तीन दिनों से पीएचसी में ताला, लौट रहे छह गांवों के मरीज
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तीन दिनों से पीएचसी में ताला, लौट रहे छह गांवों के मरीज
संवाद सहयोगी खागा : स्वास्थ्य सेवाओं का जिले में बुरा हाल है। चिकित्सक और पैरा मेडिकल स्टाफ ग्रामीण इलाकों में खुले अस्पतालों में नियमित नहीं पहुंचते हैं, इसकी बानगी जहांगीर नगर गहुरा की न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) है। इस अस्पताल में बीते तीन दिनों से ताला ही नहीं खोला गया। गेट और मैदान में खड़ी बड़ी-बड़ी घास और फैली गंदगी अस्पताल के नियमित न खुलने की गवाही दे रही है। यहां छह गांवों से लोग उपचार को पहुंचते हैं और गेट पर ताला देखकर लौट जाते हैं।
बुधवार को न्यू पीएचसी सुबह नौ बजे तालाबंदी का शिकार देखी गई। दामोदरपुर के लवकुश ने बताया कि वह दो दिन से बराबर लौट रहें हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं आ रहे हैं। जहांगीर नगर गहुरा के मनोज द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल में एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और एक लैब सहायक और चतुर्थ श्रेणी हैं। पूरा स्टाफ ही नहीं आता है। नियमित रूप से अस्पताल न खुलने से दामोदरपुर, पुरमई, हरचंदपुर, किशुनदासपुर, ढोढ़ियापुर के गांव के उन बीमारों को परेशानी उठानी पड़ती है। इन्हें अस्पताल खुलने पर अपने गांव के पास ही उपचार मिलने का प्रबंध सरकार ने किया है।
अस्पताल बंदी से 22 किलोमीटर का चक्कर
न्यू पीएचसी बंद होने से इस अस्पताल से जुड़े गांवों के बीमारों को उपचार कराने के लिए 22 किलोमीटर दूर धाता या फिर 15 किलोमीटर दूर खखरेडू के सरकारी अस्पताल जाना पड़ता है। इसके लिए समय और रुपये भी खर्च होते हैं। अगर नियमित अस्पताल खुले तो स्वास्थ्य सुविधा गांव के पास ही मिल जाए। जबकि सरकार अस्पताल में जांच व दवाएं निश्शुल्क बांटने का निर्देश देती है।
मेरे खिलाफ साजिश हो रही है
न्यू पीएचसी में तैनात डा. प्रभात कुमार का कहना है कि अस्पताल नियमित खुलता है, ओपीडी रजिस्टर में मरीजों के नाम देखे जा सकते हैं। दरअसल गांव के कुछ लोग उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं। एक दिन वह अवकाश में थे और एक दिन देर से पहुंचे ऐसे में बंद अस्पताल की फोटो खींच कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।
अस्पताल का ताला न खुलना बेहद गंभीर विषय है। इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी और यदि अस्पताल नियमित रूप से नहीं खोला जाता है तो संबंधित चिकित्सक और स्टाफ के खिलाफ उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
डा. सुनील भारतीय सीएमओ
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