iPhone 17 Pro से शूट हुई फिल्म, डायरेक्टर ने बताया कैसे बदल रही है फिल्ममेकिंग की दुनिया
मुंबई में Jio MAMI Select इवेंट में डायरेक्टर रितेश ने बताया कि उन्होंने कैसे अपनी पूरी फिल्म iPhone 17 Pro पर शूट की है। ...और पढ़ें

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टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में मुंबई में Jio MAMI Select इवेंट आयोजित हुआ। इस दौरान जागरण की खास बातचीत फिल्म डायरेक्टर रितेश से हुई जिन्होंने अपनी पूरी फिल्म iPhone 17 Pro पर शूट की है। जी हां, इस बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटा-सा दिखने वाला स्मार्टफोन आज फिल्ममेकिंग की दुनिया में बड़े-बड़े कैमरा सेटअप को टक्कर दे रहा है।
इस दौरान रितेश ने अपनी फिल्म शूट करने का एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि iPhone की वजह से वे अपने किरदारों के बेहद करीब जा सके और स्क्रीन पर एक नेचुरल रियलिज्म सेट कर सके, जो ट्रेडिशनल कैमरों के साथ काफी करना मुश्किल है।
फीचर्स देख लिया फैसला
जागरण से बातचीत के दौरान रितेश ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार iPhone 17 Pro हाथ में लिया और उसके फीचर्स देखे, तो उन्होंने तभी ये तय कर लिया था कि वे फिल्म को बिल्कुल अलग तरीके से रिकॉर्ड करेंगे। उनका मकसद ऐसी विजुअल स्टोरीटेलिंग बनाना था, जो बड़े कैमरा सेटअप के साथ संभव नहीं थी।
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साथ ही उन्होंने बताया कि iPhone का छोटा और सिंपल सेटअप एक्टर्स को भी ज्यादा सहज रखता है, जिससे स्क्रीन पर भावनाएं और एक्सप्रेशंस ज्यादा नेचुरल दिखाई देते हैं। फिल्म में बहुत से शॉट्स 35mm लेंस फील के साथ रिकॉर्ड किए गए ताकि दर्शकों को बिल्कुल इंसानी आंखों जैसा व्यू मिल सके।
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हालांकि कुछ सीन्स में जानबूझकर रेट्रो फील देने के लिए टेलीफोटो लेंस का यूज किया गया। रितेश ने बताया कि उनकी कहानी गोवा की एक अलग दुनिया को दिखाती है और उसी माहौल को क्रिएट करने के लिए ये विजुअल ट्रीटमेंट काफी ज्यादा जरूरी था।
मुश्किल सीन्स रिकॉर्ड करना आसान
साथ ही इंटरव्यू के दौरान रितेश ने फिल्म के सबसे मुश्किल सीन्स में से एक का भी जिक्र किया, जिसमें समुद्र के अंदर रिकॉर्डिंग की गई थी। उन्होंने बताया कि ट्रेडिशनल कैमरों के साथ ऐसा करना काफी एक्सपेंसिव और मुश्किल होता है, लेकिन iPhone की वॉटर रेजिस्टेंस और पोर्टेबिलिटी के कारण टीम ने सिर्फ एक नॉर्मल प्लास्टिक पाउच की मदद से सी-वॉटर के अंदर पूरा सीन रिकॉर्ड कर लिया।
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ProRes Log फॉर्मेट में की रिकॉर्डिंग
इसके अलावा रितेश ने ये भी बताया कि पूरी फिल्म ProRes Log फॉर्मेट में रिकॉर्ड की गई थी, जिससे पोस्ट-प्रोडक्शन में कलर ग्रेडिंग और विजुअल मूड पर काफी अच्छा कंट्रोल मिला। स्काई, लाइटिंग और कई विजुअल इफेक्ट्स बाद में पोस्ट एडिटिंग में ऐड किए गए ताकि स्टोरी का ड्रामा और इमोशन और ज्यादा बेहतर दिखाई दे।
इंटरव्यू के आखिर में रितेश ने नए फिल्ममेकर्स को एक मैसेज देते हुए कहा कि अब फिल्म बनाने के लिए बड़े बजट या भारी-भरकम गियर की जरूरत नहीं है। अगर आपके पास एक iPhone है और स्टोरी टेलिंग अच्छा है, तो आप कहीं से भी फिल्म बनाना स्टार्ट कर सकते हैं।
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