चढ़ावा चोरी: चंपतराय और अनिल मिश्र की क्यों हुई ट्रस्ट से विदाई? दोनों थे राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र को उनके पदों से हटा दिया गया है। ...और पढ़ें

HighLights
चंपतराय और अनिल मिश्र को ट्रस्ट से हटाया गया।
चढ़ावा चोरी मामले में निर्णय लेने में अक्षमता मुख्य कारण।
दोनों राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख और सक्रिय चेहरे थे।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। लंबी उठापटक के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव व सदस्य पद से हटाए गए चंपतराय व डॉ. अनिल मिश्र की विदाई का कारण निर्णय लेने में उनकी अक्षमता बनी है।
चढ़ावा चोरी प्रकरण में इनकी कितनी भूमिका या संलिप्तता रही, यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, परंतु इतना तो तय है कि इन पदाधिकारियों ने यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की होती तो इतनी कठिन परिस्थिति न झेलनी पड़ती।
चंपतराय व अनिल मिश्र, ये दोनों वह नाम रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व विश्व हिंदू परिषद में सक्रिय रह कर न केवल मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहे, बल्कि अदालती संघर्ष, निर्माण, प्राण प्रतिष्ठा व ध्वजारोहण सहित विभिन्न आयोजनों में भी प्रमुख चेहरे रहे हैं।
तो चंपतराय पर नहीं लगते आरोप
पहले बात शुरू करते हैं ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपतराय से। इन्होंने राम मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और साक्ष्यों के संकलन में महती भूमिका निभाई। लंबे अदालती संघर्ष के बाद जब नौ नवंबर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने मंदिर निर्माण के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय दिया, तो कोर्ट के आदेश के अनुपालन में केंद्र सरकार ने पांच फरवरी 2020 को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया।
19 फरवरी 2020 को हुई इसकी पहली बैठक में ही विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय को ट्रस्ट का महासचिव चुन लिया गया। इसके बाद उन्होंने मंदिर निर्माण, निधि समर्पण अभियान, ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों और निर्माण संबंधी व्यवस्थाओं का नेतृत्व किया। वह महासचिव के रूप में निर्माण और इससे जुड़े विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
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मंदिर आंदोलन से लेकर निर्माण तक की पूरी यात्रा में उन्हें संगठन के अनुभवी और प्रभावशाली रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है। चंपतराय, देश के उन संगठनकर्ताओं में शामिल रहे, जिन्होंने दशकों तक इस अभियान से जुड़े विभिन्न दायित्व निभाए। ट्रस्ट का महासचिव बनने के बाद उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई।
चोरी प्रकरण में ट्रस्ट के महासचिव रहते हुए उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यदि उन्होंने समय पर प्राथमिकी दर्ज करा कर आरोपितों को गिरफ्तार करा दिया होता, तो उन पर इस तरह आरोपों की झड़ियां नहीं लगतीं।
विभिन्न अभियानों में अनिल मिश्र की रही प्रमुख सहभागिता
वहीं, होम्योपैथिक चिकित्सक रहे डॉ. अनिल मिश्र भी ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। उनका नाम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख स्थानीय चेहरों में शामिल रहा। श्रद्धालुओं की सुविधाओं, निर्माण कार्यों की प्रगति और ट्रस्ट की गतिविधियों से जुड़े विषयों पर वह समय-समय पर अपनी बात सार्वजनिक रूप से भी रखते रहे। स्थानीय प्रतिनिधि होने के नाते मंदिर निर्माण से जुड़े कई कार्यक्रमों में उनकी महत्वपूर्ण उपस्थिति रही।
डाॅ. अनिल मिश्र लंबे समय से अयोध्या की सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे। आंदोलन के दौरान उन्होंने स्थानीय स्तर पर समन्वय और संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं, जिससे वे आंदोलन से जुड़े प्रमुख कार्यकर्ताओं में गिने जाने लगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े विभिन्न अभियानों में उनकी प्रमुख सहभागिता रही। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण का निर्णय दिया तो केंद्र सरकार ने 15 सदस्यीय श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में उन्हें सदस्य बनाया। वह अयोध्या का प्रतिनिधित्व करते रहे।
गठन के साथ ही वे मंदिर निर्माण परियोजना, प्रशासनिक निर्णयों और विभिन्न समितियों के कार्यों से जुड़े रहे। भव्य राम मंदिर में जब 22 जनवरी 2024 को रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तो उन्होंने ही मुख्य यजमान के रूप में सपत्नीक पूजन-अर्चन किया।
इसके बाद हुए अन्य आयोजनों में भी वह मुख्य यजमान की भूमिका निभाते रहे। मंदिर से जुड़े समस्त प्रशासकीय कार्यों का दायित्व होने से उन पर ही चढ़ावा चोरी प्रकरण में बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।
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