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    Baghpat: खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही यमुना, कई गांवों के खेतों में घुसा पानी, कटान शुरू

    Updated: Wed, 20 Aug 2025 06:00 AM (IST)

    Baghpat News बागपत में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है जिससे किनारे के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। खेतों में पानी घुसने से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे न जाने की सलाह दी है। सिंचाई विभाग के अनुसार हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर बढ़ा है।

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    खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही यमुना, अलर्ट जारी

    जागरण संवाददाता, बड़ौत (बागपत)। पहाड़ और मैदानी इलाकों में लगातार बरसात होने से जनपद में यमुना उफान पर है। नदी का पानी खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रहा है। यमुना के बढ़ते जलस्तर के मद्देनजर प्रशासन चौकन्ना है। लोगों को यमुना नदी किनारे न जाने और सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। नदी किनारे खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं। हथिनीकुंड बैराज से मंगलवार को यमुना में 33 हजार क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। कई गांवों में कटान शुरू हो गया है।

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    ज्यादा पानी आ जाने से अब यमुना का भंडारण पूरा होने लगा है। पानी नदी के दोनों किनारों से सटकर बह रहा है। टांडा, छपरौली, नैथला, कोताना, जागोस, शबगा, बागपत नगर, काठा, पाली, सुभानपुर, सांकरौद, निवाड़ा, कुरड़ी, फजल्लापुर आदि के यमुना खादर के खेतों में गन्ना, चारा, हरी सब्जियों आदि में पानी घुसने से किसानों का आर्थिक नुकसान तय है। प्रशासन और सिंचाई विभाग ने यमुना किनारे रहने वाले लोगों को सलाह दी है कि बढ़ते जलस्तर को देखते हुए वे नदी किनारे न जाएं और सतर्क रहें।

    सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रजनीश कुमार ने बताया कि नदी में 209 मीटर पर खतरे का निशान है, लेकिन नदी का पानी 211 मीटर पर बह रहा है। हालांकि इतने पानी से अभी खतरे वाली कोई बात नहीं है क्योंकि पानी यमुना नदी के भंडारण में है। 212 मीटर पर भी खतरा नहीं होगा। लोगों को नदी किनारे न जाने की सलाह दी गई है। मंगलवार को हथिनीकुंड बैराज से 33 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

    जागौस गांव के रहने वाले विनोद, मनोज, सुनील आदि का कहना है कि नदी ने उनके खेतों का कटान शुरू कर दिया है। गन्ने की फसल मिट्टी के साथ कटकर यमुना में समा रही है। इस बार ही नहीं बल्कि जब भी नदी उफान पर होती है तो उनके खेतों का कटान होता है। ककौर, कोताना, शबगा, कुरड़ी आदि में भी कृषि भूमि कटान का कमाेबेश यही हाल है। भूमि कटान और फसलें बर्बाद होने से करोड़ों रुपये का नुकसान होने वाला है।

    खतरा और तैयारी

    -यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे आसपास के गांवों में खतरा बढ़ गया है।

    -यमुना का जलस्तर बढ़ने से गन्ना, ज्वार और धान की फसलों को नुकसान हो रहा है।

    -प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को अलर्ट कर दिया है और लोगों से नदी के पास न जाने की अपील की है।

    -नदी किनारे बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया गया है और गोताखोरों को भी तैनात किया गया है।

    -कई गांवों में यमुना नदी के किनारे कटान भी शुरू हो गया है, जिससे किसानों को नुकसान होने वाला है।