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    पर्यावरणीय संकटों व एआइ से उत्पन्न नैतिक दुविधाओं का सामना कर रही दुनिया: डॉ. अनन्या

    By Jitendra Kumar Upadhyay Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Sun, 31 May 2026 06:35 PM (IST)

    Ambedkar University Lucknow: विश्वविद्यालय के काउंसिल हाल में को ‘लिविंग द विवेकानंद वे : प्रैक्टिकल स्पिरिचुअलिटी फार माडर्न इंडिया’ पुस्तक पर एक संव ...और पढ़ें

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    डॉ. अनन्या अवस्थी को सम्मानित करते कुलपति प्रो. आरके मित्तल l सौ: बीबीएयू

    HighLights

    1. ‘लिविंग द विवेकानंद वे : प्रैक्टिकल स्पिरिचुअलिटी फार माडर्न इंडिया’ पुस्तक पर एक संवादात्मक चर्चा

    2. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के शिक्षा विभाग का आयोजन

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के शिक्षा विभाग में शनिवार को विश्वविद्यालय के काउंसिल हाल में को ‘लिविंग द विवेकानंद वे : प्रैक्टिकल स्पिरिचुअलिटी फार माडर्न इंडिया’ पुस्तक पर एक संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई। इसका शुभारंभ कुलपति प्रो.आरके मित्तल ने किया। पुस्तक का सह-लेखन डॉ. अनन्या अवस्थी और डा. निखिल यादव ने किया है।

    डॉ. अनन्या अवस्थी ने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डाला और कहा कि आज दुनिया भू-राजनीतिक संघर्षों, पर्यावरणीय संकटों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उत्पन्न नैतिक दुविधाओं और युवाओं में बढ़ते मानसिक व भावनात्मक तनाव जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। स्वामी विवेकानंद द्वारा प्रतिपादित वेदांत दर्शन पर आधारित भारत की आध्यात्मिक परंपरा एकत्व, सामंजस्य और परस्पर जुड़ाव के सिद्धांतों के माध्यम से इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है। 

    विवेकानंद केंद्र के उत्तर प्रांत के उप प्रमुख और पुस्तक के सह-लेखक डॉ. निखिल यादव ने कहा भारत आज विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और स्वतंत्रता के बाद देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। आगामी दो दशक भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और राष्ट्रीय एकता एवं समग्र विकास के लिए विवेकानंद का मार्ग सबसे उपयुक्त दिशा प्रदान करता है।

    बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि नई पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों के विचारों का गंभीर अध्ययन करना चाहिए। ऐसे विमर्श युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।आयोजन में शिक्षा विभाग के अधिष्ठाता प्रो. हरिशंकर सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक शोधार्थी और विद्यार्थी समेत कई विद्वान मौजूद थे।

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