Exclusive: फ्रेंच ओपन में अलकराज के नहीं होने से सभी खिलाड़ियों के पास होगा सुनहरा मौका, पूर्व भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने किया दावा
पूर्व भारतीय टेनिस खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने फ्रेंच ओपन पर अपनी राय दी है। उनका मानना है कि कार्लोस अलकराज की अनुपस्थिति जानिक सिनर और अन्य खिलाड़ियो ...और पढ़ें

सोमदेव देवबर्मन

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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारत के पूर्व सिंगल्स टेनिस खिलाड़ी सोमदेव देवबर्मन का मानना है कि इस बार फ्रेंच ओपन में गत चैंपियन कार्लोस अलकराज का नहीं होना न सिर्फ सिनर बल्कि बाकियों के लिए भी खिताब जीतने का अच्छा मौका है। रविवार से शुरू हो रहे वर्ष के दूसरे ग्रैंडस्लैम फ्रेंच ओपन को लेकर सोमदेव से नितिन नागर ने विशेष बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश:-
रोलां गैरो में इस बार गत चैंपियन कार्लोस अलकराज नहीं खेल रहे हैं। इससे टूर्नामेंट पर कितना असर पड़ेगा? साथ ही जानिक सिनर और नोवाक जोकोविक के फाइनल में भिड़ने की संभावना को आप कैसे देखते हैं?
यह वही सवाल है जो इस समय पूरी दुनिया पूछ रही है। अलकराज की अनुपस्थिति सिर्फ सिनर के लिए बड़ी राहत नहीं है, बल्कि पूरे ड्रॉ के लिए बड़ा मौका बन गई है। कई युवा खिलाड़ी अब इसे अपने लिए सुनहरा अवसर मान रहे हैं। ड्रॉ के दूसरे हिस्से में जोकोविक, ज्वेरेव, ऑर्थर फिस, होल्गर रूने जैसे खिलाड़ी हैं और सभी को लग रहा होगा कि अब उनके पास गहरी चुनौती देने का मौका है। जहां तक सिनर की बात है, उन्होंने पिछले एक साल में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, वह अद्भुत है। इंडियन वेल्स, मियामी, मोंटे कार्लो, मैड्रिड और रोम जैसे बड़े टूर्नामेंट में उनका दबदबा रहा है। अभी की स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यानिक सिनर को हराएगा कौन।
पुरुष सिंगल्स में आप किसे सबसे बड़ा दावेदार या डार्क होर्स मान रहे हैं?
सबसे बड़े दावेदार तो निश्चित रूप से सिनर हैं। उनकी निरंतरता और फिटनेस उन्हें सबसे आगे खड़ा करती है। वहीं डार्क हॉर्स की बात करें तो कई नाम सामने आते हैं। बेरेटिनी, सितसिपास, आर्थर फिस, होल्गर रूने और मेंसिक जैसे खिलाड़ी बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।
क्या इस बार कोई युवा खिलाड़ी बड़ा उलटफेर कर सकता है?
बिल्कुल। खासकर होल्गर रूने और आर्थर फिस जैसे खिलाड़ी शानदार फॉर्म में हैं। दूसरी तरफ जोकोविक को लेकर सवाल उनकी क्षमता का नहीं बल्कि मैच फिटनेस और शरीर की स्थिति का है। उन्होंने क्ले कोर्ट पर ज्यादा मैच नहीं खेले हैं, इसलिए लंबे मुकाबलों में उनके लिए चुनौती बढ़ सकती है।
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क्ले कोर्ट पर खेलना बाकी ग्रैंडस्लैम से कितना अलग और कठिन होता है?
फ्रेंच ओपन सबसे ज्यादा शारीरिक और मानसिक ताकत मांगने वाला ग्रैंडस्लैम है। क्ले कोर्ट धीमा होता है, रैलियां लंबी चलती हैं और शरीर पर बहुत दबाव पड़ता है। सात मैच जीतने के लिए खिलाड़ी को शारीरिक रूप से बेहद मजबूत होना पड़ता है। मानसिक रूप से भी हर अंक के लिए लड़ना पड़ता है।
खिलाड़ी ग्रैंडस्लैम राजस्व में ज्यादा हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?
यह बहस नई नहीं है। खिलाड़ी मानते हैं कि उनके बिना टूर्नामेंट संभव नहीं है, इसलिए उन्हें ज्यादा हिस्सा मिलना चाहिए। वहीं आयोजकों का कहना है कि वे हर साल प्राइज मनी बढ़ा रहे हैं। मुझे लगता है कि यह एक स्वस्थ बहस है। बाकी खेलों में भी ऐसा हुआ है। टेनिस में भी खिलाड़ियों और आयोजकों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
ग्रैंडस्लैम में पहले भारतीय खिलाड़ियों की लगातार उपस्थिति देखने को मिलती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। आप इसे कैसे देखते हैं?
यह सिर्फ एक कारण की बात नहीं है। जमीनी स्तर पर विकास, बेहतर कोचिंग, मजबूत घरेलू टूर्नामेंट ढांचा और सुविधाओं की कमी बड़ी वजहें हैं। हमारे पास कोच तो हैं, लेकिन लगातार विश्वस्तरीय खिलाड़ी नहीं निकल रहे। बड़े शहरों में भी अच्छे और सुलभ टेनिस कोर्ट मिलना मुश्किल है। अगर आधार मजबूत नहीं होगा तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर सफलता मिलना कठिन है।
अगर किसी भारतीय खिलाड़ी को ग्रैंडस्लैम स्तर तक पहुंचना है तो सबसे ज्यादा किस चीज पर काम करना होगा?
हर क्षेत्र में लगातार सुधार जरूरी है। अगर आपकी फिटनेस अच्छी है तो उसे और बेहतर बनाइए, अगर फोरहैंड मजबूत है तो उसे और घातक बनाइए। शीर्ष स्तर के खेल में हर दिन खुद को बेहतर बनाना पड़ता है। यही महान खिलाड़ियों की सबसे बड़ी खासियत होती है।
फ्रेंच ओपन 2026 का प्रसारण भारत में सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा।
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