'दोषी का बचना नहीं, निर्दोष का फंसना घातक', राज्यपाल ने सिविल जज प्रशिक्षुओं को दिया निष्पक्षता का संदेश
लखनऊ में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) २०२२ बैच के प्रशिक्षुओं ने राज्यपाल से मुलाकात की। राज्यपाल ने उन्हें निष्पक्ष रहने और संवेदनशीलता से काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को सहानुभूति से सुनें और मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं। राज्यपाल ने दहेज और भूमि विवाद जैसे अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने का सुझाव दिया। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा और पारिवारिक मूल्यों पर भी जोर दिया।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) 2022 बैच के 70 नवनियुक्त प्रशिक्षुओं ने शुक्रवार को राजभवन में राज्यपाल से भेंट की, इस दौरान राज्यपाल ने प्रशिक्षु न्यायाधीशों को सीख देते हुए कहा कि न्यायिक पद की सबसे बड़ी कसौटी निष्पक्षता और संवेदनशीलता है। किसी दोषी का छूट जाना उतना घातक नहीं, जितना किसी निर्दोष को सजा मिलना।
राज्यपाल ने प्रशिक्षुओं को संदेश दिया कि वे जनता की समस्याओं को सहानुभूति से सुने और हर निर्णय में मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं। न्याय केवल कानून की किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के दर्द को समझने और सही समय पर न्याय देने की जिम्मेदारी भी है।
अपने अनुभव साझा करते हुए राज्यपाल ने बताया कि जेलों में अधिकांश कैदी दहेज प्रथा, भूमि विवाद और धोखाधड़ी जैसे मामलों से जुड़े होते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए जिलों और विश्वविद्यालयों में संवाद व जागरूकता कार्यक्रम जरूर चलाए जाएं।
राज्यपाल ने नारी अदालतों और महिला सुरक्षा समितियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज तभी सुरक्षित बनेगा, जब न्यायिक अधिकारी अपने फैसलों में निष्पक्ष रहेंगे और समाज से जुड़कर काम करेंगे।
पारिवारिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा वातावरण बने कि वृद्धाश्रम की जरूरत ही न पड़े। इस मौके पर न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक दिवेश चंद्र सामंत ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपलब्धियों को बताया। प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।