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    पैकेट बंद फूड और मोबाइल बच्चों के लिए है कितना खतरनाक, एक्सपर्ट की ये बात सोचने को कर देगी मजबूर

    Updated: Thu, 24 Jul 2025 03:08 PM (IST)

    लखनऊ में डॉक्टरों ने बताया कि मोबाइल और फास्ट फूड की लत बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। इससे नींद की समस्या आंखों की कमजोरी और मोटापा बढ़ रहा है। बारिश के मौसम में बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए स्वच्छता और संतुलित आहार जरूरी है। बच्चों को घर का बना खाना खिलाएं और जंक फूड से दूर रखें।

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    जंक फूड, पैकेट बंद फूड और मोबाइल की लत खराब कर रही बच्चों की सेहत

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। नए दौर की तकनीक ने जिंदगी को आसान तो किया, लेकिन इसके दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। बात मोबाइल और टीवी की करें तो ये फायदेमंद होने के साथ साथ नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। मोबाइल का अत्यधिक उपयोग नींद की समस्या, आंखों की रोशनी में कमी और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।

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    आजकल छोटे बच्चों में मोबाइल और टीवी की लत आम हो गई है, जो बिल्कुल ठीक नहीं है। इससे उनकी आंखें कमजोर हो रही हैं। वे खाना ठीक से नहीं खा रहे हैं और बच्चों के हार्मोन का स्तर भी बिगड़ रहा है।

    भोजन करते समय मोबाइल का प्रयोग करने से बच्चे ज्यादा या कम खाते हैं, जिससे मोटापे या कुपोषण का खतरा होता है। एकाग्रता भी कमजोर हो रही है। इसके साथ ही फास्ट फूड का चलन भी खूब बढ़ा है।

    शहरों में रहने वाले ज्यादातर परिवार में बच्चे फास्टफूड, पैकेट बंद फूड, बिस्किट-चिप्स पर निर्भर हो गए हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। जंक फूड और पैकेट बंद फूड बच्चों में मोटापा, हृदय रोग, लिवर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।

    ये जरूरी जानकारी गुरुवार को दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर कार्यक्रम में लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में पीडियाट्रिक विभाग के एडिशनल प्रो. डा. केके यादव ने दी। उन्होंने कई पाठकों के सवालों के जवाब दिए।

    सवाल-बारिश के मौसम में बच्चों को संक्रामक रोग से कैसे बचाएं?- सतीश चंद्र द्विवेदी, हरदोई

    -बारिश के मौसम में स्वच्छता, संतुलित आहार और मच्छरों से बचाव पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। बच्चों में बार-बार हाथ धोने की आदत डालें। खासकर, खाना खाने से पहले और शौच से आने के बाद आवश्यक है। बच्चे साफ-सुथरे कपड़े पहनें और गीले कपड़ों को तुरंत बदल दें। उबला हुआ या फिल्टर का पानी पीएं और पिलाएं।

    फल और सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर ही खिलाएं। दिन हो या रात मच्छरदानी का उपयोग करें। बच्चों की त्वचा पर मच्छर भगाने वाली क्रीम लगाएं। घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यह मच्छरों के प्रजनन का स्थान बन सकता है। बच्चों को खांसी या छींकते समय कोहनी या टिशू में मुंह छुपाने के लिए बताएं। पौष्टिक आहार, मौसमी फल खिलाएं।

    सवाल- मेरा पांच साल का बेटा है। ठीक से भोजन नहीं करता है। हर वक्त बिस्किट, नमकीन या फास्ट फूड की जिद करता है। -रूपम पांडेय, सुल्तानपुर

    -देखिए, बच्चों में जैसी आदत डालेंगी वैसे हो जाएंगे। इसलिए कहा जाता है कि शुरुआत से ही घर का भोजन और फल देना चाहिए। आपके बेटे को कोई समस्या नहीं है। यदि आप चाहती हैं कि वह ठीक से घर का भोजन करे और मौसमी फल और सब्जी खाए तो अनुशासन सख्त करना होगा। वह चाहे भोजन करे या नहीं उसे अगले कुछ दिनों तक बिस्किट, नमकीन, टाफी या चाकलेट बिल्कुल न दें। दूध की जगह पनीर, खीर या सेवई बनाकर खिलाएं। ऐसा पांच-सात दिन करने से बदलाव दिखेगा और वह भोजन भी करने लगेगा। बच्चे को पानी भी पिलाइए।

