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    Weather Updates: UP में मार्च में दिसंबर जैसा मौसम, Kanpur सहित कई जिलों में सुबह घना कोहरा, जानें अचानक क्यों बदला

    Updated: Tue, 10 Mar 2026 01:16 PM (IST)

    मार्च में कानपुर समेत यूपी के कई जिलों में सुबह घना कोहरा छाया रहा, जो दिसंबर जैसी स्थिति थी। मौसम विशेषज्ञ ने बताया कि दिन में तेज धूप से धरती गर्म ह ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, कानपुर। यूपी में मंगलवार की सुबह मौसम में अचानक बदलाव दिखा। मार्च में दिसंबर के मौसम देखने को मिला। सुबह कानपुर सहित कई जिलों में कोहर छाया रहा। हमीरपुर, औरैया, कानपुर देहात, घाटमपुर, नरवल और बिल्हौर एरिया में सुबह घना कोहरा छाया रहा। मार्निंग वाक पर निकले लोगों को दिसंबर और जनवरी जैसा कोहरा छाया दिखा।


    बिल्हौर में दृश्यता करीब 30 मीटर रही। ड्राइवर डीपर जलाकर गाड़ी चलाते दिखे। मौसम विभाग के अनुसार पूरे दिन मौसम साफ रहेगा। धूप के साथ गर्मी का एहसास कम होगा। गंगा मेला भी है, ऐसे में रंग खेलने वालों को दिन में धूप राहत देगी। गंगा मेला के दिन शहर में तेज धूप के बीच रंग, गुलाल और पानी की बौछारों के साथ लोग बिना मौसम की चिंता के उत्सव का आनंद ले सकेंगे।

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    मार्च के महीने में जहां सोमवार को दिन का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा चुका है, वहीं मंगलवार की सुबह के समय कई इलाकों में कोहरा या धुंध दिखाई दे रही है। गर्मी के बीच कोहरे की यह स्थिति लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बन गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक और मौसम संबंधी कारण जिम्मेदार हैं।

    मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय के अनुसार दिन में तेज धूप के कारण धरती तेजी से गर्म हो जाती है और वातावरण में नमी बढ़ जाती है। रात में जब आसमान साफ रहता है तो धरती अपनी गर्मी तेजी से आसमान की तरफ छोड़ देती है, जिससे सतह के पास की हवा अचानक ठंडी हो जाती है। इस प्रक्रिया को रेडिएशन फाग कहा जाता है। ठंडी हवा नमी को अधिक देर तक रोक नहीं पाती और वह सूक्ष्म जल बूंदों में बदलकर कोहरे का रूप ले लेती है।

    उन्होंने बताया कि दिन और रात के तापमान में अधिक अंतर भी कोहरे के बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि दिन में तापमान 35 डिग्री के आसपास रहने और रात में इसके 15–18 डिग्री तक गिरने से वातावरण में अस्थिरता पैदा होती है, जिसके कारण सुबह के समय धुंध या हल्का कोहरा बन जाता है।

    मार्च में सक्रिय रहने वाले पश्चिमी विक्षोभ भी इस स्थिति को बढ़ाते हैं। इनके कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में नमी बढ़ जाती है। जब यह नमी रात की ठंडी हवा के संपर्क में आती है तो कोहरा अधिक सघन हो जाता है।

    इसके साथ ही हवा की धीमी गति भी कोहरे को फैलने नहीं देती। जब हवा लगभग शांत रहती है तो कोहरा जमीन के पास ही जमा रहता है और सुबह के समय अधिक दिखाई देता है।
    डॉ. पांडेय ने बताया कि वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषण के कण भी कोहरे को घना बनाने में सहायक होते हैं। ये कण नमी को जमने के लिए आधार प्रदान करते हैं, जिससे धुंध या स्माग जैसी स्थिति बन जाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च में तापमान बढ़ने के बावजूद यदि नमी, तापमान में अंतर, कम हवा और पश्चिमी विक्षोभ जैसी परिस्थितियां एक साथ बन जाएं तो सुबह के समय कोहरा या धुंध दिखाई देना सामान्य मौसमीय प्रक्रिया है।

    कोहरे की चादर में इत्र नगरी

    मंगलवार तड़के से कोहरे की चादर छाने से आवागमन पर असर पड़ा। वाहन हेड लाइट जलाकर धीमी गति से चले। सोमवार को अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। इस वजह से दिन भर अधिक गर्मी महसूस की गई थी। राहगीर पसीना-पसीना होने लगे थे। करीब 12 घंटे बाद ही मौसम के करवट बदलने से सुबह-सुबह कोहरे की चादर देख कुछ देर तक ठंडक का अहसास रहा।

    हमीरपुर में भी घने कोहरे के साथ हुई सुबह

    हमीरपुर में भी सुबह लोगों को जनवरी जैसी सर्दी का एहसास हुआ। सुबह होते ही घना कोहरा छा गया, जिससे जनजीवन प्रभावित नजर आया। कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो गई और हाईवे पर चलने वाले वाहनों को दिन में भी अपनी हैडलाइट लाइट जलाकर चलना पड़ा।