Hardoi News: दो पुर्जों की मरम्मत पर 55 लाख रुपये खर्च, पांच दिन से सीटी स्कैन-एक्स-रे मशीन फिर ठप
हरदोई मेडिकल कॉलेज में सीटी-स्कैन और डिजिटल एक्स-रे मशीनें बार-बार खराब हो रही हैं जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। मरम्मत पर 55 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी मशीनें फिर से बंद हो गईं हैं। कंपनी के इंजीनियर समस्या का समाधान नहीं कर पा रहे हैं और मरीजों को बाहर से महंगे दामों पर जांच करवानी पड़ रही है।

जागरण संवाददाता, हरदोई। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वर्षों पुरानी मशीनों की मर्ज ठीक नहीं हो पा रही है। सीटी-स्कैन, डिजिटल एक्स-रे मशीनों की मरम्मत के बाद बार-बार सांस उखड़ रहीं हैं।
15 दिन पहले दोनाें मशीनों में दो पुर्जों पर 55 लाख रुपये खर्च हो गए। पांच दिन पहले दोनों मशीनें फिर बंद हो गईं। कंपनी के इंजीनियर आए सीटी स्कैन मशीन का डाटा लेकर चले गए। कंपनी के जिम्मेदार सिर्फ तारीख दे रहे हैं।
मशीनों की मरम्मत न होने से मरीजों को परेशानियों को सामना करना पड़ रहा हैं। वहीं अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन पुरानी मशीनों की मरम्मत में रुपये खर्च करने में हाथ खींचता नजर आ रहा है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पीपीपी ( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत सीटी स्कैन मशीन, डिजिटल एक्स-रे मशीनें स्थापित कराई गईं थीं। एक्स-रे मशीन को 10 वर्ष और सीटी स्कैन सात वर्ष हो चुके हैं। दोनों मशीनें सही से काम नहीं कर पा रहीं हैं।
आए दिन मरीजों को एक्स-रे ,सीटी स्कैन के लिए परेशान होना पड़ रहा है। डिजिटल एक्स-रे मशीन एक वर्ष पहले से खराब हो गई थी, जबकि सीटी स्कैन मशीन ने दो माह पहले पिक्चर ट्यूब फुंकने से काम करना बंद कर दिया था।
डीएम के हस्तक्षेप के बाद 13 दिन कंपनी ने दोनों मशीनों में दो पुर्जे पड़े थे,जिसमें 55 लाख रुपये का खर्च आया था। 13 दिन भी दोनों मशीनें चली से नहीं चली और खराब हो गईं।
दोनों मशीनें एक साथ बंद होने से करीब तीन मरीज जांच के लिए परेशान हैं। जरूरत पर मरीजों को बाहर से 2500-3000 रुपये खर्च कर सीटी स्कैन जांच करानी पड़ रही है। जबकि पोर्टेबल मशीन से एक्स-रे कर सिर्फ काम चलाया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कंपनी को पत्र भेजा। दो दिन पहले कंपनी के इंजीनियर आए मशीन देखी। मरम्मत नहीं कर पाए और डाटा लेकर चले गए।
दोनों मशीनें 10 और 15 वर्ष पुरानी हो चुकीं हैं। मशीनों की मरम्मत में लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मशीनें सही एक काम नहीं कर रहीं हैं। अब मशीनों की मरम्मत में रुपया खर्च करने से कोई फायदा नहीं है। संंबंधित कंपनी मरम्मत करे या फिर नई मशीनें लगाएं। हालांकि एक्स-रे की मरम्मत के लिए कंपनी ने इंजीनियर भेजा है। संभवत: एक-दो दिन में मशीन चालू हो जाएगी।
-डाॅ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, हरदोई
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