Trending

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    गाजियाबाद में स्कूल कर्मचारी को 10 दिन डिजिटल अरेस्ट रख ठगे 15 लाख, मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की दी थी धमकी

    Updated: Sat, 16 May 2026 08:16 AM (IST)

    गाजियाबाद में साइबर अपराधियों ने एटीएस इंस्पेक्टर बनकर एक स्कूल कर्मचारी को 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। धमकाकर पीड़ित से 15.20 लाख रुपये ठग लिए ...और पढ़ें

    preferred source google
    News Article Hero Image

    स्कूल के कर्मचारी से 15 लाख रुपये ठगे। प्रतीकात्मक तस्वीर

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। गाजियाबाद में साइबर अपराधियों ने एटीएस इंस्पेक्टर बनकर एक स्कूल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उससे 15.20 लाख रुपये ठग लिए।

    ठगों की धमकियों से डरा पीड़ित तीन अलग-अलग दिनों में बैंक पहुंचा और उनके बताए खातों में आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर करता रहा। मामले में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

    मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर फंसाया

    तुराबनगर निवासी 56 वर्षीय अर्जुन सिंह घंटाघर स्थित एक इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 30 मार्च को उनके पास एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस इंस्पेक्टर राजेंद्र त्रिपाठी बताते हुए कहा कि उनके नाम पर कर्नाटक में बैंक खाता खोलकर मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही है।

    ठगों ने पीड़ित को वीडियो कॉल भी की

    इसके बाद ठगों ने उन्हें वीडियो कॉल पर लिया और एटीएस का लोगो, आरबीआई के कथित दस्तावेज और सरकारी कागजात दिखाए। आरोपियों ने कहा कि जांच चल रही है और यदि सहयोग नहीं किया तो पूरे परिवार को कस्टडी में ले लिया जाएगा।

    साइबर अपराधी उन्हें घंटों वीडियो कॉल पर रखते थे और हर घंटे रिपोर्ट करने को कहते थे। डर और मानसिक दबाव में वह दो अप्रैल को बैंक पहुंचकर 2.20 लाख रुपये ट्रांसफर कर आए।

    साइबर ठग लगातार देते रहे धमकी

    इसके बाद चार अप्रैल को फिर तीन लाख रुपये जमा कराए। छह अप्रैल को ठगों ने उन्हें 10 लाख रुपये और जमा कराने के लिए मजबूर कर दिया। लगातार 10 दिन तक धमकियों और दबाव के बीच पीड़ित पूरी तरह सहम गया था।

    वहीं, 7 अप्रैल को जब ठगों ने फिर 10 लाख रुपये और जमा कराने की बात कही तो उन्होंने परिवार को पूरी घटना बताई। बेटे ने उन्हें समझाया कि वह साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। बाद में पीड़ित ने एनसीआरपी पोर्टल और जनसुनवाई पर शिकायत की। इसके बाद साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया है।

    खबरें और भी

    एसीपी क्राइम अमित सक्सेना का कहना है कि साइबर क्राइम थाना पुलिस खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है। शीघ्र आरोपियों का पता लगाकर गिरफ्तार किया जाएगा।