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    Air Force Drill: लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर हर साल वायुसेना करेगी अभ्यास, बांगरमऊ उन्नाव में 3.5 KM लंबी है हवाई पट्टी

    Updated: Sun, 01 Jun 2025 02:46 PM (IST)

    लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर भारतीय वायुसेना का वार्षिक अभ्यास होगा जिसमें फाइटर प्लेन और मालवाहक विमान शामिल होंगे। बांगरमऊ उन्नाव के पास साढ़े तीन किमी लंबी हवाई पट्टी वायुसेना के नक्शे में शामिल है। आगरा वायुसेना स्टेशन मालवाहक विमानों का गढ़ है। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के अनुसार इस तरह के अभ्यास सेनाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं और कमियों को दूर करने में सहायक होते हैं।

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    प्रस्तुतीकरण के लिए फाइल फोटो का प्रयोग किया गया है।

    जागरण संवाददाता, आगरा। देश के पहले सबसे लंबे लखनऊ एक्सप्रेसवे (302 किमी) में हर साल वायुसेना का अभ्यास होगा। इसमें फाइटर प्लेन से लेकर मालवाहक विमान लैंडिंग और टच डाउन करेंगे। यह अभ्यास एक से दो दिन का होगा। एक्सप्रेसवे में बांगरमऊ उन्नाव के पास साढ़े तीन किमी लंबी हवाई पट्टी है। भारतीय वायुसेना ने इस हवाई पट्टी को अपने नक्शे में जगह दी है। पूर्वाचल एक्सप्रेस, गंगा एक्सप्रेस, यमुना एक्सप्रेसवे भी नक्शे में शामिल हैं।

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    प्रदेश का पहला यमुना एक्सप्रेसवे है। इस एक्सप्रेसवे में फाइटर प्लेन की लैंडिंग और टच डाउन हो चुका है। लखनऊ एक्सप्रेसवे में पिछले साल अभ्यास हुआ था। भारत और पाकिस्तान के मध्य हुए टकराव के बाद भारतीय वायुसेना ऐसे अभ्यास की संख्या को और भी बढ़ाएगी। हालांकि आगरा वायुसेना स्टेशन में नियमित अंतराल में अभ्यास होते हैं। अभ्यास में फाइटर प्लेन और मालवाहक विमान शामिल होते हैं। कुछ ऐसा ही अन्य स्टेशनों में होता है।

    लखनऊ एक्सप्रेस-वे में होने वाले अभ्यास में मिराज-2000, सुखोई-एम30, राफेल, जगुआर, तेजस सहित अन्य विमान शामिल होंगे। यह विमान टच डाउन या फिर लैंडिंग करेंगे। यह अभ्यास एक से दो दिन का होगा। यातायात में मामूली बदलाव किया जाएगा। अभ्यास कब होगा, इसकी तिथि घोषित की जाएगी।

    मालवाहक विमानों का गढ़ है आगरा

    आगरा वायुसेना स्टेशन मालवाहक विमानों का गढ़ है। यहां पर एएन-32, आइएल-78 और 76, सी-130 जे हरक्यूलिस, सी-17 ग्लोब मास्टर, एमआई-17 हेलीकाप्टर, सी-295 प्रमुख रूप से शामिल हैं।

    जरूरी हैं अभ्यास

    सेवानिवृत्त कर्नल जेएस सिंह का कहना है कि भारतीय वायुसेना, नौसेना और भारतीय थल सेना के लिए अभ्यास जरूरी हैं। यह अभ्यास नियमित अंतराल में होते हैं। तीनों सेनाओं के अभ्यास अलग अलग होते हैं। कई बार संयुक्त अभ्यास भी होते हैं। इस तरीके के अभ्यास से तैयारी का मौका मिलता है। कमियों को समय रहते पहचान लिया जाता है और फिर दूर किया जाता है। सेवानिवृत्त कर्नल केपीएस गुप्ता का कहना है कि आपरेशन सिंदूर के बाद अभ्यास की संख्या बढ़नी चाहिए।