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    Potato Rate: यूपी के इस जिले में दक्षिण भारत के हासन के आलू का दबदबा, किसानों को रेट बढ़ने का इंतजार!

    Updated: Tue, 19 Aug 2025 07:50 AM (IST)

    कर्नाटक के हासन के आलू की आवक से आगरा के बाजार में आलू की मांग घट गई है। स्थानीय आलू की निकासी कम हुई है जिससे किसान चिंतित हैं। तापमान के कारण फसल प्रभावित हुई है। किसानों को बेहतर मूल्य का इंतजार है लेकिन महाराष्ट्र और पंजाब से आने वाली फसलें चुनौती बढ़ा सकती हैं। वर्तमान में मंडी में आलू 10 से 12 रुपये प्रति किलोग्राम है।

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    प्रस्तुतीकरण के लिए सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

    जागरण संवाददाता, आगरा। कर्नाटक के हासन की आलू की फसल की आवक को 20 दिन से अधिक हो गए हैं। बाजार में कब्जा जमा लिया है और दक्षिण भारत की मंडी में आगरा के आलू की मांग घटा दी है। इसके बाद सितंबर में महाराष्ट्र और अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक पंजाब और उसके बाद हिमाचल की फसल आनी है।

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    शीतगृह में भंडारित स्थानीय आलू की निकासी 35 प्रतिशत ही हुई है, जो गत वर्ष की तुलना में सात से आठ प्रतिशत तक कम है। किसानों को थोक बाजार में 450 रुपये प्रति पैकेट से 700 रुपये प्रति पैकेट (प्रति 50 किलोग्राम) आलू मूल्य मिल रहा है। दाम बढ़ने की उम्मीद से किसान निकासी का मन नहीं बना पा रहे हैं।

    आगरा जिले में 74 हजार हेक्टेयर में आलू का उत्पादन होता है

    • जिले में 74 हजार हेक्टेयर में आलू का उत्पादन होता है, जिसमें से अधिकांश आलू भंडारित किया गया है।
    • तापमान अधिक होने के कारण इस बार आलू की फसल प्रभावित रही थी।
    • आलू कंद का फुलाव नहीं हुआ था, जिससे खोदाई में प्रति बीघा 35 से 40 पैकेट कम निकले थे। भंडारण भी 80 प्रतिशत तक ही हुआ था।
    • भंडारण के बाद शुरुआत में किसानों को 700 से 800 रुपये प्रति पैकेट मूल्य मिल रहा था, जो अब भी 450 से 700 रुपये प्रति पैकेट तक पहुंच गया है।
    • मूल्य बेहतर नहीं मिलने के कारण किसान निकासी नहीं कर पा रहे हैं।
    • अप्रैल में खेत में रखा आलू बाजार में रहा और मई, जून में निकासी भंडारित फसल की हुई।
    • जुलाई की शुरुआत तक 32 प्रतिशत तक निकासी हो जानी चाहिए थी, जबकि कुल निकासी 25 प्रतिशत रही। है।
    • इसका बड़ा कारण आम की फसल इस बार बेहतर होना किसानों ने बताया।

    कारोबारी मानते हैं कि ये विकल्प के रूप में प्रयोग होता है। इसके साथ ही पिछले दिनों हरी सब्जियों का सस्ता होना और पश्चिम बंगाल में स्थानीय फसल का अधिक भंडारण होना था। अब हासन की फसल की आवक भरपूर हो रही है, जो सितंबर अंत तक चलेगी। बरारा के किसान डा. हर्ष वधर्न बताते हैं कि सितंबर में महराष्ट्र की फसल आ जाएगी, जिसकी मांग खूब रहती है। इसके बाद महाराष्ट्र की मांग भी घटती है।

    वहीं सितंबर अंत तक दक्षिण भारत में भी आगरा के आलू की मांग काफी घट जाती है। इसके बाद हैदराबाद, पंजाब और दूसरे राज्यों की फसल आ जाती हैं। मूल्य कम मिलने और 130 रुपये प्रति पैकेट भंडारण किराया जुड़ने से आलू लागत में और वृद्धि हो गई है। इसलिए बेहतर मूल्य के लिए किसान भंडारण किए हुए है।

    बाजार में बाजार में 20 से 25 रुपये किलोग्राम है भाव

    सिकंदरा फल एवं सब्जी मंडी में 10 से 12 रुपये प्रति किलोग्राम आलू का मूल्य है। वहीं फुटकर बाजार में 20 रुपये से 25 रुपये प्रति किलोग्राम तक भाव मिल रहा है।

    गत वर्ष 1500 रुपये प्रति पैकेट तक पहुंचे थे मूल्य

    वर्ष 2023 में आलू का उत्पादन अधिक था और साढ़े पांच करोड़ पैकेट भंडारित हुए थे, लेकिन वर्ष 2022 में प्रति पैकेट 350 रुपये से 400 रुपये तक किसानों को खेत पर मूल्य मिला था। अधिकांश किसानों ने भंडारण कर लिया था।

    वहीं गत वर्ष मूल्यों ने रफ्तार पकड़ी थी। एक महीने 1500 रुपये प्रति पैकेट तक भाव पहुंच गए थे। किसानों को इस बार भी ऐसी ही उम्मीद थी, लेकिन मूल्य वृद्धि नहीं हो रही है। इसलिए निकासी भी धीमी है।

    जुलाई के अंतिम सप्ताह में कुछ मांग बढ़ी थी, जो रक्षाबंधन तक रही, लेकिन फिर भी 35 प्रतिशत के आसपास ही निकासी हुई है। किसानों को आलू निकासी में मुश्किल हो रही है। 35 प्रतिशत निकासी है, जो काफी कम है। अगर इसमें रफ्तार नहीं हुई तो आलू फंसेगा। इसलिए किसान बाजार भाव पर नजर रख नियमित निकासी करें। भुवेश अग्रवाल, अध्यक्ष, आगरा कोल्ड स्टोरेज आनर्स एसोसिएशन

    हासन की फसल बाजार में है, जिससे दक्षिण भारत में आगरा के आलू की मांग में कमी आई है। मूल्य भी स्थिर बने हुए हैं, जिससे किसान निकासी का मन नहीं बना पा रहे है। सितंबर में महाराष्ट्र का आलू आ जाएगा। दीपावली के बाद पंजाब और नवंबर मध्यम तक इंदौर का आलू आ जाएगा। इसके बाद निकासी और मुश्किल होगी। इसलिए किसान निरंतर निकासी करते रहें। युवराज परिहार, किसान, शमसाबाद

    अभी आलू की 34 से 35 प्रतिशत निकासी हुई है। ये गत वर्ष की तुलना में सात से आठ प्रतिशत कम है। किसानों के पास जितना आलू है उसे अनुपात में निकालते रहना चाहिए। बैजनाथ सिंह, जिला उद्यान अधिकारी