भविष्य बताने की कला में बनाना चाहते हैं करियर? कानपुर यूनिवर्सिटी दे रही ज्योतिष में मास्टर डिग्री, जानें कोर्स की पूरी डिटेल
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय का दीनदयाल शोध केंद्र एमए ज्योतिर्विज्ञान सहित कई रोजगारपरक पाठ्यक्रम चला रहा है। ये कोर्स युवाओं, महिलाओं और सेव ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) परिसर स्थित दीनदयाल शोध केंद्र भारतीय प्राच्य विद्या, परंपरागत ज्ञान और रोजगारपरक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां संचालित पाठ्यक्रमों को हर साल विश्वविद्यालय को निर्धारित सीटों के सापेक्ष अधिक आवेदन मिलते है।
प्रति कुलपति व केंद्र निदेशक प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने बताया कि केंद्र में संचालित एमए ज्योतिर्विज्ञान पाठ्यक्रम युवाओं, महिलाओं और सेवानिवृत्त लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस कोर्स में विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। कालगणना, कुंडली निर्माण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल, जन्मांक, फलादेश, वैवाहिक विचार और ज्योतिषीय विश्लेषण जैसे विषयों का गहन अध्ययन कराया जाता है।
ज्योतिष पढ़ाने वाले आचार्य स्वयंप्रकाश अवस्थी ने बताया कि पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद कई विद्यार्थियों ने आनलाइन और आफलाइन माध्यम से अपने ज्योतिष परामर्श केंद्र शुरू किए हैं और अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान बैच में 20 से अधिक महिलाएं अध्ययनरत हैं, जबकि 15 से ज्यादा सेवानिवृत्त लोगों ने भी ज्योतिष सीखने के उद्देश्य से प्रवेश लिया है। इससे स्पष्ट है कि यह पाठ्यक्रम हर आयु वर्ग के लोगों को आकर्षित कर रहा है।
कोर्स की बढ़ रही लोकप्रियता
दीनदयाल शोध केंद्र के निदेशक प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने बताया कि भारतीय प्राच्य विद्या को बढ़ावा देने के लिए केंद्र में एम.ए. ज्योतिर्विज्ञान, पीजी डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र तथा डिप्लोमा इन कर्मकांड संचालित किए जा रहे हैं। डिप्लोमा इन कर्मकांड सबसे डिमांड वाला पाठ्यक्रम है। बीते साल इसकी निर्धारित 30 सीटों के सापेक्ष 38 आवेदन प्राप्त हुए थे। छात्रों के विशेष आग्रह पर विश्वविद्यालय ने सीटें बढ़ाकर सभी को प्रवेश दिया था।
वहीं एमए ज्योतिर्विज्ञान, पीजी डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र सभी पाठ्यक्रम स्वरोजगार आधारित हैं। ज्योतिष पढ़ने वाले विद्यार्थी परामर्श केंद्र खोल सकते हैं, कर्मकांड का प्रशिक्षण लेकर पुरोहित कार्य शुरू कर सकते हैं, जबकि वास्तुशास्त्र का कोर्स करने वाले भवन निर्माण और गृह परामर्श के क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।
प्रमुख पाठ्यक्रम
| पाठ्यक्रम | सीटें | फीस (₹) | अवधि | योग्यता |
|---|---|---|---|---|
| एमए ज्योतिर्विज्ञान | 50 | 10,200 | 2 वर्ष (4 सेमेस्टर) | स्नातक, 45% अंक |
| पीजी डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र | 30 | 11,200 | 1 वर्ष (2 सेमेस्टर) | स्नातक, 45% अंक |
| डिप्लोमा इन कर्मकांड | 50 | 9,200 | 1 वर्ष (2 सेमेस्टर) | इंटरमीडिएट, 45% अंक |
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