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    'माना मोहब्बत बुरी नहीं, पर मां-बाप से बढ़कर नहीं', हनुमंत कथा में धीरेंद्र शास्त्री बोल- सेवा से ही होती है ईश्वर की प्राप्ति 

    Updated: Sat, 17 Jan 2026 07:23 PM (IST)

    बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने बांदा में हनुमंत कथा के दौरान कहा कि मोहब्बत बुरी नहीं, पर मां-बाप से बढ़कर नहीं। उन्होंने सेवा को ईश्वर प्राप्ति ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, बांदा। माना मोहब्बत बुरी नहीं, पर मां-बाप से बढ़कर नहीं यह संदेश बागेश्वर धाम मठ के पीठाधीश्वर पंडित आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने शहर के मवई बाईपास में आयोजित हनुमंत कथा के दूसरे दिन दिया। शनिवार को कथा में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने ओरछा की धरती पर स्थापित रामराजा सरकार की गौरवगाथा सुनाई और कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ जीवन देना और सेवा करना है, क्योंकि सेवा से ही ईश्वर की प्राप्ति होती है।

    कथा के दूसरे दिन के यजमान व आयोजक प्रवीण सिंह रहे, जिन्होंने विधिवत आरती की। आरती के बाद कथा शुरू करने से पहले ही धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मंजिल इंसान के हौसलों को आजमाती है और सपनों के पर्दे यहीं हटाती है। उन्होंने कहा कि यह कथा अब महाकुंभ का रूप लेती जा रही है। जहां नजर जाती है, वहां सनातन की झलक दिखाई दे रही है। उन्होंने उमड़ी भारी भीड़ को देखकर कहा कि ऐसा प्रतीत होता है, मानो पूरा बुंदेलखंड ही कथा में उमड़ पड़ा हो।

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इन पांच दिनों में भले ही कितनों का जीवन बदले, यह हमें ज्ञात न हो, लेकिन इन दिनों हजारों लोगों की जीविका चल रही है, उनके परिवारों का पालन-पोषण हो रहा है। इससे बड़ा पुण्य का कार्य कुछ नहीं हो सकता। कथा स्थल पर लगातार भंडारा भी चल रहा है।

    ओरछा और रामराजा सरकार का प्रसंग

    धीरेंद्र शास्त्री ने बुंदेलखंड की ऐतिहासिक व धार्मिक नगरी ओरछा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां रामराजा सरकार विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि प्रतापी राजा मधुकर शाह की पत्नी गणेश देई ही रामराजा सरकार को अयोध्या से ओरछा लेकर आईं और उनकी स्थापना कराई।

    राजा मधुकर शाह परम वैष्णव थे और तिलक-माला धारण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रणाम करते थे। उन्होंने उस प्रसिद्ध प्रसंग का वर्णन किया, जब कुछ लोगों ने मजाक में एक गधे को तिलक-माला धारण कराई। राजा ने बिना संकोच गधे को भी प्रणाम किया और कहा- “दो पांव वाले वैष्णव तो बहुत देखे, चार पांव वाला वैष्णव पहली बार देखा।” यह प्रसंग धर्म और भक्ति की सच्ची भावना को दर्शाता है।

    प्रेम, परिवार और विश्वास पर संदेश

    कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं और बेटियों को संबोधित करते हुए कहा कि माना मोहब्बत बुरी नहीं है, लेकिन मां-बाप से ज्यादा जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि जीवन में भरोसा करना है। तो केवल दो पर ही करें तीसरे पर करना हो केवल ईश्वर ही भरोसे के लायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि कोई तन का भूखा है, कोई धन का, कोई शोहरत और इज्जत का।

    सच्चा सुख वहीं है जहां सेवा, विश्वास और संस्कार हों। उन्होंने जीवन के चार सुख बताते हुए कहा पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख घर में माया, तीसरा सुख सुलझी नारी और चौथा सुख आज्ञाकारी संतान। जिसे ये चारों सुख मिल जाएं, वह जीते-जी स्वर्ग का अनुभव करता है।

    आज दोपहर 12 बजे हनुमंत कथा पंडाल में लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार

    मवई बाईपास में चल रही हनुमंत कथा के तीसरे दिन रविवार को श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा। बागेश्वर धाम मठ के पीठाधीश्वर पंडित आचार्य धीरेंद्र शास्त्री रविवार को दोपहर 12 बजे कथा पंडाल में ही दिव्य दरबार लगाएंगे। दिव्य दरबार को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। हनुमंत कथा के दूसरे दिन शनिवार को भी कथा स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी।

    कथा के दौरान पंडाल में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ तथा भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल सहित कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने कथा आयोजकों की सराहना करते हुए इसे बुंदेलखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला आयोजन बताया।