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    कार चोरी होने के बाद मालिक लगाता रहा क्‍लेम के लिए गुहार, अब आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को दिए पेंमेंट के निर्देश

    Updated: Fri, 11 Jul 2025 07:14 PM (IST)

    श्‍योरेंस करवाकर उपभोक्‍ता यह सोचता है क‍ि वह अब सुरक्ष‍ित है। उसकी सम्‍पत्ति की भी सुरक्षा हो गई है लेकिन कई बार इंश्‍योरेंस कंपनियां अपने उपभोक्‍ताओं का यह भरोसा तोड़ देते हैं। यह मामला भी कुछ ऐसा ही है। मगर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इस मामले में विश्‍वास पर खरी न उतरने वाली कंपनी को फटकारा है।

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    कार चोरी के मामले में इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम की धनराशि का 75 प्रतिशत देने का आदेश। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

    जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। इंश्‍योरेंस करवाकर उपभोक्‍ता यह सोचता है क‍ि वह अब सुरक्ष‍ित है। उसकी सम्‍पत्ति की भी सुरक्षा हो गई है लेकिन कई बार इंश्‍योरेंस कंपनियां अपने उपभोक्‍ताओं का यह भरोसा तोड़ देते हैं। यह मामला भी कुछ ऐसा ही है। मगर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इस मामले में विश्‍वास पर खरी न उतरने वाली कंपनी को फटकारा है। साथ ही, क्लेम की धनराशि का 75 प्रतिशत और पांच हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।

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    धनराशि का 75 प्रतिशत देने का आदेश

    दरअसल, कार चोरी के मामले में एक इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम की धनराशि नहीं दी तो उसके खिलाफ कार मालिक ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दाखिल किया।

    आयोग ने अब इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम की धनराशि का 75 प्रतिशत और पांच हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।

    इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, लोहिया नगर के पुनीत अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने रोहन माेटर्स से कार खरीदी थी, वह कार से हरिद्वार घूमने के लिए गए थे, तब छह अप्रैल 2003 को उनकी कार चोरी कर ली गई।

    हर‍िद्वार में हुई थी चोरी

    इस मामले में उन्होंने हरिद्वार में चोरी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। जिस वक्त कार चोरी की गई थी, उस वक्त कार का इंश्योरेंस था।

    कार चोरी होने की सूचना उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और कार को खरीदने के लिए लोन देने वाले आईसीआईसीआई बैंक काे दी।

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    क्लेम की धनराशि नहीं दी

    पुलिस ने इस मामले में जांच कर अंतिम रिपोर्ट भी कोर्ट में दाखिल कर दी। इसके बाद पीड़ित ने क्लेम की धनराशि के लिए बीमा कंपनी से संपर्क किया लेकिन उन्होंने क्लेम की धनराशि नहीं दी।

    इस मामले में पीड़ित ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दाखिल किया है।

    इस पर सुनवाई करते हुए आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को 1,43,689 रुपये और पांच हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।

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