यूपी के इस जिले में पुरुषों से आगे आधी आबादी, ढाई वर्षों में नौ ने कराई नसबंदी; जागरूकता अभियान पर उठ रहा सवाल
गोंडा जिले में परिवार नियोजन में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं। पिछले ढाई वर्षों में छह हजार से अधिक महिलाओं ने नसबंदी कराई जबकि केवल नौ पुरुषों ने ही नसबंदी करवाई। स्वास्थ्य विभाग जागरूकता अभियान चलाने का दावा कर रहा है लेकिन पुरुष नसबंदी में रुचि नहीं ले रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी से आसान है।

जागरण संवाददाता, गोंडा। नसबंदी को लेकर पुरुष पोस्टर ब्वाय बनकर रह गए हैं, जबकि परिवार नियोजन में महिलाएं काफी आगे निकल रही हैं। जनपद में पुरुष न के बराबर नसबंदी करा रहे है।
बीते ढाई वर्षों के आंकड़े पर गौर करें तो सिर्फ नौ पुरुषों ने ही नसबंदी कराई है जबकि, इन्हीं वर्षों में छह हजार से अधिक महिलाएं नसबंदी करा चुकी हैं। इस वर्ष अभी तक एक भी पुरुष नसबंदी नहीं की जा सकी है।
यह हाल तक है जब स्वास्थ्य विभाग जागरूकता अभियान चलाने का दावा कर रहा है लेकिन, इसका असर धरातल पर नहीं दिख रहा है।
वर्ष 2023 में तीन हजार 371 महिलाओं ने नसबंदी कराई थी जबकि तीन पुरुष की ही नसबंदी की जा सकी। वर्ष 2024 में दो हजार 542 महिलाओं की नसबंदी कराई है इसके सापेक्ष पांच पुरुषों ने ही नसबंदी कराई। चालू सत्र के दो माह में 150 महिलाओं ने नसबंदी कराई है जबकि एक पुरुष की ही नसबंदी की जा सकी है।
आसान व सरल है पुरुष नसबंदी
विशेषज्ञ बताते हैं कि महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी आसान व सरल है, इसमें जटिलता की गुंजाइश भी कम है। पुरुष के जनन अंग बाहर होते हैं, इसलिए यह आसान रहता है।
नसबंदी होने के कम से कम तीन महीने तक परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों का प्रयोग करना चाहिए। जब तक शुक्राणु पूरे प्रजनन तंत्र से खत्म न हो जाएं।
नसबंदी के तीन महीने के बाद वीर्य की जांच करानी चाहिए। जांच में शुक्राणु न पाए जाने की दशा में ही नसबंदी को सफल माना जाता है। पुरुष नसबंदी से शारीरिक कमजोरी की भ्रांति को भी विशेषज्ञ खारिज करते हैं।
नसबंदी पर मिलता है 3000 रुपये
पुरुष नसबंदी करवाने पर लाभार्थी को तीन हजार रुपये खाते में दिए जाते हैं। पुरुष नसबंदी के लिए चार योग्यताएं प्रमुख हैं। पुरुष विवाहित होना चाहिए। उसकी आयु 60 वर्ष या उससे कम हो और दंपती के पास कम से कम एक बच्चा हो जिसकी उम्र एक वर्ष से अधिक हो।
पति या पत्नी में से किसी एक की ही नसबंदी होती है। इसके अलावा आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरक की भूमिका निभाती हैं। उन्हें भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। महिला नसबंदी पर दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
पुरुष वर्ग नसबंदी में दिलचस्पी नहीं ले रहा है। उनमें कई तरह के भ्रम हैं इसको लेकर पुरुष नसबंदी के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाता है। टीम बनाकर लोगों काे प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि पुरुष नसबंदी बढ़ सके।
-सलाहुद्दीन लारी, जिला परिवार नियोजन प्रबंधक
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।