यूपी के इस जिले में फर्जी मदरसे का पर्दाफाश, हॉस्टल में मिली 39 छात्राएं; मतांतरण कराने का आरोप
बलरामपुर में हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण के आरोप के बाद पुलिस ने एक अवैध मदरसे पर छापा मारा। उतरौला के पास कपौवा शेरपुर में मदरसा जामिया अलीमा सादिया में 39 छात्राएं छात्रावास में मिलीं। प्रबंधक मदरसे के कागजात नहीं दिखा पाए। प्रशासन ने मदरसे को बंद कर सभी छात्राओं को उनके परिवार को सौंप दिया। जांच में पता चला कि 57 छात्राएं नामांकित थीं।

जागरण संवाददाता, बलरामपुर। हिंदू युवतियों को प्रेम जाल में फंसाकर उनका मतांतरण कराने के आरोपित छांगुर की गिरफ्तारी के बाद अब अवैध रूप से चल रहे मदरसों पर प्रशासन की नजर टेढ़ी हो गई है। उतरौला से लगभग 10 किमी दूर श्रीदत्तगंज के कपौवा शेरपुर में चल रहे फर्जी मदरसे पर शुक्रवार को पुलिस प्रशासन व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने संयुक्त रूप से छापेमारी की।
मदरसा जामिया अलीमा सादिया के नाम से चल रहे इस मदरसे में छात्रावास भी पाया गया, जहां 39 छात्राएं रह रही थीं। प्रबंधक मौलाना गुलाम मैनुद्दीन मदरसे व छात्रावास से संबंधित कोई अभिलेख नहीं दिखा सके। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से मदरसे को बंद कराते हुए यहां रहने वाली सभी छात्राओं के स्वजन को बुलाकर उनके सिपुर्द कर दिया है।
शुक्रवार की शाम कपौवा शेरपुर गांव में पुलिस व अधिकारियों की गाड़ियां पहुंची, तो आसपास रहने वाले लोग सदमे में आ गए। आबादी से करीब 400-500 मीटर दूरी पर चल रहे इस मदरसे के बारे में किसी को जानकारी नहीं थी।
पुलिस ने मदरसे की जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यहां कुल 57 छात्राएं नामांकित हैं। यहां फर्जी रूप से छात्रावास भी बनाया गया है, जहां 39 छात्राएं रहती थीं। इनमें पड़ोसी जनपद गोंडा की छात्राएं भी शामिल हैं। बताया जाता है कि यहां बाहर के किसी ट्रस्ट से पैसा आता है।
क्षेत्राधिकारी उतरौला राघवेंद्र सिंह ने बताया कि मदरसा प्रबंधक कोई कागज नहीं दिखा पाए, जिस कारण छात्राओं को वहां से मुक्त कराकर उनके स्वजन को सौंप दिया गया है। मदरसे को तत्काल प्रभाव से बंद कराते हुए छानबीन की जा रही है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी यशवंत मौर्य ने बताया कि मैं अवकाश पर हूं। विभागीय लिपिक को पुलिस प्रशासन के साथ भेजा गया था। मदरसा की मान्यता के बारे में पड़ताल की जाएगी।
600 रुपये मासिक में थी आवासीय तालीम
अपनी बेटी व दो ननदों को घर ले जा रही इटियाथोक गोंडा निवासिनी रुबीना ने बताया कि यहां उर्दू व अरबी की पढ़ाई होती थी। पहले बेटी को इटियाथोक के मदरसे में ही पढ़ाते थे। वहीं से संपर्क हुआ। यहां 600 रुपये में पढ़ाई संग छात्रावास की सुविधा मिली थी।
पंजीकृत संस्था से चल रहा कोचिंग सेंटर
संचालक मौलाना गुलाम मैनुद्दीन ने बताया कि एक पंजीकृत संस्था के माध्यम से कोचिंग सेंटर संचालित है। संस्था में 12 सदस्य हैं। इसमें चार महिला शिक्षक हैं। 57 बेटियां शिकण ग्रहण करती है। इसमें पांच गोंडा जिले की हैं। शेष बलरामपुर की थी।
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