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    डॉक्टर, दलाल, अस्पताल...पूरा नेटवर्क बेनकाब! Kanpur किडनी कांड के ये 9 गुनाहगार चेहरे

    By Ankur SrivastavaEdited By: Anurag Shukla
    Updated: Thu, 09 Apr 2026 12:01 AM (IST)

    कानपुर किडनी कांड ने मेडिकल सिस्टम को हिला दिया है। पुलिस ने अब तक 9 प्रमुख चेहरों की पहचान कर 9 को गिरफ्तार किया है, जबकि 8 फरार हैं। ...और पढ़ें

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    ये फोटो एआई से जनरेटेड हैं।

    अंकुर श्रीवास्तव, कानपुर। कानपुर में बहुचर्चित किडनी कांड ने पूरे मेडिकल सिस्टम को हिला दिया है। डॉक्टर, दलाल, अस्पताल संचालक और ओटी स्टाफ की ऐसी खौफनाक सांठगांठ उजागर हुई है जिसने मेडिकल सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह नेटवर्क कानपुर से लेकर लखनऊ, दिल्ली और गाजियाबाद तक फैला था, जहां पैसों के लिए मानव अंगों का खेल खेला जा रहा था। अब तक इस रैकेट के 9 बड़े चेहरों की पहचान हो चुकी है—पढ़िए, कौन हैं वो लोग जिन्होंने किडनी कांड से कानपुर को पूरे देश में शर्मसार कर दिया।

    किडनी खरीदने और अवैध ढंग से ट्रांसप्लांट करने के मामले में अब तक जो भी आरोपितों के नाम सामने आए हैं, उनका पेशा तो लोगों की जान बचाना था। लेकिन रुपयों की हवस में इसका दुरुपयोग कर इस पेशे को ही कलंकित कर दिया। आरोपितों के जो किरदार सामने आए हैं। उसमें कोई खुद को डाक्टर, ओटी मैनेजर, ओटी इंचार्ज, अस्पताल संचालक तो कोई कार चालक और दलाल या फिर मार्केटिंग एजेंट बताता है। इस पूरे प्रकरण में पुलिस अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि आठ आरोपित अब भी घर से भागे हुए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगी हैं।

    Kidny Case

    किडनी कांड में पकड़े गए आरोपित (दाएं से) डा. प्रीति आहूजा, डा. सुरजीत सिंह आहूजा, शिवम अग्रवाल, डा. राजेश कुमार, डा. नरेन्द्र सिंह और डा. राम प्रकाश। जागरण

    किडनीकांड का मास्टरमाइंड डा. रोहित

    Rohit Kanpur Kidany Case


    गाजियाबाद के इंदिरापुरम न्यायखंड-1 के एक फ्लैट में रहने वाला डा. रोहित किडनीकांड का मास्टर माइंड है। किडनी ट्रांसप्लांट किस अस्पताल में होना है और कौन सी टीम कहां भेजनी है डा. रोहित तय करता है। फिलहाल रोहित भागा हुआ है।पकड़े गए आरोपित दलाल शिवम का कहना था कि किडनी ट्रांसप्लांट में जितनी भी रकम मिलती थी। उसमें सबसे ज्यादा हिस्सा रोहित के पास जाता था।

    किडनी बेचने वालों को तलाशना व ओटी टीम में रहता था डा. अफजाल अहमद

    Dr Afjaal Kidny


    मेरठ का रहने वाला डा. अफजाल अहमद का क्षेत्र में एक क्लीनिक है। उसने क्लीनिक के बोर्ड में जनरल फिजिशियन डीयूएम लिखवा रखा है। अफजाल डा. रोहित के गिरोह से जुड़कर किडनी बेचने व खरीदने वालों को टेलीग्राम ग्रुप पर जुड़े लोगों को मैसेज कर तलाशता था। उन्हें लाखों रुपये दिलाने की बात कहकर अपने जाल में फंसाता था। इसके अलावा वह ट्रांसप्लांट के दौरान ओटी टीम में भी रहता था। पुलिस का दावा है कि पारुल के किडनी ट्रांसप्लांट में डा. अफजाल को 22 लाख मिले थे।

     

    दांतों के डाक्टर वैभव मुद्गल, ठेका किडनी ट्रांसप्लांट का

    Dr Vaibhav Kidny

    मेरठ के शास्त्रीनगर की सेंट्रल मार्केट निवासी डा. वैभव मुद्गल डेंटल सर्जन बताए जा रहे हैं, लेकिन किडनी खरीदने व बेचने और ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह से वह भी जुड़ा है। डा. वैभव, अफलाल अहमद का साथी है। वैभव भी घर से भागा हुआ है।

     

