क्या बच्चों के लिए वाकई सेफ हैं Instagram और YouTube? नई रिसर्च ने सोशल मीडिया सुरक्षा पर उठाए बड़े सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा टीनएजर्स की सुरक्षा के लिए जारी किए गए नए फीचर्स पर हालिया रिसर्च ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है ...और पढ़ें

क्या Instagram और YouTube के टूल्स बच्चों को बचा पा रहे हैं। Photo- ChatGPT.
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। Instagram, Snapchat, TikTok और YouTube जैसी सोशल मीडिया कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में टीनएजर्स के लिए दर्जनों नए सेफ्टी फीचर्स लॉन्च किए हैं। कंपनियां दावा करती हैं कि इनके जरिए बच्चों को अजनबियों, आपत्तिजनक कंटेंट और सोशल मीडिया की लत से बचाया जा सकता है। लेकिन, दैनिक भास्कर ने द न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि, New York University और Northeastern University की एक नई रिसर्च ने इन दावों पर सवाल उठा दिए हैं। रिसर्चर्स ने इन प्लेटफॉर्म्स के सेफ्टी फीचर्स का टेस्ट किया और पाया कि कई फीचर्स या तो ठीक से काम नहीं करते, कुछ को कुछ ही सेकंड में बायपास किया जा सकता है, जबकि कुछ सिर्फ दावों तक ही सीमित हैं।
इन तीन प्लेटफॉर्म्स में सामने आईं बड़ी खामियां
Snapchat: अजनबियों से बचाने का दावा, लेकिन यूजरनेम के जरिए बच्चों तक पहुंचे
Snapchat ने 2023 में कहा था कि अब टीनएजर्स सिर्फ उन्हीं लोगों को दिखाई देंगे जो उनके म्यूचुअल फ्रेंड्स हैं। लेकिन रिसर्च में पाया गया कि अगर किसी को किसी टीनएजर का यूजरनेम पता हो, तो वे आसानी से उनका अकाउंट ढूंढ सकते थे। Snapchat खुद टीनएजर्स को ऐसे एडल्ट्स की प्रोफाइल सजेस्ट कर रहा था जिनसे उनका कोई कनेक्शन नहीं था।
Instagram: अकाउंट प्राइवेट, लेकिन एल्गोरिदम दे रहा अजनबियों के सजेशन्स
Meta ने टीन अकाउंट्स लॉन्च करते समय कहा था कि टीनएजर्स के अकाउंट डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट होंगे और अनचाहे कॉन्टैक्ट्स कम हो जाएंगे। लेकिन जब रिसर्चर्स ने एक बच्ची के लिए नया अकाउंट बनाया, तो Suggested for You सेक्शन में लगभग सभी प्रोफाइल्स उन एडल्ट पुरुषों की थीं जिन्हें वह जानती तक नहीं थी।
YouTube: स्क्रीन टाइम लिमिट को खुद ही टर्न ऑफ करने का सुझाव दे रहा YouTube
YouTube टीनएजर्स के लिए 60 मिनट की स्क्रीन टाइम लिमिट और 'Take a break' रिमाइंडर देता है। रिसर्च में पाया गया कि जैसे ही समय खत्म होता है, YouTube खुद ही Ignore limit for today और Change limit जैसे ऑप्शन्स दिखाता है। YouTube का कहना है कि अगर पेरेंट्स Family Link के जरिए स्क्रीन टाइम सेट करते हैं, तो बच्चे इसे बदल नहीं सकते।
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सेफ्टी फीचर्स मौजूद हैं, लेकिन उन्हें ढूंढना मुश्किल है
इन प्लेटफॉर्म्स के सेफ्टी फीचर्स इतने कॉम्प्लेक्स मेनू में छिपे हुए हैं कि आम पेरेंट्स को उनके बारे में जानकारी तक नहीं मिल पाती। कुछ फीचर्स तो डिफॉल्ट रूप से इनेबल्ड भी नहीं थे।
Meta ने कहा: टीन फीचर्स के कारण स्क्रीन टाइम कम हुआ
Meta का कहना है कि टीन अकाउंट्स लागू होने के बाद टीनएजर्स कम सेंसिटिव कंटेंट देख रहे हैं, रात में Instagram पर कम समय बिता रहे हैं और अनचाहे कॉन्टैक्ट्स में भी कमी आई है।
एक्सपर्ट्स ने कहा: कमजोर सेफ्टी टूल्स हैं असली समस्या
Meta की पूर्व साइकोलॉजिस्ट Anneke Buffone का कहना है कि कई बार ये टूल्स या तो अधूरे होते हैं या इतने कॉम्प्लेक्स होते हैं कि उनका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इन्हें और ज्यादा सख्त बनाने की जरूरत है।