पशुपालन विभाग में सामान खरीद के नाम पर खा गए लाखों रुपये, आगरा में 25 लाख का घोटाला आया सामने; डीएम ने भेजी रिपोर्ट
आगरा के पशुपालन विभाग में 25 लाख रुपये का खरीद घोटाला सामने आया है, जिसमें जिला क्रय समिति की अनुमति के बिना मनमाने दामों पर सामान खरीदा गया और कुछ बि ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
जिला क्रय समिति की अनुमति के बिना सामान की खरीद।
पूर्व CVO डॉ. जयंत यादव सहित कई दोषी पाए गए।
जागरण संवाददाता, आगरा। पशुपालन विभाग में सामान खरीद में 25 लाख रुपये का घोटाला हुआ है। जिला क्रय समिति से सामान खरीदने की अनुमति नहीं ली गई है। मनमाने रेट पर सामान की खरीद की गई। कुछ सामान की बिना खरीद के ही बिलों का भुगतान कर दिया गया है। यह पर्दाफाश तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है।
इसमें पूर्व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जयंत यादव सहित कई अन्य को दोषी पाया गया है। वर्तमान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. डीके पांडेय की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगे हैं। डीएम मनीष बंसल ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट शासन में भेज दी है।
पशुपालन विभाग में हर साल ग्लव्स, गम बूट, प्लास्टिक की कुर्सी, रस्सा, मग सहित अन्य सामान की खरीद होती है। प्रत्येक सामान की खरीद की सूची बनाकर जिला क्रय समिति को भेजनी होती है। अनुमति मिलने के बाद सामान खरीदा जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 में बिना अनुमति के सामान की खरीद हुई है। यहां तक इस वित्तीय साल में भी कुछ यही खेल हुआ है।
डिप्लोमा वैटनेरियन एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. सतीश चंद्र शर्मा ने डेढ़ साल पूर्व इसकी शिकायत मंडलायुक्त से की थी। तत्कालीन मंडलायुक्त शैलेंद्र सिंह के आदेश पर जांच शुरू हुई लेकिन फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जांच की गति धीमी होने की शिकायत शासन में की गई।
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डीएम के आदेश पर एडीएम न्यायिक धीरेंद्र सिंह, उपायुक्त स्व रोजगार राजन राय और सहायक लेखाधिकारी अवधेश कुमार की निगरानी में कमेटी गठित की गई। कमेटी ने इस प्रकरण की जांच की। केंद्रीय भंडार पंजिका की जांच की गई। क्रय प्रक्रिया से संबंधित सभी मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.डीके पांडेय को भी जानकारी दी गई।
इसके बाद भी एक भी दस्तावेज जांच कमेटी को नहीं मिला। जांच में पाया गया कि विभाग में 25 लाख रुपये का घोटाला हुआ है। इसमें पूर्व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जयंत यादव और पटल सहायक ज्ञानेंद्र भारद्वाज (निधन हो चुका है) को जिम्मेदार ठहराया है। 30 जून को डीएम मनीष बंसल ने कमेटी की रिपोर्ट शासन में भेज दी। डीएम ने बताया कि शासनस्तर से कार्रवाई होगी।
बिलों के आहरण की नहीं है जानकारी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. डीके पांडेय से भी जांच कमेटी ने पूछताछ की। डा.डीके पांडेय ने अपने बयान में कहा कि उन्हें इन बिलों के आहरण की जानकारी नहीं थी। इस पर कमेटी ने उनके बयान पर सवालिया निशान लगाया है। भुगतान बिना उनकी अनुमति के किस तरीके से हो सकता है।