UP Flood Alert: फतेहपुर में यमुना का कहर, अब तक बाढ़ से नदी में समाई 13 हजार बीघा जमीन, किसान बेहाल
Fatehpur Flood Alert फतेहपुर के असोथर ब्लाक में यमुना नदी का कटाव पिछले 55 सालों से जारी है जिससे कई गांव प्रभावित हैं। हर साल हजारों बीघे जमीन नदी में समाहित हो रही है और ग्रामीण बेबस हैं। प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है जिससे किसानों में निराशा है।

जागरण संवाददाता, फतेहपुर। असोथर ब्लाक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत 55 सालों से यमुना नदी से होने वाली कटान से पीड़ित है। कोर्ट, कचहरी, जनप्रतिनिधियों की चौखट, धरना प्रदर्शन आदि करके ग्रामीण थक चुके हैं। कोई सहारा बनकर नहीं उभरा है। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक 13 हजार बीघे से अधिक जमीन प्रति वर्षा की यमुना कटान में समाहित हो चुकी है। इसबार भी बाढ़ जैसी स्थिति से यमुनांचल जूझ रहा है।
कोर्राकनक में दिनभर गांव की जमीन यमुना में समाहित हो रही है। यमुना की कगार में बसे मैनाही के डेरा का अंतिम मकान भी छोटे यादव ने खाली कर दिया है। कच्चे मकान से सारा सामान ट्रैक्टर के माध्यम से उठाकर नई जगह में बने मकान में शिफ्ट कर दिया है।
कटान को जानें
यमुना नदी के किनारे कोर्राकनक गांव बसा है। जिसमें कभी 56 मजरे हुआ करते थे। अब तक 9 मजरों का नामोनिशान मिट चुका था। हड़ाही के बाद अब मैनाही डेरा को मिलाकर 10 मजरे हो गए हैं। इन मजरों के लोगों ने नई जगह पर अपने मकान बनवा लिए हैं। बुजुर्गों की मानें तो यमुना के दक्षिण दिशा में पांच किमी दूर तक जमीन जाने का अनुमान है। इसकी तस्दीक एक पीपल के पेड़ से की जाती है। इस पार की जमीन पर बांदा जिले के लौमर गांव के किसानों का कब्जा है। इसपार के किसान भूमिहीन होते जा रहे हैं तो उसपार के किसान कटरी में खेती बाड़ी करके कमाई कर रहे हैं।
वर्ष 2016 में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कराया था पैमाइश
वर्ष 2014 मे किसानों ने धरना प्रदर्शन किया और आवाज केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक पहुंची। वर्ष 2016 में केंद्र और प्रदेश में भाजपा सरकार बनी तो तत्कालीन जिले के सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन की पैरवी पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने सर्वे किया था। इसके बाद जिले और बांदा जनपद कमिश्नर स्तर पर पैमाइश का निर्णय हुआ था। पैमाइश में आई टीम विरोध के चलते बैरंग वापस हो गई। इसके बाद न तो कटान के लिए पत्थर लगे और न ही अन्य कोई कार्रवाई हुई।
बोले किसान
- किसान खून के आंसू रो रहा है, कोई सुनने वाला नहीं है। प्रशासन, राजनेता सब हवा हवाई बात करके चले जाते हैं।
- हाथ से फिसली जमीन की कौन कहे प्रति वर्ष की कटान को रोकने के लिए पत्थर तक नहीं लगाए जा सके हैं।
संक्रामक बीमारियों से बाढ़ प्रभावित गांव के बचाने का प्रयास शुरू
