Fatehpur में बरमतपुर प्रकरण: बेदखली पर गलत चला बुलडोजर, लेखपाल व कानूनगो निलंबित
बरमतपुर प्रकरण में लेखपाल और कानूनगो पर कार्रवाई की गई है। दोनों को निलंबित कर दिया गया है। मुख्य सचिव के स्टाफ अफसर भी मौके पर पहुंचे। जांच-पड़ताल कर रिपोर्ट बना ले गए। प्रशासन पर गलत कार्रवाई का आरोप लगा थ्का। खागा राजस्व टीम की रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई है।

जागरण संवाददाता, फतेहपुर। छह दिन से सुर्खियों में छाये बरमतपुर प्रकरण में सोमवार को सदर तहसील प्रशासन की कार्रवाई में ही गलती निकल आई। एक तरफ बिंदकी विधायक जय कुमार जैकी की शिकायत पर मुख्य सचिव के स्टाफ आफीसर रविंद्र कुमार ने गांव पहुंच कर मौका मुआयना किया, तो दूसरी तरफ डीएम रविंद्र सिंह ने प्रकरण की जांच खागा तहसील की राजस्व टीम भेजकर कराई।
गलत ढंग से बुलडोजर चलाने पर हल्का लेखपाल आराधना और कानूनगो जितेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया है, तो वहीं नायब तहसीलदार घुरई लाल को तहसील से हटाते हुए भूलेख कार्यालय से संबद्ध कर उनके खिलाफ रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेज दी है। पीड़ितों को आवास का लाभ देने का भरोसा दिया है।
मुख्य सचिव के स्टाफ अफसर ने गांव पहुंच कर पीड़ितों के बयान दर्ज किए और गिरे हुए घरों के फोटोग्राफ स्वयं खींचे। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के लिए गठित कमेटी से भी अलग-अलग बात की और बयान दर्ज कर लखनऊ चले गए। पहले बिंदकी विधायक जय कुमार जैकी, सोमवार को खागा विधायक कृष्णा पासवान, भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल, हसवा ब्लाक प्रमुख विकास पासवान ने डीएम से बारी बारी मुलाकात कर गलत ढंग से गिराए गये घरों पर कार्रवाई की मांग की।
डीएम द्वारा सदर तहसील की कार्रवाई की क्रास जांच खागा तहसील की राजस्व टीम से कराई। खागा की राजस्व टीम में नायब तहसीलदार अरविंद कुमार, दो राजस्व निरीक्षक और पांच लेखपाल शामिल थे। इस टीम ने जांच में यह पाया कि वर्ष 2023 में गाटा संख्या 36 (चकमार्ग) की बेदखली आदेश पारित किए थे, लेकिन जब टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची तो गाटा संख्या 52 में बनें निर्माण को ढहा दिया।
कार्रवाई में जल्दबाजी इतनी थी कि एक दीवाल गिराने के लिए पूरे घर को नहीं देखा गया जबकि पीड़ितों का 80 प्रतिशत अपनी भूमिधर जमीन था।
‘लखनऊ से जांच के लिए मुख्य सचिव के स्टाफ अफसर रविंद्र कुमार आए थे, उनकों बरमतपुर गांव का दौरा कराया है, उन्होंने बेदखली आदेश समेत कार्रवाई के जो दस्तावेज मांगे दिए गए हैं। उन्होंने गांव में पीड़ित से बात भी की है।’
- अमरेश सिंह, तहसीलदार सदर
‘सदर तहसील की कार्रवाई का परीक्षण खागा तहसील की राजस्व टीम से कराया गया है। राजस्व टीम की रिपोर्ट के आधार पर लेखपाल व कानूनगो को निलंबित कर दिया गया है और नायब तहसीलदार को भूलेख कार्यालय से संबद्ध किया गया है। पीड़ितों को पीएम आवास व पेंशन लाभ भी प्रदान करने की प्रक्रिया चल रही है।’
-अविनाश त्रिपाठी, एडीएम राजस्व एवं वित्त
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