भूलने की बीमारी से आजाद हुए AI चैटबॉट्स, जानिए क्या है मेमोरी टेक्नोलॉजी और इससे प्राइवेसी को कितना खतरा?
अब तक ChatGPT जैसे AI टूल्स सिर्फ आपके सवालों के जवाब देते थे और बातचीत खत्म होते ही उसे भूल जाते थे। लेकिन अब इनमें 'याद रखने' की कैपेबिलिटी यानी मेम ...और पढ़ें

AI में मेमोरी टेक्नोलॉजी को समझें। Photo- Gemini AI.
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। अभी तक, ChatGPT या Gemini जैसे AI टूल्स केवल आपके सवालों के जवाब देते थे। वे इन बातचीत को खत्म होते ही भूल जाते थे। लेकिन अब, AI असिस्टेंस में याद रखने की कैपेबिलिटी आ गई है। इस वजह से सेफ्टी और प्राइवेसी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं कि प्राइवेसी को लेकर क्या चिंताएं हैं। इस बारे में अलग-अलग सवालों के जरिए जानते हैं।
क्लाउड बैकअप से कैसे अलग है AI मेमोरी?
Cloud Backup आपकी फाइल्स को स्टोर करता है, जबकि 'AI Memory' आपके पूरे डिजिटल कॉन्टेक्स्ट को समझती है। Stanford AI Index रिपोर्ट के मुताबिक, AI अब एक सिंगल-पर्पज टूल से बदलकर एक 'एजेंट' बन गया है, जो आपके इरादों और पिछली बातचीत के संबंधों को समझता है ताकि भविष्य में और ज्यादा सटीक जवाब दे सके।
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कौन सी टेक्नोलॉजी अपना रही हैं टेक कंपनियां?
Apple अपने 'Apple Intelligence' के जरिए ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग और प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट का इस्तेमाल कर रहा है, जो काम खत्म होने के बाद डेटा को डिलीट कर देता है। Google Gemini और OpenAI (ChatGPT Memory) भी केवल यूजर की इजाजत से ही Gmail, फोटोज या पुरानी चैट्स की मेमोरी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सेफ्टी को लेकर क्या है चिंताएं और यूजर्स को रखनी चाहिए क्या सावधानी?
अलग-अलग रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट्स ने कहा कि, AI को डेटा का लगातार एक्सेस मिलने से प्राइवेसी का खतरा बढ़ गया है। अब खतरा सिर्फ अकाउंट हैक होने का नहीं है, बल्कि AI को मैनिपुलेट करके उससे जुड़े सभी एप्स का डेटा लीक कराने का भी है। ऐसे में सावधानी बरतते हुए यूजर्स को AI को केवल चुनिंदा एप्स का ही एक्सेस देना चाहिए और समय-समय पर AI की मेमोरी सेटिंग्स में जाकर हिस्ट्री को डिलीट करते रहना चाहिए।