते हुए बिना किसी दिखावे के ही विवाह की रस्में निभाई जाती हैं।
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