गाजीपुर जिले में सरकारी स्कूलों में व्यवस्था ‘जर्जर’ होने से खतरे में नैनिहालों की जान
सरकारी स्कूलों में व्यवस्था ‘जर्जर’ होने से खतरे में नैनिहालों की जान बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर स्कूलों की बदहाली को दूर करने के लिए व्यवस्थागत दुश्वारियों को दूर करने की इच्छा शक्ति भी नजर नहीं आ रही है। फर्श टूट गए हैं और चहारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई है। बैठने को बेंच और बिजली तक नहीं है।

जागरण संवाददाता, गाजीपुर। एक ओर जहां स्कूली शिक्षा और सुविधा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें और घोषणाएं की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर जिले के परिषदीय विद्यालयों में आज भी बच्चे जर्जर भवन के नीचे पढ़ने को मजबूर हैंं। स्थिति ऐसी विकट है कि भवन की छत टूटकर नीचे फर्श पर गिर रही है। फर्श टूट गए हैं और चहारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई है। बैठने को बेंच और बिजली तक नहीं है।
विद्यालयों के ऊपर से मौत की लाइन गुजर रही है। इसके बावजूद छोटे-छोटे बच्चे इसी छत के नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। भगवान न करे अगर कोई जर्जर भवन धराशायी हो जाए, वरना राजस्थान जैसा बड़ा हादसा होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। जागरण टीम ने बुधवार के जनपद के चार स्कूलों की पड़ताल की गई तो हर जगह जर्जर भवन, टूटी खिड़कियां, टूटे फर्श मिले। प्रस्तुत है गाजीपुर से जागरण टीम की रिपोर्ट..
35 वर्ष पुरानी भवन में भविष्य संवार रहे नौनिहाल
सदर ब्लाक के बबेड़ी विद्यालय तो 1947 से संचालित हो रहा है, लेकिन उस समय भवन नहीं था। 1990 में नई भवन बने तो बच्चों को अच्छी शिक्षा की आस जगी। दूर-दराज से बच्चे पढ़ने आते रहे। मगर वर्तमान में विद्यालय का भवन जर्जर हो गया है। परिसर में जलजमाव से बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तीन भवन पूरी तरह जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। जिसे खाली कराकर दूसरे कमरों मेें बच्चों को शिक्षा दी जाती है, ताकि वे सुरक्षित रहें। वर्तमान में इस कंपोजिट विद्यालय में 237 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्रधानाध्यापक तारा श्रीवास्तव का कहना है कि जर्जर भवन की मरम्मत के लिए कई बार शिकायत दर्ज कराई गई है लेकिन आज तक उसकी मरम्मत नहीं की जा सकी। कक्षा आठ के छात्र विशाल का कहना है कि विद्यालय के एक भवन में बरसात के समय पानी टपकता है, जिससे पढ़ाई में बाधा उत्पन्न होती है।
जान हथेली पर लेकर प्राथमिक विद्यालय बबेड़ी द्वितीय में पढ़ते हैं बच्चे
मुख्य सड़क से करीब 500 मीटर दूर गांव में प्राथमिक विद्यालय द्वितीय संचालित होता है। इसका भवन करीब 1968 के आसपास बना है। वर्तमान में इस विद्यालय में 50 बच्चे पंजीकृत हैं। दो कमरा, एक कार्यालय बना है। दीवारें जर्जर हो गई हैं। प्लाटर टूटकर अचानक गिरता है तो बच्चे डर जाते हैं। दीवारों में दरारें होने के चलते हमेशा खतरा का अंदेशा बना रहता है। विद्यालय में सबसे बड़ी समस्या विद्युुत तार की है। गांव के लोग चहारदीवारी के पास से ही करीब दर्जन भर तार खींचकर ले गए हैं। तार खुला होने के चलते बच्चों को उधर जाने से हमेशा मना किया जाता है। अगर गलती से कोई बच्चा चला जाए तो उसकी जान जानी तय है। विद्यालय की प्रधानाध्यापक ललिता यादव का कहना है कि विद्युत तार हटाने व जर्जर भवन की मरम्मत के लिए तीन बार प्रार्थना पत्र दिया गया लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हो सकी। इस विद्यालय में पढ़ने वाली कक्षा पांच की छात्रा काजल का कहना है कि भवन की केवल रंगाई पोताई कर दिया गया है, जबकि यह काफी जर्जर है।
दस वर्षों से हो रहा पत्राचार, भवन की नहीं हुई मरम्मत
भांवरकोल : अंग्रेजी हुकूमत में वर्ष 1946 में निर्मित प्राथमिक विद्यालय कनुवान द्वितीय का भवन काफी जर्जर हो चुका है। विद्यालय की स्थिति बहुत ही खराब है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता रहता है तो नीचे फर्श पर जमा हो जाता है। विद्यालय में 75 बच्चे पंजीकृत हैं। लगभग 10 वर्षों से विद्यालय की मरम्मत के लिए पत्राचार हो रहा है, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई। कनुवान के अवधेश राजभर ने बताया कि उनका पुत्र बादल और पुत्री काजल प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते हैं। भवन जर्जर होने से हमेशा डर लगा रहता है। प्रधानाध्यापक प्रदीप राय का कहना है कि लगातार भवन निर्माण के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
जर्जर भवन होने से एक साथ बैठते हैं दो विद्यालयों के बच्चे
भांवरकोल ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय सियाडीह प्रथम व प्राथमिक विद्यालय सियाडीह द्वितीय की वर्ष 2021 में संयुक्त रूप से कंपोजिट विद्यालय का रूप मान्यता मिली। प्राथमिक विद्यालय सियाडीह द्वितीय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। हादसे की संभावना को देखते हुए दोनों विद्यालयों के 54 बच्चों को प्राथमिक विद्यालय सियाडीह प्रथम में अध्ययन के लिए बैठाया जाता है। छत जर्जर होने से बारिश का पानी हमेशा टपकता है। सबसे अधिक परेशानी तो पेयजल की है। यहां लगे दोनों हैंड पंप खराब हैं। प्रधानाध्यापक संजय कुमार पंकज ने बताया की इसकी सूचना विभाग को दी जा चुकी है।
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