    मेरठ के अल्फा अस्पताल का संचालक फिजियोथेरेपिस्ट है अमित

    Dr AMit Kanpur Kidany Case

    किडनीकांड का आरोपित अमित कुमार मूलरूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। वह फिजियोथेरेपिस्ट है। वर्ष 2022 में उसने कुछ लोगों के साथ मिलकर अल्फा अस्पताल खोला था। इसके बाद उस अस्पताल में अफजाल भी आना-जाना होने लगा। अमित के जरिए ही किडनी खरीदने-बेचने वाले की मजांच उस अस्पताल के माध्यम से पैथोलाजी में करवाई जाती थी, जिससे किसी को शक न हो सके। अमित ने दो शादी की हैं।

    किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए अस्पताल की व्यवस्था और सौदा कराने वाला दलाल शिवम

    Shivam Agrawal Kidany

    मूलरूप से जालौन का रहने वाला शिवम अग्रवाल आठवीं पास है और पहले एंबुलेंस चलाता था। यहां वह कल्याणपुर आवास विकास के पास रहता था। शिवम डा. रोहित से जुड़ा था और जब शहर में किडनी ट्रांसप्लांट होना होता था तो डा. रोहित की एक काल पर उसे अस्पतालों की सूची भेज देता था। रोहित उस सूची से अस्पताल फाइनल करता था, जिसके बाद किडनी ट्रांसप्लांट उसी अस्पताल में होता था। पारुल के किडनी ट्रांसप्लांट के लिए शिवम ने ही आहूजा अस्पताल उपलब्ध कराया था। फिलहाल वह अभी जेल में है। पुलिस जल्द उसका कस्टडी रिमांड लेगी।

    अस्पताल संचालक आइएमए कानपुर की उपाध्यक्ष डा. प्रीति

    dr preeti ahuja Kidany

    काकादेव नवीन नगर निवासी डा. प्रीति आइएमए कानपुर की उपाध्यक्ष हैं और केशवपुरम में आहूजा अस्पताल है। वह किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह के संपर्क में थीं और अपना अस्पताल इस किडनी के काले कारोबार के लिए उपलब्ध कराती थीं। मुजफ्फनगर की पारुल का इन्हीं के अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

    डा. प्रीति का पति डा. सुरजीत आहूजा भी काले कारोबार से जुड़े

    Dr Surjeet Kanpur Kidany Case

    डा. सुरजीत डा. प्रीति के पति हैं और किडनी कांड के आरोपितों के गिरोह से जुड़े थे। डा. प्रीति व सुरजीत दोनों ही अपने अस्पताल का आपरेशन थिएटर कुछ रुपयों की लालच में अवैध ढंग से किए जा रहे किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उपलब्ध कराते थे। वह भी जेल भेजे गए हैं।

    आरोही अस्पताल का संचालक था राजेश, सील होने के बाद मेडलाइफ का बना साझेदार

    Rajesh Kanpur Kidany Case

    पुलिस की जांच में पहले राम प्रकाश और राजेश दोनों आरोही अस्पताल संचालित करते थे। हालांकि बाद में राम प्रकाश ने भी अपना मेडलाइफ अस्पताल खोल लिया। आराेही अस्पताल में अनैतिक कार्याें की मकान मालिक की शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई और फिर स्वास्थ्य विभाग ने फरवरी 2026 में ही अस्पताल सील कर दिया। इसके बाद राजेश और राम प्रकाश मेडलाइफ अस्पताल संचालित करने लगे। वह भी जेल में है।

    राम प्रकाश मानक के विपरीत चला रहा था मेडलाइफ अस्पताल

    Ramprakash Kanpur Kidany Case

    कल्याणपुर का राम प्रकाश मेडलाइफ अस्पताल संचालित कर रहा था। अस्पताल में कोई मानक नहीं है, लेकिन फिर भी स्वास्थ्य विभाग की आंखों में धूल झोककर संचालित कर रहा था। किडनी बेचने वाले आयुष को पारुल के किडनी ट्रांसप्लांट के बाद उसे इसी मेडलाइफ में भर्ती कराया गया था। फिलहाल राम प्रकाश जेल में है।

    किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह से जुड़ा नरेंद्र सिंह

    Narendra Kanpur Kidany Case

    प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह उर्फ नंदू भी किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह से जुड़ा है। वह भी किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को अपने अस्पताल में अवैध तरह से भर्ती कराता था। पुलिस ने उसे भी जेल भेजा है।

    ओटी मैनेजर व ओटी इंचार्ज भी जुड़े किडनी ट्रांसप्लांट के गिरोह से

    Rajesh Kuldeep Kanpur Kidany Case

    गाजियाबाद का रहने वाला राजेश कुमार नोएडा के सर्वोदय हास्पिटल में ओटी मैनेजर था और किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान ओटी टीम के साथ रहता था। उसे हर केस के बाद उसे 50 हजार रुपये व हवाई जहाज का टिकट उपलब्ध कराया जाता था। इसी तरह हापुड़ के तिरंगवा निवासी कुलदीप सिंह राघव शांतिगोपाल हास्पिटल में ओटी इंचार्ज था। वह भी राजेश के साथ किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली टीम के साथ रहता था। उसने भी 50 हजार रुपये व हवाई हजार की टिकट मिलती थी।

