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    'कानून काफी नहीं, इच्छाशक्ति चाहिए': NTA को UPSC से सीखने की सलाह, पढ़ें पेपर लीक रोकने के कड़े सुझाव

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 11:30 PM (IST)

    दैनिक जागरण के विमर्श में प्रो. सोमेश यादव ने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए सिर्फ कानून नहीं, मजबूत इच्छाशक्ति चाहिए और NTA को UPSC से सीखना चाहिए। सरक ...और पढ़ें

    जागरण विमर्श में बरेली काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ.सोमेश यादव। जागरण

    जागरण विमर्श में बरेली काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ.सोमेश यादव। जागरण

    HighLights

    1. दैनिक जागरण कार्यालय में परीक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों और पेपर लीक पर रोक के नियम पर विमर्श

    जागरण संवाददाता, बरेली। दैनिक जागरण कार्यालय में सोमवार को आयोजित विमर्श के दौरान परीक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर रोक के लिए बने नए नियमों पर गहन मंथन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता बरेली काॅलेज के पूर्व प्राचार्य और लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. सोमेश यादव ने कहा कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए केवल कानूनों का कड़ा होना ही काफी नहीं है, बल्कि इसके पीछे की मजबूत इच्छा शक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है।

    कहा क‍ि जिस नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की भूमिका परीक्षाओं के संचालन में सबसे प्रमुख रही है, उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सुझाव दिया कि एनटीए को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के कार्य करने के तरीके से सीखना चाहिए, जो लाखों अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित करने के बावजूद अपनी पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने में सक्षम हैं।

    विमर्श के दौरान प्रो. यादव ने वर्ष 2013 से लेकर 2024 तक के परीक्षा इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि सिस्टम में मौजूद दोषों को जड़ से खत्म करना अनिवार्य है। उन्होंने पेपर सेट करने वालों की पृष्ठभूमि की जांच करने और डिजिटल युग की चुनौतियों को देखते हुए एक मजबूत डिफेंस सिस्टम बनाने पर जोर दिया, ताकि हैकर्स की पहुंच से प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखा जा सके।

    स्पष्ट किया कि पेपर खरीदने और बेचने वाले दोनों ही बराबर के दोषी हैं और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई समय की मांग है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि नैतिकता के आधार पर इस्तीफा एक सकारात्मक कदम हो सकता है।

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    मगर, जब तक सिस्टम के मूलभूत ढांचे में सुधार नहीं होगा, तब तक किसी बड़े बदलाव की उम्मीद करना बेमानी है। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन की एक उपलब्धि यह रही कि इसमें शिक्षा बड़ा मुद्दा बनकर उभरा।

    परीक्षा की गरिमा पुन: स्थापित करना चुनौतीपूर्ण

    क्या सिर्फ कानूनों की सख्ती से पेपर लीक का क्रम रुकेगा? इस सवाल पर विशेषज्ञ का मानना है कि जब तक परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण-प्रश्नपत्र बनाने से लेकर उसके वितरण और मूल्यांकन तक में मानवीय हस्तक्षेप को कम नहीं किया जाएगा और तकनीकी सुरक्षा को अभेद्य नहीं बनाया जाएगा, तब तक छात्रों के भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। सामूहिक प्रयासों, सख्त निगरानी और सिस्टम की जवाबदेही ही वह एकमात्र रास्ता है, जिससे परीक्षाओं की गरिमा को पुनः स्थापित किया जा सकता है।

    नए नियम पर टिकीं नजरें

    दूसरी ओर, देश में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए सरकार भी अब और अधिक सख्त कदम उठाने की दिशा में अग्रसर है। वर्तमान में लागू लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन के लिए नया विधेयक लाया जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून के तहत सजा और जुर्माने के प्रविधानों को काफी कठोर बनाया गया है।

    नए संशोधनों के अनुसार, पेपर लीक में दोषी पाए जाने पर अब तीन-पांच वर्ष की जगह अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्राविधान है। यदि यह अपराध किसी संगठित गिरोह द्वारा अंजाम दिया जाता है, तो सजा सात से 10 वर्ष तक और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

    इसके अतिरिक्त, फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है ताकि मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर सुनिश्चित हो सके। सरकार का यह भी कहना है कि इन सख्त नियमों का उद्देश्य केवल दोषियों को दंडित करना नहीं, बल्कि सेवा प्रदाताओं और परीक्षा माफियाओं की जवाबदेही तय करना भी है।

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