मैदान पर जंग और गोल्फ कार्ट में मजबूरी, टेनिस खिलाड़ियों को करना पड़ता है अजीब स्थिति का सामना
टेनिस खिलाड़ियों को लॉकर रूम में अजीब सामाजिक स्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिसे अक्सर 'अकेला खेल' कहा जाता है। कोको गॉफ और जानिक सिनर जैसे सितारो ...और पढ़ें

टेनिस

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया भर में कई तरह के खेल खेले जाते हैं लेकिन खेल की दुनिया में टेनिस को सबसे 'अकेला' खेल माना जाता है। कोर्ट पर जब खिलाड़ी खेलने के लिए आते हैं, तो अपनी भावनाओं पर काबू रखते हैं। इसके अलावा खुद को बेहतर प्रदर्शन के लिए और रणनीति बनाने के लिए उन्हें अपने-आपसे बात करते हुए देखा जाता है। कोर्ट के बाहर टेनिस खिलाड़ियों के लिए लॉकर रूम में समय बिताना सबसे कठिन होता है।
लॉकर रूम में प्रतिद्वंदी खिलाड़ी भी साथ में मौजूद होते हैं। ऐसे में उनके मन में भ्रम की उपस्थिति पैदा हो जाती है कि वे अपने विरोधी खिलाड़ी से बात करें या न करें। दुनिया के तमाम दिग्गज प्लेयर्स ने इस असहजता की स्थिति को लेकर बात की है। अमेरिकी स्टार कोको से लेकर इटली के जानिक सिनर तक ने इस असहजता की स्थिति पर अपनी राय दी है।
कोको गॉफ ने दी प्रतिक्रिया
अमेरिकी स्टार कोको गॉफ लॉकर रूम का एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि ऑस्ट्रेलियन ओपन के दौरान उन्होंने एक खिलाड़ी को मैच के बाद मिठाई खाते देखा और मजाक में कह दिया कि शायद उसका मैच अच्छा गया होगा। इसके बाद सामने से जवाब मिला, 'यह डिप्रेशन कैंडी है।' इस एक पल ने बता दिया कि लॉकर रूम में हर खिलाड़ी अलग भावनाओं से गुजर रहा होता है और किसी से भी बात करने से पहले सोचना पड़ता है।
दरअसल, टेनिस में लॉकर रूम सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि भावनाओं का मिश्रण है। कोई खिलाड़ी जीत की खुशी में होता है, तो कोई हार के बाद निराशा में डूबा होता है। ऐसे में खिलाड़ी अक्सर आई कॉन्टैक्ट करने से भी बचते हैं। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्पेन की पाउला बाडोसा बताया, "मैच के दिन वे दूसरे खिलाड़ियों को सिर्फ 'हाय' कहकर आगे बढ़ जाती हैं और बातचीत से बचती हैं। गॉफ ने कहा, 'समझ नहीं आता कि सामने वाले से बात करें या नहीं, और वह किस मूड में है।"
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स्विट्जरलैंड की बेलिंडा ने भी अपने अनुभव को साझा किया है। उनका कहना है कि कभी-कभी हालात और भी अजीब हो जाते हैं। जैसे कोर्ट तक जाने के लिए गोल्फ कार्ट शेयर करना या मैच से पहले तैयार होते समय प्रतिद्वंद्वी का पास में होना। तब समझ नहीं आता कि बातचीत करें या चुप रहें। उन्होंने बताया कि इससे बचने के लिए कई खिलाड़ी लॉकर रूम में कम से कम समय बिताने लगे हैं।
जानिक सिनर ने भी शेयर किया अपना अनुभव
इटली के स्टार जानिक सिनर ने कहा कि अपने करियर की शुरुआत में वे ज्यादा समय वहीं बिताते थे, लेकिन अब वे जल्दी आते हैं और मैच खत्म होते ही निकल जाते हैं। हालांकि, इस माहौल का एक सकारात्मक पहलू भी है। अमेरिकी खिलाड़ी मैडिसन कीज कहती हैं कि यही जगह उन्हें मुश्किल समय में सहारा देती है।
उन्होंने कहा कि यहां 'दोस्त' भी होते हैं, जो हार के बाद आपको संभाल लेते हैं। डेनियल मेदवेदेव के अनुसार, पहले के मुकाबले अब लॉकर रूम का माहौल काफी शांत और बेहतर हो गया है। वहीं, ग्रीस के स्टीफानोस सितसिपास मानते हैं कि सफलता के साथ कुछ खिलाड़ियों का व्यवहार बदल जाता है, जो उन्हें पसंद नहीं है। उनका कहना है कि वे विनम्र लोगों को अधिक पसंद करते हैं।
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