कानपुर में देशभर से आए 500 से ज्यादा आए हृदय रोग विशेषज्ञ, साइलेंट हार्ट अटैक के लिए किया अलर्ट
कानपुर कार्डियोलाजी समिट में देशभर से आए 500 से ज्यादा हृदय रोग विशेषज्ञ पहुंचे। उन्होंने हार्ट अटैक के बदलते स्वरूप पर मंथन किया। उन्होंने बताया कि बीपी और मधुमेह साइलेंट हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा देते हैं। चलने में सांस फूलना और घबराहट होना इसका मुख्य लक्षण है। मोटे अनाज से दोस्ती और जंक फूड से दूरी बनाकर दिल को सुरक्षित रख सकते हैं।

जागरण संवाददाता, कानपुर। विदेशियों की तुलना में भारतीय में हृदय रोग की औसत आयु 10 वर्ष कम हो गई है। विदेश में रहने वालों में हार्ट अटैक करीब 50 या उससे अधिक उम्र में होने का खतरा बना रहता है। जबकि भारतीय लोगों में यह खतरा उनकी असंतुलित जीवनशैली और खान-पान के कारण 40 वर्ष तक हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण बढ़ता हुआ उच्च रक्तचाप यानी बीपी, मोटापा है। जो शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा को बढ़ा देता है और हार्ट अटैक के साथ स्ट्रोक, किडनी और हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है। यह बातें कार्डियोलाजी सोसाइटी आफ इंडिया के अध्यक्ष डा. संजय त्यागी ने कही।
उन्होंने कहा कि आजकल अचानक खेलते, जिम, डांस और अन्य काम करते हुए हार्ट अटैक के मामले देखने को मिल रहे हैं। यह साइलेंट हार्ट अटैक के कारण हो रहा है। इस प्रकार की समस्या उन लोगों में होती है, जो समय-समय पर मुख्य लक्षण जैसे चलने में सांस फूलना घबराहट, भारीपन, अपच जैसी स्थिति बनना, पसीना आना, अचानक उलझन बीपी, कोलेस्ट्राल, मोटापा और अन्य लक्षणों की अनदेखी करते हैं।
रविवार को कैंट स्थित स्टेट्स क्लब में कानपुर कार्डियोलाजी समिट (Kanpur Cardiology Summit) में देशभर से करीब 500 हृदय रोग विशेषज्ञ, हार्ट अटैक के बदलते स्वरूप पर मंथन किया। पहली बार हुई समिट में मुख्य अतिथि डा. संजय त्यागी, संस्थान के निदेशक प्रो. राकेश वर्मा, विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश्वर पांडेय, प्रो. अवधेश कुमार शर्मा और डा. अमित गुप्ता ने शहर के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और संस्थान के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. एसएस सिंघल को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।
डा. त्यागी ने कहा कि देश में हर चौथा व्यक्ति बीपी की समस्या से ग्रसित है। जो अनदेखी करने पर हृदय रोग का कारण बन रहा है। इसके नियंत्रित करने के लिए खान-पान के साथ लाइफ स्टाइल सुधारनी होगी। डायबिटिक रोगियों में ज्यादा रोग का खतरा अन्य रोगियों की तुलना में सर्वाधिक रहता है। साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा डायबिटिक, मोटापा, बीपी और स्मोकिंग करने वालों में हमेशा बना रहता है। उन्होंने कहा कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ में ट्रांस फैट की मात्रा रहती है। यह ट्रांस फैट बार-बार एक ही तेल को गर्म करने से बनता है। जो आर्टरी में जाकर ब्लाकेज का कारण बनता है।
गले की खरास और जोड़ाें के दर्द को न करें अनदेखा
वाराणसी से आए डा. अजय पांडेय ने कहा कि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, थकान, पांव में सूजन, धड़कन का अनियमित होने से रूमेटिक हृदय रोग का खतरा बना रहता है। गर्भावस्था में महिला को अगर इस प्रकार की समस्या हो रही है, तो उसे तुरंत विशेषज्ञ की सलाह पर इलाज करना चाहिए। इसकी अनदेखी करने से यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी खतरनाक हो सकती है।
वहीं, लखनऊ के डा. प्रवेश विश्वकर्मा ने कहा कि हार्ट अटैक के मरीज को दवा और इलाज के बाद भी बार-बार भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है, तो यह वर्सिंग हार्ट डिसीज है। जो हृदय फेलियर का कारण बनता है। इससे बचाव के लिए खान-पान और दिनचर्या को बेहतर करना चाहिए। समिट में शामिल दिल्ली के डा. जेडएस मेहरबाल ने एडवांस सर्जिकल ट्रीटमेंट और हृदय की विफलता होने पर आर्टिफिशियल हार्ट यानी लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस के प्रयोग के बारे में बताया। जो हृदय ट्रांसप्लांट का विकल्प बन रहा है।
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