Interview: शानदार सैलरी पैकेज के साथ हुआ MMUT गोरखपुर में रिकार्ड प्लेसमेंट, शोध पर रहा विशेष जाेर
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयप्रकाश सैनी ने अपने दो साल के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में कई शैक्षणिक परिवर्तन किए हैं। नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों को बहुआयामी बनाया गया है और शोध पर विशेष ध्यान दिया गया है। परिसर में नए निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं और विश्वविद्यालय की रैंकिंग को सुधारने पर जोर दिया जा रहा है।

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयप्रकाश सैनी बतौर कुलपति दो वर्ष का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर मेंं अध्ययन-अध्यापन और शोध का बेहतर बनाने के लिए उन्होंने कौन-कौन से प्रयास किए हैं और उसके क्या परिणाम सामने आए हैं? कार्यकाल पूरा होने तक किन कार्यों को पूरा करने पर उनका जोर रहेगा? इसे लेकर जागरण ने जब उनसे बातचीत की तो उन्होंने हर सवाल का तथ्यपरक जवाब दिया। अपनी आगामी कार्ययोजनाएं भी बताईं। प्रस्तुत है वरिष्ठ संवाददाता डा. राकेश राय से बातचीत के प्रमुख अंश...
सवाल : बतौर कुलपति आपके कार्यकाल के दो वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस दौरान आप विश्वविद्यालय की व्यवस्था में कितना अकादमिक परिवर्तन ला पाए हैं?
कुलपति : विश्वविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन व शोध का बेहतर वातावरण बनाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं लाई गई हैं। 95 शिक्षकों की एक साथ नियुक्ति होने से छात्र-शिक्षक अनुपात सुधर गया है। इसका परिणाम एनआरआएएफ व क्यूएस सहित तमाम राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में विश्वविद्यालय की रैंक सुधरने के रूप में देखा जा सकता है। बड़ी-बड़ी कंपनियों में शानदार सैलरी पैकेज के साथ विद्यार्थियों का रिकार्ड प्लेसमेंट हुआ है।
सवाल : एनईपी के क्रियान्वयन की दिशा में आपने दो साल में कौन-कौन से प्रयास किए?
कुलपति : स्नातक के सभी पाठ्यक्रमों को चार वर्षीय कर दिया गया है। इंडियन नालेज सिस्टम का अलग विभाग बनाया गया है। मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एक्जिट व्यवस्था सुचारु रूप से लागू कर दी गई है। दोहरी डिग्री व्यवस्था को भी प्रभावी किया गया है। कौशल विकास के पाठ्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इंटर्नशिप व्यवस्था शुरू की गई है। विद्यार्थी उद्योग जगत के मानक पर खरा उतरें, इसके लिए प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस, विशेषज्ञ प्रोफेसर व फारेन फैकेल्टी की तैनाती की गई है।
सवाल : पाठ्यक्रमों को बहुआयामी बनाने के लिए आपने कौन से उपयोगी प्रयोग किए। कौन-कौन सी योजनाएं पाइप लाइन में है?
कुलपति : बीटेक पाठ्यक्रम को बहुआयामी बनाने के लिए 32 माइनर कोर्स शुरू किए गए हैं। नए सत्र में इसका लाभ विद्यार्थियों को मिलने लगेगा। इस प्रयोग का प्रभाव विद्यार्थियों के बेहतर प्लेसमेंट में भी दिखाई पड़ेगा। चार वर्षीय बीएड, एमएमबीएस, पांच वर्षीय बीबीए-एलएलबी पाठ्यक्रम शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। सभी परंपरागत पाठ्यक्रम को उद्योग जगत की दृष्टि से अपडेट किया गया है।
सवाल : आजकल शोध पर बहुत जोर है? इसके लिए आपने क्या-क्या प्रयास किए? कितनी सफलता मिली?
कुलपति : 15 करोड़ रुपये की लागत से प्रयोगशालाओं को उच्चीकृत किया गया है। साइबर फारेंसिक, एआइ, स्पेस तकनीक और बीएलएसआइ की नई प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। रिसर्च इंसेंटिव स्कीम लागू की गई है। शोध की व्यापकता के लिए एक से अधिक विभागों को जुड़ने का अवसर दिया गया है। रिसर्च फेलोशिप को प्रति शोधार्थी 12 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया गया है। इसी का परिणाम है कि इस वर्ष 139 विद्यार्थियों ने पीएचडी में प्रवेश लिया है। रिसर्च पब्लिकेशन अवार्ड शुरू किया गया है। इसके तहत शोधार्थी को 20 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। बीते अकादमिक सत्र मेंं इसके लिए विश्वविद्यालय ने करीब 27 लाख रुपये खर्च किए हैं।
सवाल : परिसर में अध्ययन-अध्यापन का माहौल बेहतर करने के लिए निर्माण के क्षेत्र में आप क्या-क्या कर पाए? क्या करना बाकी है?
कुलपति : तीन पुराने हास्टल का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। छात्रों के लिए 528 बेड और छात्राओं के लिए 144 बेड के सर्वसुविधा सम्पन्न एसी हास्टल के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। नया फार्मेसी व परीक्षा भवन बनवाया जा रहा है। आइटी, इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल विभाग काे विस्तारित किया गया है। परिसर में करीब पांच किलोमीटर सड़क का जीर्णोद्धार व निर्माण कराया गया है। अर्द्धनिर्मित प्रेक्षागृह को पूरा कराया जा रहा है।
यह भी पढ़ें- MMUT का 10वां दीक्षा समारोह: गले में पड़ा पदक तो चमक उठी मेधा, 19 टॉपरों को मिला 45 स्वर्ण पदक
सवाल : अंत में किस कार्य पर वर्तमान में आपका फोकस है, जिसे कार्यकाल पूरा करने से पहले हर हाल में सम्पन्न करना चाहेंगे?
कुलपति : जिन नए पाठ्यक्रमों को शुरू करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया गया है, उन्हें जल्द से जल्द धरातल पर लाना है। चल रहे निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराना है। विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग चढ़ाना है।परिसर को अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।