बिंदकी : यमुना की बाढ़ से प्रभावित गांव को संभावित संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग व ब्लाक ने संयुक्त प्रयास शुरू कर दिए हैं। सीएचसी अमौली के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. पुष्कर कटियार ने बाढ़ प्रभावित गांव परसेढ़ा, गौरी-औंरा व दपसौरा में एएनएम को सक्रिय कर दिया है। बाढ़ प्रभावित गांव पहुंचकर एएनएम को क्लोरीन की गोली व दवाओं की किट दी। उन्होंने क्लोरीन की गोली घर-घर पहुंचाने का एएनएम निर्देश दिए। किसी के अचानक बीमार पड़ जाने पर दवा की किट भी दी जाएगी। इसके अलावा ब्लाक से सफाई कर्मचारी बाढ़ प्रभावित गांव पहुंचे। गांव की नालियों व गलियों की सफाई की है। इसके साथ ही एंटी लार्वा का छिड़काव भी किया गया है।
बाढ़ग्रस्त गांव पल्टू का पुरवा से सामान लादकर नाव से जाते ग्रामीण। जागरण
यमुना पुल का पहुंच मार्ग धंसा, बाढ़ राहत शिविर में जाने की सलाह
खागा : यमुना नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। किशुनपुर कस्बा, महावतपुर असहट, गुरुवल, कोट, संगोलीपुर मडइयन, सेंधरी, बिकौरा आदि गांवों में बाढ़ की वजह से लोगों को मुश्किल हो रही है। सबसे अधिक समस्या मवेशियों के लिए चारे की होती है। बाजार, अस्पताल व स्कूल-कालेज तक पहुंचने में लोगों को बाढ़ की वजह से परेशानी हो रही है। खखरेड़ू-कोट मार्ग पर दरियापुर गांव के नजदीक ससुर खदेरी नदी के ऊपर बने पक्का पुल का पहुंच मार्ग दोनों ओर बाढ़ में डूबा है। पौने तीन करोड़ की लागत से बने पुल को पार करने के बाद लोग पानी में घुसकर निकल रहे हैं। नाव के सहारे भी लोग नदी पार करने लगे हैं। किशुनपुर-दांदो पक्का पुल का क्षतिग्रस्त पहुंच मार्ग आठ महीने बाद तैयार हुआ था। बाढ़ के कारण वह पुन: क्षतिग्रस्त हो गया। तुर्की नाला पुल के पास पहुंच मार्ग धंसने से सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है।
बांदा-कानपुर मार्ग पर सरांय के समीप पलटा पड़ा बालू लदा ट्रक और पैदल निकलते लोग। जागरण
वाहनों को रोकने को लगाए बैरियर
अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग अनिल कुमार शील ने सहायक अभियंता कुमार गौरव तथा अवर अभियंता मोहित के साथ धंसे मार्ग का निरीक्षण किया। एक्सइएन ने कहा कि बाढ़ समाप्त होने के बाद मरम्मत शुरू होगी। स्थानीय लोगों ने आठ महीने में बनकर तैयार हुए पहुंच मार्ग के दोबारा धंसने पर विभागीय तकनीकी पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने वाहनों को रोकने के लिए नागा बाबा कुटी के सामने बैरियर लगाया है।
परिवारों को राहत शिविर में जाने की सलाह
किशुनुपर कस्बा के नरवापर, तमरहटी व अहिराना-बहराना वार्ड के अंदर तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। तीनों वार्ड में रहने वाले 15 परिवारों को सर्वोदय इंटर कालेज में बनाए बाढ़ राहत शिविर में जाने की सलाह दी गई है। क्षेत्रीय लेखपाल अपूर्व सिंह ने महावतपुर असहट गांव में तीन परिवारों के 15 सदस्यों को पंचायत घर में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर में जाने की सलाह देते हुए जरूरी सामग्री उपलब्ध करा दी। शाम चार बजे तक राहत शिविर में एक भी परिवार नहीं पहुंचा।
अहिराना-बहराना में पानी से घिरा ट्रांसफार्मर बिजली के कई खंभे
बाढ़ के पानी में आधे डूब चुके हैं। रावण मैदान, नरवापर तथा महावपुर असहट गांव की हाईवोल्टेज लाइन के खंभे पानी से घिरे हुए हैं। अहिराना-बहराना वार्ड में रखा 400 केवी ट्रांसफार्मर के चारों ओर पानी भर जाने से बिजली काट दी गई है। अवर अभियंता नुसरल अली ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
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