हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार से पहले शव को नहलाया क्यों जाता है? गरुड़ पुराण में छिपा है इसका जवाब
हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव को स्नान कराने और कपड़े पहनाने की परंपरा आत्मा की शांति और शरीर के सम्मान से जुड़ी है। गरुड़ पुराण के अनुसार, यह क्रिय ...और पढ़ें

अंतिम संस्कार से पहले शव को क्यों नहलाया जाता है? (AI- Image)
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शरीर को स्नान कराना आत्मा की शुद्धि का प्रतीक।
गरुड़ पुराण में शव के सम्मान का उल्लेख।
सफेद वस्त्र शांति और वैराग्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो मरने के बाद भी कई तरह के धार्मिक अनुष्ठानों का पालन किया जाता है, ताकि मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिले। हिंदू परंपरा में मौत के बाद किए जाने वाले कई कार्यों में से एक कार्य शरीर को स्नान कराना और कपड़े पहनाना है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, आखिर मरने के बाद किसी व्यक्ति को नहलाया क्यों जाता है?
हिंदू धर्म में मौत को आखिरी पड़ाव नहीं माना जाता है, बल्कि आत्मा भौतिक शरीर को छोड़कर पुनर्जन्म या मोक्ष की यात्रा पर निकल जाती है। इसी मान्यता को ध्यान में रखते हुए किसी व्यक्ति की मौत के बाद भी उसका काफी ध्यान रखा जाता है। आसान भाषा में कहें तो शरीर एक पात्र की तरह है, जिसने आत्मा को इस जीवनकाल में धारण किया। मृत शरीर को स्नान कराना और कपड़े पहनाना दाह संस्कार के जरिए से उसे प्रकृति में विलीन करने से पहले उस पात्र का सम्मान करने का एक तरीका है।
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मौत के बाद शरीर को स्नान क्यों कराते हैं?
हिंदू धर्म में स्वच्छता और पवित्रता का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। ऐसे में शरीर को स्नान करान आत्मा की आगे की यात्रा पर जाने से पहले उसे सांसारिक अशुद्धियों से दूर करने का एक तरीका है।
पंच महाभूतों में से एक जल जिसे नवजीवन और मुक्ति का आधार माना जाता है। शरीर को स्नान कराकर परिजन प्रतीकात्मक रूप से शारीरिक पीड़ा, बीमारियों और दुखों को धो डालते हैं।
गरुड़ पुराण में क्या कहा गया है?
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, अंतिम संस्कार करने से पहले उसे स्नान कराया जाता है। गरुड़ पुराण और अंतिम संस्कार से जुड़े रस्मों में बताया गया है कि, जिस शरीर ने जीवन भर उस आत्मा का साथ दिया, उस शरीर को विदाई देने से पहले आखिरी बार सम्मान दिया जाता है। इसलिए शव को जलाने से पहले शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराया जाता है। यह परंपरा आत्मा और शरीर को सम्मान देने का प्रतीकात्मक रूप है।
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शव को नए कपड़े क्यों पहनाए जाते हैं?
शव को स्नान कराने के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनाए जाते हैं। परंपरागत रूप से सफेद रंग के वस्त्र पहनाए जाते हैं, जो शांति, वैराग्य और आध्यात्मिक स्पष्टता का प्रतीक हैं। विवाहित महिलाएं साड़ी पहन सकती हैं, जबकि पुरुषों को सफेद वस्त्र पहनाया जाता है। शव को कपड़े पहनाना सिर्फ सजावट का ही विषय नहीं है, बल्कि यह गरिमा का भी प्रतीक है। मृत शरीर को उसी तरह तैयार किया जाता है, जैसे किसी पवित्र यात्रा के लिए तैयारी की जाती है।
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