आगरा के सर्राफा बाजार में पसरा सन्नाटा, एक दिन में चांदी के दामों में 13 हजार की छलांग, सोना भी चढ़ा
आगरा के सर्राफा बाजार में आयात शुल्क वृद्धि और चांदी आयात पर प्रतिबंध से मंदी छाई है, जिससे सोने-चांदी की कीमतों में भारी उछाल आया है। कारीगरों के साम ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, आगरा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक वर्ष तक अनावश्यक सोना नहीं खरीदने की अपील, सोना-चांदी पर आयात शुल्क की वृद्धि, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखे जाने से सोना-चांदी का बाजार ठंडा हो गया है।
सोने की चमक और चांदी की खनक बाजार में कम हो रही है। सोने व चांदी की अनुपलब्धता से कारीगरों के सामने रोजगार का संकट मंडरा रहा है। वहीं सोमवार को एक ही दिन में चांदी के दामों में 12 हजार रुपये की बढ़ोत्तरी हो गई। मंगलवार को एक हजार बढ़े हैं।
सोना-चांदी का बढ़ता मूल्य उन्हें आम खरीदारों की पहुंच से दूर कर रहा है। भारत सोने का आयात करने वाले देशों में दुनिया में दूसरे नंबर पर है।
सोने के आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से एक वर्ष तक अनावश्यक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी।
उनकी अपील के बाद सोने में गोल्ड बार, सिक्के, बुलियन कारोबार आदि में निवेश करने वालों ने दूरी बनाई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने सोने व चांदी के आयात पर आयात शुल्क को बढ़ाकर छह से 15 प्रतिशत कर दिया।
इसके बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी के बार, सेमी-प्रोसेस्ड चांदी आदि के आयात को फ्री कैटेगरी से हटाकर प्रतिबंधित श्रेणी में कर दिया। एक सप्ताह के अंदर कीमती धातुओं पर लगी पाबंदियों ने कारोबार को हिलाकर रख दिया है।
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सोने व चांदी के भाव भी उछाल मार रहे हैं। आगरा में चांदी की पायल, बिछिया, अन्य आभूषण बनाने का काम देश में सर्वाधिक होता है। करीब दो लाख लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से इस पर आश्रित हैं।
आयात शुल्क बढ़ने और आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखे जाने से चांदी की बाजार में उपलब्धता में कमी आने से उसके भाव बढ़ रहे हैं। शनिवार को एक किग्रा चांदी 2.61 लाख रुपये की थी, जो मंगलवार को बढ़कर 2.74 लाख रुपये तक पहुंच गई।
शनिवार को 10 ग्राम सोना 1.53 लाख रुपये का था, जो मंगलवार को 1.59 लाख रुपये तक पहुंच गया।
आगरा सराफा मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रजमोहन रैपुरिया ने बताया कि कारोबार पर किसी तरह की रोक नहीं लगी है, लेकिन चांदी का आयात सीमित होने का असर पड़ना तय है।
कारोबारियों को स्टाॅक में उपलब्ध धातु और पुराने जेवरों का एक्सचेंज कर काम चलाने को कहा जा रहा है, जिससे कि कारीगरों को काम मिलता रहे। पुराने जेवरों का एक्सचेंज वही करेगा, जिसे जरूरत होगी। इससे कारोबार में कमी आएगी।
श्रीजी पायल के मनोज गुप्ता ने बताया कि व्यापार पूरी तरह से ठंडा हो चुका है। सोना-चांदी के भाव बहुत अधिक हैं। बाजार मेंं काम बिल्कुल नहीं है। इस स्थिति से बाजार शीघ्र उबरता नजर नहीं आ रहा है।
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