    सवाल-मेरा छह साल का बेटा है। वह बिना मोबाइल खाना नहीं खाता है। कैसे लत छुड़ाएं?- विभा मिश्रा, सीतापुर

    -यह आश्चर्यजनक तथ्य है कि माता-पिता कहते हैं कि बच्चा बिना मोबाइल के भोजन नहीं करता है। यह मनुष्य की चारित्रिक कमजोरी है। बच्चों को अन्य गतिविधियों में व्यस्त रखें। उनके साथ कोई इंडोर गेम खेलें। फोन की लत के नुकसान बताते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं। मेरा मानना है कि अभिभावक ही बच्चों के मूड को देखकर आदत बदल सकते हैं।

    सवाल- मेरा डेढ़ वर्ष का पोता है। एक सप्ताह पहले उसे डायरिया हो गया था। दो दिन अस्पताल में भर्ती रहा, लेकिन घर पहुंचने के दूसरे दिन तेज बुखार के साथ झटके आने लगे तो फिर से भर्ती कराया है। कोई गंभीर समस्या तो नहीं है?- आरके गुप्ता, लखनऊ

    -ये फेब्राइल सीजर के लक्षण हैं, जिसे ज्वर के दौरे भी कहा जाता है। बच्चों में बुखार के कारण होने वाले दौरे होते हैं। यह छह माह से पांच साल की उम्र के बच्चों में आम है। खासकर, 12 से 18 महीने के बीच अधिक होता है। ये दौरे आमतौर पर पांच मिनट से कम समय तक रहते हैं और अपने आप बंद हो जाते हैं। बेहोशी के साथ शरीर में ऐंठन भी होती है। यदि सही इलाज चल रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है।

    सवाल-मेरी तीन साल की पोती है। मौसम में बदलाव होते ही उसे सर्दी-खांसी और बुखार की दिक्कत हो जाती है। यह अस्थमा तो नहीं है?-एके श्रीवास्तव, सीतापुर

    -पांच साल की उम्र तक बच्चों को मौसम में बदलाव के बाद ऐसा होता है, लेकिन सर्दी-खांसी और बुखार के साथ पसली चले तो अस्थमा हो सकता है। हालांकि, आपकी पोती को ऐसी परेशानी नहीं है। यह सामान्य वायरल है और यह बिना एंटीबायोटिक दवा के ठीक हो जाएगा।

    सवाल- मेरी सात साल की बेटी है। उसे अक्सर सर्दी-खांसी के साथ सांस लेने पर सीटी की आवाज आती है।- राजेश श्रीवास्तव, बाराबंकी

    -ये अस्थमा के लक्षण हो सकते हैं। इसके लिए आपको एक बार मातृ एवं शिशु अस्पताल आकर दिखाना चाहिए। एक पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) किया जाता है, जिससे यह पता चलेगा कि कि बच्चे को अस्थमा या अन्य फेफड़ों की बीमारी है। इसमें देरी न करें। क्योंकि समय से इलाज शुरू होने पर ज्यादातर बच्चों में अस्थमा 12 साल की उम्र तक पूरी तरह ठीक हो जाता है।

    सवाल- बारिश के मौसम में बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए क्या खानपान होना चाहिए?- दीप्ति तिवारी, सीतापुर

    -बारिश के मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार देना चाहिए, जिसमें विटामिन सी, विटामिन डी और प्रोबायोटिक्स से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल हों। इसके अलावा जंक फूड और स्ट्रीट फूड से पूरी तरह परहेज करें। घर का बना वेजिटेबल सूप बच्चों के लिए एक हल्का और पौष्टिक विकल्प है। इसके अलावा मूंग दाल और चावल की खिचड़ी भी दे सकते हैं।

    डेंगू के लक्षण

    • -तेज बुखार
    • -सिरदर्द, खासकर आंखों के पीछे
    • -मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
    • -शरीर में चकत्ते
    • -मतली और उल्टी
    • -थकान और कमजोरी
    • -गंभीर मामलों में पेट दर्द, लगातार उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, मसूड़ों या नाक से खून आना, मल या उल्टी में खून

    मलेरिया के लक्षण

    • -कंपकंपी के साथ बुखार
    • -ठंड लगना
    • -पसीना आना
    • -सिरदर्द
    • -मतली और उल्टी
    • -शरीर में तेज दर्द, खासकर पीठ और पेट में
    • -तिल्ली का बढ़ना