गोरखपुर में आतंकियों से संबंध होने की धमकी देकर डॉक्टर को किया Digital Arrest, वाट्सएप पर भेजा वारंट
गोरखपुर के सहजनवां में साइबर अपराधियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डा. व्यास कुशवाहा को एटीएस अधिकारी बनकर धमकाया और डिजिटल अरेस्ट कर लिया। उन्होंने आतंकवादी कनेक्शन का आरोप लगाते हुए ब्लैकमेल करने की कोशिश की। एसपी क्राइम ने इसे साइबर ठगी बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

जागरण संवाददाता, सहजनवां (गोरखपुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहजनवां के अधीक्षक डा. व्यास कुशवाहा को साइबर अपराधियों ने फोन कर आतंकवादियों से जुड़ने की जानकारी देकर धमकाने के साथ ही डिजिटल अरेस्ट कर लिया। ठग ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर कहा कि पाकिस्तानी आतंकी ने पूछताछ में उनका नाम लिया है।
इसके बाद वाट्सएप पर अरेस्ट वारंट भेजकर गिरफ्तारी की धमकी दी गई।फोन पर उलझाकर ब्लैकमेल करने का प्रयास हुआ। मामले की जानकारी अधीक्षक ने एसपी क्राइम को दी तो उन्होंने साइबर अपराधियों का चाल होने की जानकारी दी। इसके बाद डा. व्यास ने फोन काटने के साथ ही सहजनवां थाना पुलिस को तहरीर दी।
घटना शुक्रवार दोपहर की है। डाॅ. व्यास कुशवाहा के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से काल आया।दूसरी तरफ से बात करने कहा कि एटीएस दिल्ली से राजीव यादव बोल रहा हूं।गोरखपुर से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान को दी गई हैं।
हिरासत में लिए गए आतंकी आसिफ फौजी ने पूछताछ में आपका नाम बताया है। इतना ही नहीं, काॅलर ने चार गिरफ्तारी वारंट वाट्सएप पर भेज दिए और धमकी दी कि तुरंत गिरफ्तारी की कार्रवाई होगी।करीब 45 मिनट तक उसने डाॅक्टर को फोन पर उलझाए रखा।
कभी वह गोरखपुर एटीएस का हवाला देता, तो कभी स्थानीय भू-माफिया संजीव सिंह और राजेश सिंह से सांठगांठ का आरोप लगाता। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ाते हुए उसने पैन कार्ड मंगवा लिया और फिर बैंक खाता नंबर की मांग शुरू कर दी।
डॉक्टर घबरा गए, इस दौरान उनके कमरे के बाहर कुछ कर्मचारी भी इकट्ठा हो गए। जब हालात गंभीर हुए तो अधीक्षक ने अपने सहयोगियों के साथ ही एसपी क्राइम को बताया। साइबर थाना पुलिस मामला तुरंत समझा गई उसने डॉक्टर को तुरंत फोन काटने की सलाह दी।
इसके साथ ही स्पष्ट हो गया कि यह कोई एटीएस की कार्रवाई नहीं बल्कि संगठित साइबर ठगी का हिस्सा है। इसके बाद अधीक्षक ने सहजनवां थाने में तहरीर दी और साइबर थाने में भी आनलाइन शिकायत दर्ज कराई।सहजनवां थाना पुलिस काल रिकार्ड के बारे में जानकारी जुटा रही है।
एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि कालर पेशेवर साइबर ठग हैं, जो सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को आतंकवाद और मनी लान्ड्रिंग में फंसाने का डर दिखाकर ब्लैकमेल करते हैं।आमजन से अपील है कि किसी भी संदिग्ध काल या संदेश पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने को सूचना दें।
ऐसे काम करता है साइबर ठग गिरोह
- खुद को एटीएस, एनआइए या सीबीआइ का अधिकारी बताकर फोन करते हैं।
- आतंकवादियों से कनेक्शन होने, हवाला या मनी लान्ड्रिंग का आरोप लगाते हैं।
- वाट्सएप पर फर्जी अरेस्ट वारंट या नोटिस भेजते हैं।
- पहले पैन, आधार जैसी पहचान पत्र मांगते हैं, फिर बैंक अकाउंट डिटेल।
- गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी देकर पीड़ित को मानसिक दबाव में डालते हैं।
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इंजीनियर के खाते से 2.50 लाख निकाले,पुलिस ने वापस कराया
अमेरिका में रहने कार्यरत इंजीनियर को झांसा देकर साइबर अपराधियों ने खाते से 2.50 लाख रुपये निकाल लिए।शिकायत पर जांच में जुटी साइबर थाना पुलिस ने 2.02 लाख रुपये वापस कराए।
बशारतपुर में रहने वाले पीड़ित ने साइबर थाना पुलिस को ईमेल भेजकर बताया कि वह अमेरिका में इंजीनियर हैं। 15 अगस्त 2025 को उनके पास एचडीएफसी बैंक का लोगो लगाकर एक वाट्सएप संदेश भेजा गया। संदेश में लिंक के जरिये बैंक से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने का दबाव बनाया गया।
भरोसा करके उन्होंने लिंक पर क्लिक किया तो एपीके फाइल डाउनलोड हो इसके बाद मोबाइल फोन का नियंत्रण ठगों के पास चला गया और कुछ ही मिनटों में खाते से 2.50 लाख रुपये निकाल लिए गए।
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