यूपी में चुनावी चाल बदलने निकले चंद्रशेखर, 'परिवर्तन यात्रा' के बहाने दलित-मुस्लिम वोटों पर नजर
चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में 'परिवर्तन यात्रा' निकाल रही है। ...और पढ़ें


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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक अखाड़े में जातीय गोलबंदी के नए खिलाड़ी उतर रहे हैं। 2024 में नगीना लोकसभा सीट से जीत दर्ज राजनीतिक पंडितों को हैरान करने वाले आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रदेश 33 बिंदुओं पर सत्ता परिवर्तन यात्रा के बहाने न सिर्फ जमीन बनाने निकले हैं, बल्कि सपा और बसपा का विकल्प बनने का प्रयास कर रहे हैं।
चंद्रशेखर की दृष्टि प्रदेश की 86 सुरक्षित सीटों और 70 से अधिक ऐसी सीटों पर है जहां मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से अधिक है। पिछले दिनों हस्तिनापुर से चुनाव लड़ने का संकेत देकर प्रदेश की राजनीति में नई खदबदाहट पैदा की है।
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव की आहट तेज हो रही है। चुनाव सिर्फ आठ माह दूर है। भाजपा जहां मोदी-योगी फैक्टर, संगठन की शक्ति और जातीय समीकरणों को धार देकर बढ़ रही है, वहीं सपा पूरी ताकत से फिर पीडीए कार्ड खेलेगी।
कांग्रेस में बूथ स्तर पर इकाइयों के गठन की चर्चा छिड़ी है तो बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं पुराने कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग कर फीडबैक ले रही हैं, लेकिन इस सभी दलों के बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने चंद्रशेखर की अगुआई में जून में प्रदेशभर में परिवर्तन यात्रा निकानने पर फोकस किया है।
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पार्टी यात्रा के बहाने जहां 75 जिलों की सभी 403 विधानसभा सीटों को कनेक्ट करेगी, वहीं दलित, मुस्लिम एवं पिछड़ी जातियों को गोलबंद करने का प्रयास है। आजाद समाज पार्टी जमीन पर ताकत बढ़ाने में सफल हुई तो गठबंधन की गुंजाइश बढ़ेगी।
आसपा का जनाधार फिलहाल बिजनौर, सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर एवं आसपास तक सीमित है। बीएसपी कई चुनावों से अपना सियासी वजूद बचाने में संघर्ष कर रही है। समाजवादी पार्टी ने 2024 में भाजपा को बड़ा झटका अवश्य दिया, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं।
पीडीए के वोटों में बंटवारा की स्थिति देखते हुए सपा के कई नेता आजाद समाज पार्टी को अपने साथ जोड़ने की पैरवी कर रहे हैं। 2017 के विधान सभा चुनाव में बीएसपी ने 22 प्रतिशत वोट प्राप्त किया, जो 2022 में घटकर 12.88 प्रतिशत रह गया। यहां आजाद समाज पार्टी अपने लिए संभावनाएं खोजने में जुटी है।