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    अरुणा शानबाग की तड़प से हरीश राणा के हक तक, भारत में इच्छामृत्यु के कानून की वो कहानी; जो रूह कंपा देगी

    Updated: Thu, 12 Mar 2026 02:23 PM (IST)

    सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में भारत में परोक्ष इच्छामृत्यु को मंजूरी दी है। यह निर्णय हरीश राणा बनाम केंद्र सरकार मामले में आया, जो गरिमा ...और पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, गाजियाबाद। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसले में पहली बार देश में परोक्ष इच्छामृत्यु को मंजूरी दी है। कोर्ट का यह फैसला हरीश राणा बनाम केंद्र सरकार के मामले में आया है।

    इससे पहले भारत की अदालतों में इच्छामृत्यु की मांग वाले कई मामले आए लेकिन इच्छामृत्यु की इजाजत नहीं दी गई। इसके पीछे संविधान को एक अहम वजह बताया गया। आइये जानते हैं कि आखिर यह निष्क्रिय इच्छामृत्यु क्या है और पहली बार अदालत ने इसे कब मान्यता दी?

    2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार परोक्ष इच्छामृत्यु को दी मान्यता

    2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने गरिमा के साथ मरने के अधिकार को एक मौलिक अधिकार माना और इस अधिकार को लागू करने के लिए गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए गाइडलाइंस तय की।

    2023 में उच्चतम न्यायालय ने इन गाइडलाइंस में बदलाव किया ताकि गरिमा के साथ जीवन समाप्त करनरे का अधिकार आसानी से मिल सके। एनजीओ काॅमन काॅज की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पांच जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया था।

    तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण वाली संविधान पीठ ने यह माना कि गरिमा के साथ मरने का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का ही एक हिस्सा है।

    न्यायालय ने कहा कि जो मरीज किसी गंभीर बीमारी से जुझ रहे हैं व जीवन-रक्षक उपकरणों पर निर्भर हैं, उन्हें इलाज बंद करने या रुकवाने की इजाजत दी जा सकती है।

    Harish rana 1

    क्या है इच्छामृत्यु

    इच्छामृत्यु का मतलब है किसी असाध्य या लाइलाज बीमारी से जूझे रहे व्यक्ति व्यक्ति के जीवन को जानबूझ कर समाप्त करना। इस तरह की मृत्यु को मंजूरी देने का प्राथमिक उद्देश्य यही रखा गया था कि बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को असहनीय शारीरिक पीड़ा और कष्ट से मुक्ति मिल सके। इच्छामृत्यु को मुख्यतः दो तरह से बांटा जाता है। एक- प्रत्यक्ष इच्छामृत्यु और दूसरी परोक्ष इच्छामृत्यु ।

    परोक्ष इच्छामृत्यु

    वहीं, परोक्ष इच्छामृत्यु, जिसे पैसिव यूथेनेशिया कहते हैं, में मरीज के जीवन को लंबे समय तक बनाए रखने वाले जरूरी चिकित्सा उपचार को रोक दिया जाता है या हटा लिया जाता है। इसमें डाॅक्टर सक्रिय रूप से मरीज को मारते नहीं हैं, बल्कि वे जीवन बचाने वाले इलाज या प्रणालियों को रोक देते हैं।

    उदाहरण के लिए जीवन रक्षक प्रणालियों जैसे वेंटिलेटर, कृत्रिम तौर पर जिंदा रखने की तकनीक या दवाओं को हटा लेना, ताकि मरीज प्राकृतिक रूप से मृत्यु को प्राप्त कर सके।

    प्रत्यक्ष इच्छामृत्यु

    प्रत्यक्ष इच्छामृत्यु को एक्टिव यूथेनेशिया कहते हैं। इसमें मरीज की मृत्यु को संभव बनाने के लिए सीधे तौर पर कोई सक्रिय कदम उठाया जाता है।

    उदाहरण के लिए मरीज को कोई घातक पदार्थ या इंजेक्शन (जैसे सोडियम पेंटोथल) देना, जिससे व्यक्ति को कुछ ही सेकेंड में गहरी नींद आ जाए और नींद में ही दर्द रहित मृत्यु हो जाए ।

    अरुणा शानबाग मामले ने क्‍या हुआ था?

    अरुणा शानबाग मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल हाॅस्पिटल में नर्स थीं। 1973 में अस्पताल के कर्मचारी सोहनलान वाल्मीकि ने उन पर हमला किया, जिससे उनके मस्तिष्क को गंभीर क्षति हुई और वे कोमा जैसी अवस्था में चली गई। वे लगभग 42 वर्षों तक इसी हालत में जीवित रहीं।

    Aruna shanbagh

    2010 में पिंकी विरानी ने उनके लिए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। कोर्ट ने 2011 में फैसला दिया कि निष्क्रिय इच्छामृत्यु कुछ शर्तों के साथ अनुमति योग्य है, लेकिन अरुणा के मामले में अनुमति नहीं दी। उनकी मृत्यु 2015 में निमोनिया के कारण हुई। इस मामले ने भारत में परोक्ष इच्छामृत्यु को कानूनी आधार प्रदान किया।

    इन देशों में भी वैध है इच्छामृत्यु है

    • नीदरलैंड ने 2001 और बेल्जियम ने 2002 में स्पष्ट नियमों और दिशा-निर्देशों के साथ प्रत्यक्ष इच्छामृत्यु को कानूनी रूप से वैध किया है। बेल्जियम और लक्जमबर्ग (2010) ने यह अधिकार नाबालिगों को भी दिया है।
    • कनाडा ने 2016 में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग (एमएआईडी) कार्यक्रम शुरू किया था। इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 2024 में 15,300 से अधिक इच्छामृत्यु के मामले सामने आए हैं।
    • स्विट्जरलैंड में 1942 से ही सहायता प्राप्त आत्महत्या को कानूनी मान्यता प्राप्त है, जिसका संचालन डिग्निटास जैसी संस्थाएं करती हैं।
    • अमेरिका के ओरेगन राज्य ने 1997 में ही डेथ विद डिग्निटी एक्ट लागू कर दिया था। 2026 की स्थिति के अनुसार, अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में यह माडल मान्य है, जबकि 40 राज्यों में इस पर सख्त प्रतिबंध है।
    • जापान जीवन रक्षक प्रणालियों को हटाने यानी परोक्ष इच्छामृत्यु की अनुमति देता है।

    दुनिया में क्‍या है इच्‍छामृत्‍यु काननू?

    स्पेन (2021), आस्ट्रिया ( 2022), आस्ट्रेलिया (2017), न्यूजीलैंड ( 2021 में जनमत संग्रह द्वारा ), कोलंबिया (2014) और इक्वाडोर ( 2024 ) में भी सहायता प्राप्त मृत्यु के विभिन्न रूपों को कानूनी अनुमति मिली हुई है। जर्मनी में भी सहायता प्राप्त मृत्यु की अनुमति है।

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