    ठग कहें, सर्जन या ओटी टेक्नीशियन

    Kanpur kidney case Ayush

     

    इस गिरोह में एक आरोपित का किरदार सबसे अलग है। वह है अली का। पहले उसे किडनी बेचने वाले आयुष ने साइबर ठग बताया। कहा कि किडनी डोनर्स नाम के टेलीग्राम ग्रुप से अली ने ही उसे जुड़वाया और इसके बाद एक खाता दिल्ली में खुलवाने पर 20 हजा रुपये मिलेंगे। रुपये नहीं दिए, पर किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए उसकी किडनी बिकवा दी। बाद में जांच हुई तो वह ओटी टेक्नीशियन निकला। उसका पूरा नाम मुद्दसर अली सिद्दकी है। उसकी तलाश जारी है।

    किडनीकांड का राजदार है कार चालक परवेज सैफी

    Parwej  Kanpur Kidany Case

    किडनीकांड का बड़ा राजदार मेरठ का कार चालक परवेज सैफी है। उसके खिलाफ मेरठ, बागपत के थानों में लूट, हत्या के प्रयास और गाजियाबाद में डकैती की धाराओं में मुकदमा दर्ज है, जिसमें वह ढाई साल जेल में भी रहा था। जमानत पर छूटने के बाद एक ट्रैवल एजेंसी के जरिए इस गिरोह के संपर्क में आ गया और उनके कहने पर किडनी खरीदने-बेचने वाले व मरीजों को लेकर आने-जाने लगा। आयुष और पारुल को भी वही लेकर आया था। मंगलवार रात पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी रावतपुर क्षेत्र से दिखाई है।

    एनसीआर में अस्पताल उपलब्ध कराता था प्रयागराज का दलाल नवीन

    पुलिस की जांच में किडनीकांड गिरोह से जुड़ा प्रयागराज का नवीन पांडेय का नाम भी आया है। जिस तरह से शिवम शहर में डा. रोहित के लिए ट्रांसप्लांट के केस के लिए अस्पताल मुहैया करवाता था। उसी तरह से नवीन पांडेय एनसीआर के अस्पताल उपलब्ध कराता था। नवीन और शिवम केे बीच बातचीत की कई रिर्काडिंग मिली है। शिवम ने जब दिसंबर 2025 में महिला की किडनी ट्रांसप्लांट के बाद हालत बिगड़ी तो उसे नवीन के कहने पर ही दिल्ली के बड़े अस्पताल भेजा था, जहां नवीन ने उसे बिना पर्चे व फाइल तैया करवाए भर्ती करा दिया था, लेकिन कुछ देर में उसकी मौत हो गई थी।

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    मेडीलाइफ के तीन संचालक व एलएलआर अस्पताल का वार्ड ब्वाय भी जांच के घेरे में

    पुलिस की जांच में मेडीलाइफ अस्पताल के तीन साझेदार संचालक कन्नौज के तिर्वा निवासी रोहन, सौरिख का संदीप व औरैया निवासी नरेंद्र और एलएलआर अस्पताल का वार्ड ब्वाय अजय भी जांच के घेरे में हैं। दलाल शिवम के साथी अजय ने ही नरेंद्र को फोन किया था कि एक मरीज को उसके अस्पताल में भर्ती कराना है। इसके लिए उसे मोटी रकम मिलेगी, जिसके बाद दिसंबर 2025 में किडनी ट्रांसप्लांट के बाद महिला को उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन वहां उसकी हालत बिगड़ी तो शिवम ने महिला को स्कार्पियो से दिल्ली के बड़े अस्पताल भिजवाया था, जहां दलाल नवीन ने महिला को बिना पर्चोंं व फाइल के भर्ती करा दिया, पर बाद में उसकी मौत हो गई।

    जानें कैसे हुआ किडनी कांड का राजफाश

    किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह से जुड़ा मामला 30 मार्च को सामने आया था। केशवपुरम के आहूजा अस्पताल में मुजफ्फर नगर सिविल लाइन की पारुल तोमर का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। बिहार बेगुसराय के भगवानपुर थानाक्षेत्र के औगान गांव निवासी आयुष ने दलालों के माध्यम से अपनी किडनी बेची थी। पारुल का ट्रांसप्लांट 29 मार्च की रात किया गया था। ट्रांसप्लांट के बाद पारुल को प्रिया अस्पताल में और आयुष को मेडलाइफ अस्पताल में रखा गया था। पैसे विवाद के बाद यह मामला पुलिस के सामने आया और फिर किडनी कांड का राजफाश हुआ।

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